Part XXI - Temporary, Transitional and Special Provisions • अनुच्छेद

अनुच्छेद 386 Simplified: पहली अनुसूची के भाग ख के राज्यों की मंत्रि-परिषद

यह अनुच्छेद मैसूर या हैदराबाद जैसी पूर्व रियासतों (भाग ख राज्यों) के अंतरिम मंत्रिमंडलों को 26 जनवरी 1950 को अनंतिम सरकार के रूप में कार्य जारी रखने का अधिकार देता था। इसे 1956 में निरस्त किया गया।

Official Text

[पहलि अनु सू ची के भाग ख मि के राज्यि कि मंति्र-परिषद् ।]–संविधान ( सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 कि धारा 29 और अनु सू ची द्वारा (1-11-1956 से) लोप किया गया ।

Simple Meaning

यह अनुच्छेद मैसूर या हैदराबाद जैसी पूर्व रियासतों (भाग ख राज्यों) के अंतरिम मंत्रिमंडलों को 26 जनवरी 1950 को अनंतिम सरकार के रूप में कार्य जारी रखने का अधिकार देता था। इसे 1956 में निरस्त किया गया।

Explain Like Ten

यह नियम राजा-रजवाड़ों के राज्यों के मंत्रियों को चुनाव होने तक नई सरकार के तहत भी काम करने की छूट देता था।

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अनुच्छेद 386 भाग ख के राज्यों में कार्यकारी सत्ता की निरंतरता का उपबंध करता था। इसके तहत वहां के पुराने मंत्रियों को नए अनंतिम राज्य प्रमुखों के अधीन मंत्रि-परिषद के रूप में मान्यता दी गई थी, जिसे 1956 में हटाया गया।

Example

1950 में गणतंत्र दिवस पर, मैसूर के अंतरिम मंत्रिमंडल ने चुनाव होने तक प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखते हुए नए राज्यपाल के तहत अनंतिम कैबिनेट के रूप में काम करना शुरू किया।

Key Takeaway

1950 में एकीकृत रियासतों के मंत्रिमंडलों को अनंतिम राज्य मंत्रिमंडलों में बदलने वाला एक निरसित अनुच्छेद।

FAQs

भाग ख के राज्यों की मंत्रि-परिषद का दर्जा किसे दिया गया था?

इन राज्यों में विलय के समय कार्यरत अंतरिम मंत्रियों को ही अनंतिम मंत्रि-परिषद माना गया था।

Quiz

पहली अनुसूची के भाग ख के राज्यों में अनंतिम मंत्रि-परिषद की निरंतरता से संबंधित किस अनुच्छेद को 7वें संशोधन द्वारा हटाया गया?

Answer: अनुच्छेद 386

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