Part V - Parliament • Article

अनुच्छेद 97 Simplified: सभापति और उपसभापति तथा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते

दोनों सदनों के प्रमुखों (सभापति, उपसभापति, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष) को संसद द्वारा तय किए गए वेतन और भत्ते दिए जाते हैं। ये वेतन भारत की 'संचित निधि' (Consolidated Fund) से दिए जाते हैं, जिसका अर्थ है कि इन पर हर साल संसद में मतदान कराने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे उनकी वित्तीय स्वतंत्रता बनी रहती है।

Official Text

97. सभापति और उपसभापति तथा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते– राज्य सभा के सभापति और उपसभापति को तथा लोक सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को, ऐसे वेतन और भत्तों का जो संसद्, विधि द्वारा, नियत करे और जब तक इस निमित्त इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसे वेतन और भत्तों का, जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं, संदाय किया जाएगा।

Simple Meaning

दोनों सदनों के प्रमुखों (सभापति, उपसभापति, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष) को संसद द्वारा तय किए गए वेतन और भत्ते दिए जाते हैं। ये वेतन भारत की 'संचित निधि' (Consolidated Fund) से दिए जाते हैं, जिसका अर्थ है कि इन पर हर साल संसद में मतदान कराने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे उनकी वित्तीय स्वतंत्रता बनी रहती है।

Explain Like Ten

संसद के नेताओं (जैसे लोक सभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति) को मिलने वाला वेतन संसद के कानून द्वारा तय होता है। यह पैसा सीधे 'भारत की संचित निधि' से आता है। इसका मतलब है कि सरकार उनके काम से नाराज होकर उनका वेतन नहीं रोक सकती या कम नहीं कर सकती। यह नियम उन्हें बिना किसी डर या प्रभाव के निष्पक्ष काम करने की आजादी देता है।

Student Mode

अनुच्छेद 97 संसद के पीठासीन अधिकारियों की वित्तीय स्वतंत्रता और निष्पक्षता को सुरक्षित करता है: (1) संसद को उनके वेतन और भत्ते कानून बनाकर तय करने का अधिकार है; (2) जब तक संसद ऐसा नहीं करती, तब तक दूसरी अनुसूची के प्रावधान लागू होंगे; (3) उनके वेतन भारत की संचित निधि पर भारित (charged upon the Consolidated Fund of India) होते हैं, जो वार्षिक बजटीय मतदान के अधीन नहीं होते। यह प्रावधान कार्यपालिका के हस्तक्षेप को रोकता है।

Example

सरकार बदलने या बजट पास होने में देरी होने पर भी संसद के पीठासीन अधिकारियों के वेतन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि वे संवैधानिक रूप से सुरक्षित हैं।

Key Takeaway

संसद के प्रमुखों की वित्तीय स्वतंत्रता सुरक्षित है।

FAQs

संसद के अधिकारियों के वेतन संचित निधि पर भारित क्यों होते हैं?

ताकि उनकी स्वतंत्रता बनी रहे। यदि उनके वेतन पर हर साल मतदान होता, तो सरकार या बहुमत दल वेतन कटौती की धमकी देकर उनके निर्णयों को प्रभावित कर सकता था। संचित निधि पर भारित होने से यह खतरा समाप्त हो जाता है।

संसद के अधिकारियों के वेतन कौन तय करता है?

संसद स्वयं कानून बनाकर (Salaries and Allowances of Officers of Parliament Act के तहत) उनके वेतन और भत्ते तय करती है। जब तक ऐसा नहीं किया जाता, संविधान की दूसरी अनुसूची लागू होती है।

Quiz

अनुच्छेद 97 के तहत किनके वेतन और भत्ते निर्धारित किए जाते हैं?

Answer: राज्यसभा के सभापति/उपसभापति और लोकसभा के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के

जब तक संसद कानून द्वारा वेतन तय नहीं करती, तब तक अधिकारियों के वेतन किससे संचालित होते हैं?

Answer: दूसरी अनुसूची

Related Topics