Part V - The Union • अनुच्छेद

अनुच्छेद 70 Simplified: अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन

अनुच्छेद 70 एक 'सुरक्षा कवच' नियम है। यदि कोई ऐसी अजीब स्थिति उत्पन्न होती है जो संविधान में नहीं लिखी गई है (जैसे राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों एक ही समय में काम करने में असमर्थ हों), तो संसद को यह तय करने का अधिकार है कि कौन कार्यभार संभालेगा। इसी शक्ति के तहत संसद ने कानून बनाया कि यदि दोनों पद खाली हों, तो भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेंगे।

Official Text

अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन--संसद, ऐसी किसी आकस्मिकता में जो इस अध्याय में उपबंधित नहीं है, राष्ट्रपति के कृत्यों के निर्वहन के लिए ऐसा उपबंध कर सकेगी जो वह ठीक समझे।

Simple Meaning

अनुच्छेद 70 एक 'सुरक्षा कवच' नियम है। यदि कोई ऐसी अजीब स्थिति उत्पन्न होती है जो संविधान में नहीं लिखी गई है (जैसे राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों एक ही समय में काम करने में असमर्थ हों), तो संसद को यह तय करने का अधिकार है कि कौन कार्यभार संभालेगा। इसी शक्ति के तहत संसद ने कानून बनाया कि यदि दोनों पद खाली हों, तो भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेंगे।

Explain Like Ten

कल्पना कीजिए कि स्कूल की नियम पुस्तिका में लिखा है कि यदि प्रिंसिपल नहीं हैं तो वाइस-प्रिंसिपल स्कूल संभालेंगे। लेकिन क्या होगा यदि प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल दोनों ही एक साथ गायब हो जाएं? अनुच्छेद 70 संसद को एक खाली पन्ना देता है जहाँ संसद इस अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए नया नियम लिख सकती है, जिसकी योजना पहले संविधान में नहीं थी।

Student Mode

अनुच्छेद 70 एक अवशिष्ट प्रावधान (Residuary Provision) है जो संसद को ऐसी किसी भी आकस्मिकता के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है जो राष्ट्रपति के कृत्यों के निर्वहन से संबंधित हो और जिसे अध्याय I (अनुच्छेद 52-69) में शामिल न किया गया हो। इसका उपयोग राष्ट्रपति (कृत्यों का निर्वहन) अधिनियम, 1969 को पारित करने के लिए किया गया था, जिसके तहत राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों पद खाली होने पर भारत के मुख्य न्यायाधीश कार्यभार संभालते हैं।

Example

1969 में, जब राष्ट्रपति जाकिर हुसैन का निधन हुआ और उपराष्ट्रपति वी.वी। गिरी ने चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दे दिया, तब मुख्य न्यायाधीश एम। हिदायतुल्ला अनुच्छेद 70 के तहत संसद द्वारा दी गई शक्ति के कारण कार्यवाहक राष्ट्रपति बने थे।

Key Takeaway

संसद इस अनुच्छेद का उपयोग करके नेतृत्व में किसी भी अप्रत्याशित संकट को संभाल सकती है।

FAQs

अनुच्छेद 70 का वास्तव में कब उपयोग किया गया था?

1969 में, जब राष्ट्रपति जाकिर हुसैन का पद पर रहते हुए निधन हो गया और उपराष्ट्रपति वी.वी। गिरि ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दे दिया, जिससे दोनों पद खाली हो गए। मुख्य न्यायाधीश एम। हिदायतुल्ला ने इस प्रावधान के तहत 35 दिनों तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया।

संसद ने अनुच्छेद 70 के तहत कौन सा कानून पारित किया?

संसद ने 'राष्ट्रपति (कृत्यों का निर्वहन) अधिनियम, 1969' पारित किया, जो उन आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन करने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश को नामित करता है जो संविधान में अन्यत्र शामिल नहीं हैं।

क्या संसद सामान्य राष्ट्रपति उत्तराधिकार के नियमों को बदलने के लिए अनुच्छेद 70 का उपयोग कर सकती है?

नहीं। अनुच्छेद 70 केवल उन आकस्मिकताओं पर लागू होता है जो पहले से अध्याय I में प्रदान नहीं की गई हैं। यह अनुच्छेद 65 या 66 को ओवरराइड या संशोधनत नहीं कर सकता।

Quiz

अनुच्छेद 70 के तहत, अप्रत्याशित आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कृत्यों के निर्वहन के लिए कौन प्रावधान बना सकता है?

Answer: संसद

1969 में अनुच्छेद 70 द्वारा दी गई शक्तियों के तहत किस न्यायाधीश ने भारत के कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया था?

Answer: न्यायाधीश एम। हिदायतुल्ला

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