Part V - Parliament • Article
अनुच्छेद 88 Simplified: सदनों के बारे में मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार
अनुच्छेद 88 मंत्रियों और भारत के महान्यायवादी (Attorney-General) को एक विशेष अधिकार देता है। वे संसद् के किसी भी सदन (लोक सभा या राज्य सभा), संयुक्त बैठक या संसदीय समक्षति की बैठक में भाग ले सकते हैं और बोल सकते हैं। लेकिन वे उस सदन में वोट नहीं डाल सकते जिसके वे सदस्य नहीं हैं (महान्यायवादी तो किसी भी सदन के सदस्य नहीं होते, इसलिए वे कभी वोट नहीं दे सकते)।
Official Text
दिन के बारे मि मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार–प्रत्येक मंत्री और भारत के महान्यायवादी को यह अधिकार होगा की वह किसी भी सदन मि , सदिन की किसी संयु क्त बैठक मि और संसद की किसी समक्षति मि , जिसमें उसका नाम सदस्य के रूप मि दिया गया है, बोले और उसकी कार्यवाहयिि मि अन्यथा भाग ले, किंतु इस अनुच्छेद के आधार पर वह मत देने का हकदार नहीं होगा । ु च्छेद 85” के स्थान पर प्रतिस्थापित । प्रतिस्थापित । इस चर्चा को अग्रता देने के लिए” शब्दों का लोप किया गया । संसद के अधिकारि
Simple Meaning
अनुच्छेद 88 मंत्रियों और भारत के महान्यायवादी (Attorney-General) को एक विशेष अधिकार देता है। वे संसद् के किसी भी सदन (लोक सभा या राज्य सभा), संयुक्त बैठक या संसदीय समक्षति की बैठक में भाग ले सकते हैं और बोल सकते हैं। लेकिन वे उस सदन में वोट नहीं डाल सकते जिसके वे सदस्य नहीं हैं (महान्यायवादी तो किसी भी सदन के सदस्य नहीं होते, इसलिए वे कभी वोट नहीं दे सकते)।
Explain Like Ten
भले ही देश के महान्यायवादी (सरकारी वकील) कोई सांसद नहीं हैं, फिर भी वे संसद की बैठकों में जाकर भाषण दे सकते हैं। इसी तरह, एक सदन के मंत्री दूसरे सदन में जाकर बोल सकते हैं। लेकिन नियम यह है कि वे वहाँ वोट नहीं दे सकते जहाँ के वे सदस्य नहीं हैं।
Student Mode
यह मंत्रियों और भारत के महान्यायवादी को किसी भी सदन, संयुक्त बैठक या संसदीय समक्षति (यदि सदस्य नामित हों) की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार प्रदान करता है। हालाँकि, यह उन्हें मतदान का अधिकार (Right to Vote) नहीं देता है।
Example
यदि कोई मंत्री राज्य सभा का सदस्य है, तो भी वह लोक सभा में जाकर किसी विधेयक पर बोल सकता है और सरकार का पक्ष रख सकता है। इसी तरह, महान्यायवादी बिना सांसद हुए भी संसद में जाकर सरकार का कानूनी पक्ष स्पष्ट कर सकते हैं।
Key Takeaway
मंत्री और महान्यायवादी संसद के किसी भी सदन में बोल सकते हैं, लेकिन मतदान नहीं कर सकते (जब तक कि वे सदस्य न हों)।
FAQs
क्या कोई राज्य सभा का मंत्री लोक सभा में बोल सकता है?
हाँ, अनुच्छेद 88 के तहत वह लोक सभा में बोल सकता है और कार्यवाही में भाग ले सकता है, लेकिन वह लोक सभा में मतदान नहीं कर सकता।
महान्यायवादी को बिना सांसद हुए संसद में बोलने का अधिकार क्यों है?
चूंकि वे सरकार के सर्वोच्च कानूनी सलाहकार हैं, इसलिए संसद् को कानूनी मामलों पर सलाह देने के लिए उन्हें अनुच्छेद 88 के तहत यह विशेष अधिकार दिया गया है। लेकिन वे मतदान नहीं कर सकते।
चूंकि सभी मंत्रियों को 6 महीने के भीतर सांसद बनना अनिवार्य है, तो क्या आज अनुच्छेद 88 प्रासंगिक है?
हाँ, क्योंकि उन 6 महीनों के दौरान एक मंत्री संसद के किसी सदन का हिस्सा बने बिना भी दोनों सदनों की कार्यवाही में भाग ले सकता है। इसके अलावा, महान्यायवादी (AG) कभी भी सांसद नहीं होते — इसलिए उनके संसद में भाग लेने का एकमात्र आधार अनुच्छेद 88 ही है।
Quiz
अनुच्छेद 88 के तहत मंत्रियों और महान्यायवादी को संसद की कार्यवाही में क्या करने का अधिकार नहीं है?
Answer: मतदान करना
संसद के दोनों सदनों में बोलने का अधिकार इनमें से किसे है?
Answer: प्रत्येक मंत्री और भारत के महान्यायवादी