Part XXI - Temporary, Transitional and Special Provisions • अनुच्छेद
अनुच्छेद 389 Simplified: डोमिनियन विधान-मंडल तथा प्रांतों और देशी राज्यों के विधान-मंडलों में लंबित विधेयकों के बारे में उपबंध
यह अनुच्छेद सुनिश्चित करता था कि आजादी से पहले की डोमिनियन संसद या प्रांतीय विधानसभाओं में जो कानून विधेयक पेंडिंग थे, वे खारिज न हों। वे नए भारतीय लोकतंत्र की संबंधित विधानसभाओं में आगे बढ़ाए गए। इसे 1956 में हटाया गया।
Official Text
[डोमीनियन विधान-मंडल तथा प्रान्ति और देशी राज्यि के विधान-मंडलि मि लंबित विधेयकि के बारे मि उपबंध ।]–संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 कि धारा 29 और अनु सू ची द्वारा (1-11 -1956 से) लोप किया गया ।
Simple Meaning
यह अनुच्छेद सुनिश्चित करता था कि आजादी से पहले की डोमिनियन संसद या प्रांतीय विधानसभाओं में जो कानून विधेयक पेंडिंग थे, वे खारिज न हों। वे नए भारतीय लोकतंत्र की संबंधित विधानसभाओं में आगे बढ़ाए गए। इसे 1956 में हटाया गया।
Explain Like Ten
यह नियम कहता था कि पुरानी सरकार के समय जो कानून बनाने का काम आधा बचा हुआ था, उसे नई सरकार आने पर भी जारी रखा जाएगा और पूरा किया जाएगा।
Student Mode
अनुच्छेद 389 विधायी निरंतरता बनाए रखने का कार्य करता था। इसके तहत भारत डोमिनियन के विधानमंडल या प्रांतों व रियासतों के विधानमंडलों में लंबित पड़े विधेयकों को गणतंत्र के बाद नई विधानसभाओं या संसद में उसी स्तर से आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई। इसे 1956 में निरस्त किया गया।
Example
1949 में संयुक्त प्रांत की विधानसभा में पेंडिंग एक भू-सुधार बिल 1950 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में जारी रहा और पास हुआ, क्योंकि उसे अनुच्छेद 389 से सुरक्षा मिली थी।
Key Takeaway
ब्रिटिश-काल से भारतीय गणतंत्र में पेंडिंग बिलों को सुरक्षित ट्रांसफर करने वाला निरसित नियम।
FAQs
क्या संविधान लागू होने पर पुराने पेंडिंग बिल स्वतः रद्द हो गए थे?
नहीं, अनुच्छेद 389 के तहत वे सुरक्षित नई विधानसभाओं में स्थानांतरित कर दिए गए थे।
Quiz
औपनिवेशिक काल की विधानसभाओं में लंबित विधेयकों को गणतंत्र के बाद की विधानसभाओं में ले जाने वाला कौन सा अनुच्छेद 1956 में निरस्त किया गया था?
Answer: अनुच्छेद 389