Part V - The Union • अनुच्छेद
अनुच्छेद 71 Simplified: राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित या संसक्त विषय
अनुच्छेद 71 भारत के सुप्रीम कोर्ट को राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित सभी शंकाओं और विवादों का फैसला करने की विशेष शक्ति देता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि सुप्रीम कोर्ट चुनाव को शून्य (अमान्य) घोषित करता है, तो राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति द्वारा अदालत के फैसले की तारीख से *पहले* किए गए सभी आधिकारिक कार्य पूरी तरह से वैध रहते हैं।
Official Text
राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित या संसक्त विषय--(1) राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से उत्पन्न या संसक्त सभी शंकाओं और विवादों की जांच और विनिश्चय उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाएगा और उसका विनिश्चय अंतिम होगा। (2) यदि उच्चतम न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति के राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया जाता है तो उसके द्वारा, यथास्थिति, राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के पद की शक्तियों के प्रयोग और कर्तव्यों के पालन में उच्चतम न्यायालय के विनिश्चय की तारीख को या उससे पहले किए गए कार्य उस घोषणा के कारण अविधिमान्य नहीं होंगे। (3) इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित या संसक्त किसी विषय का विनियमन संसद विधि द्वारा कर सकेगी। (4) राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के रूप में किसी व्यक्ति के निर्वाचन को उसे निर्वाचित करने वाले निर्वाचकगण के सदस्यों में किसी भी कारण से विद्यमान किसी रिक्ति के आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा।
Simple Meaning
अनुच्छेद 71 भारत के सुप्रीम कोर्ट को राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित सभी शंकाओं और विवादों का फैसला करने की विशेष शक्ति देता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि सुप्रीम कोर्ट चुनाव को शून्य (अमान्य) घोषित करता है, तो राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति द्वारा अदालत के फैसले की तारीख से *पहले* किए गए सभी आधिकारिक कार्य पूरी तरह से वैध रहते हैं।
Explain Like Ten
कल्पना कीजिए कि कोई कहता है कि क्लास मॉनिटर के चुनाव निष्पक्ष नहीं थे। आप किसी भी टीचर से शिकायत नहीं कर सकते — यह सीधे हेडमास्टर (सुप्रीम कोर्ट) के पास जाता है और उनका फैसला अंतिम होता है। अनुच्छेद 71 राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के लिए यही करता है। भले ही सुप्रीम कोर्ट बाद में कहे कि चुनाव अमान्य था, लेकिन उस व्यक्ति ने पद पर रहते हुए पहले जो भी काम किए थे, वे सभी वैध माने जाएंगे।
Student Mode
अनुच्छेद 71 राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से जुड़े सभी विवादों की जांच और फैसला करने का विशेष अधिकार क्षेत्र (Exclusive Jurisdiction) सुप्रीम कोर्ट को देता है। महत्वपूर्ण रूप से, खंड (2) यह सुनिश्चित करता है कि अदालत द्वारा चुनाव अमान्य घोषित किए जाने से पहले किए गए सभी कार्य वैध रहेंगे, जिससे प्रशासनिक संकट न आए। खंड (4) यह स्पष्ट करता है कि निर्वाचक मंडल में किसी भी रिक्ति के आधार पर चुनाव को चुनौती नहीं दी जा सकती।
Example
यदि कोई उम्मीदवार अदालत में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के चुनाव को चुनौती देता है, तो मामला सीधे अनुच्छेद 71 के तहत सुप्रीम कोर्ट जाता है। यदि चुनाव अवैध घोषित कर दिया जाता है, तो उस दिन से पहले राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित विधेयक अभी भी वैध कानून बने रहेंगे।
Key Takeaway
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव विवादों के निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट एकमात्र मंच है, जो उनके पिछले आधिकारिक कार्यों की रक्षा करके शासन में स्थिरता सुनिश्चित करता है।
FAQs
राष्ट्रपति चुनाव विवादों पर किस अदालत का अधिकार क्षेत्र है?
अनुच्छेद 71(1) के तहत, केवल भारत के सुप्रीम कोर्ट को राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों से संबंधित सभी विवादों की जांच और निर्णय करने का विशेष मूल अधिकार क्षेत्र प्राप्त है।
यदि सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति के चुनाव को अमान्य घोषित करता है, तो उनके द्वारा हस्ताक्षरित कानूनों का क्या होता है?
वे कार्य वैध रहते हैं। खंड (2) सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले किए गए सभी कार्यों की सुरक्षा करता है, जिससे कानूनी और प्रशासनिक संकट से बचा जा सके।
क्या चुनाव को इस आधार पर चुनौती दी जा सकती है कि निर्वाचक मंडल की कुछ सीटें खाली थीं?
नहीं। खंड (4) कहता है कि निर्वाचक मंडल के सदस्यों के बीच किसी भी कारण से मौजूद रिक्ति को राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति चुनाव पर सवाल उठाने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
क्या अनुच्छेद 71 में संशोधन किया गया था?
हाँ। 39वें संविधान संशोधन अधिनियम (1975) ने इस पर सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को छीनने की कोशिश की थी, लेकिन 44वें संविधान संशोधन (1978) ने सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को पुनः बहाल किया और अनुच्छेद 71 को उसके वर्तमान स्वरूप में फिर से तैयार किया।
Quiz
राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से जुड़े विवादों का निपटारा कौन सी अदालत करती है?
Answer: सुप्रीम कोर्ट
यदि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति का चुनाव शून्य घोषित कर दिया जाता है, तो फैसले से पहले किए गए कार्यों का क्या होता है?
Answer: वे वैध बने रहते हैं
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