Part XXI - Temporary, Transitional and Special Provisions • अनुच्छेद

अनुच्छेद 390 Simplified: इस संविधान के प्रारंभ और 1950 के 31 मार्च के बीच प्राप्त या एकत्र किया गया धन अथवा किया गया खर्च

यह एक अस्थायी बजट नियम था। इसने 26 जनवरी 1950 से लेकर 31 मार्च 1950 तक सरकार द्वारा वसूले गए टैक्सों और किए गए खर्चों को वैध घोषित किया, ताकि नया बजट शुरू होने तक प्रशासन सुचारू रूप से चल सके। इसे 1956 में निरस्त किया गया।

Official Text

[इस संविधान के प्रारंभ और 1950 के 31 माचर् के बीच प्राप्त या उत्थापत या व्यय किया हु आ धन ।]–संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 कि धारा 29 और अनु सू ची द्वारा (1-11 -1956 से) लोप किया गया ।

Simple Meaning

यह एक अस्थायी बजट नियम था। इसने 26 जनवरी 1950 से लेकर 31 मार्च 1950 तक सरकार द्वारा वसूले गए टैक्सों और किए गए खर्चों को वैध घोषित किया, ताकि नया बजट शुरू होने तक प्रशासन सुचारू रूप से चल सके। इसे 1956 में निरस्त किया गया।

Explain Like Ten

यह नियम तय करता था कि देश के गणतंत्र बनने के बाद पहले दो महीनों में सरकार जो टैक्स वसूलेगी और खर्च करेगी, वह सब कानूनी रूप से सही माना जाएगा।

Student Mode

अनुच्छेद 390 ने 26 जनवरी 1950 और 31 मार्च 1950 के बीच की अवधि के लिए वित्तीय संक्रमण को संभाला। इसने भारत सरकार या राज्यों द्वारा संचित निधि से किए गए खर्चों और प्राप्त राजस्व को अनंतिम राष्ट्रपति/राज्यपाल के प्रमाणीकरण द्वारा वैध बनाया। इसे 1956 में हटाया गया।

Example

फरवरी 1950 में सरकारी डॉक्टरों को दी गई सैलरी और कलेक्ट किया गया टैक्स इसी अनुच्छेद के कारण कानूनी रूप से सही माना गया, क्योंकि उस समय का बजट पुराना ही चल रहा था।

Key Takeaway

गणतंत्र के पहले दो महीनों के लिए वित्तीय लेन-देन को वैध बनाने वाला निरसित बजट नियम।

FAQs

गणतंत्र के आरंभ में सरकारी खर्चों की वैधता किस अनुच्छेद के तहत तय हुई थी?

अनुच्छेद 390 के तहत, जिसने 31 मार्च 1950 तक के संक्रमणकालीन खर्चों को मंजूरी दी थी।

Quiz

संविधान के प्रारंभ से 31 मार्च 1950 के बीच सरकार द्वारा प्राप्त धन और किए गए खर्चों को वैधता देने वाला कौन सा अनुच्छेद 1956 में निरस्त किया गया?

Answer: अनुच्छेद 390

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