Part XXI - Temporary, Transitional and Special Provisions • अनुच्छेद
अनुच्छेद 384 Simplified: राज्यपालों की मंत्रि-परिषद
यह अनुच्छेद प्रांतीय मुख्यमंत्रियों (तब प्रीमियर कहे जाते थे) और उनके मंत्रिमंडलों को 26 जनवरी 1950 को संबंधित राज्य के राज्यपाल के अधीन अनंतिम मंत्रि-परिषद के रूप में कार्य जारी रखने की शक्ति देता था। इसे 1956 में निरस्त किया गया।
Official Text
[राज्यपालि कि मंति्र-परिषद् ।]–संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 कि धारा 29 और अनु सू ची द्वारा (1-11 -1956 से) लोप किया गया ।
Simple Meaning
यह अनुच्छेद प्रांतीय मुख्यमंत्रियों (तब प्रीमियर कहे जाते थे) और उनके मंत्रिमंडलों को 26 जनवरी 1950 को संबंधित राज्य के राज्यपाल के अधीन अनंतिम मंत्रि-परिषद के रूप में कार्य जारी रखने की शक्ति देता था। इसे 1956 में निरस्त किया गया।
Explain Like Ten
यह नियम राज्यों के पुराने मंत्रियों को देश के गणतंत्र बनने पर भी अपनी नौकरी और काम जारी रखने की इजाजत देता था।
Student Mode
अनुच्छेद 384 राज्यों में कार्यपालिका की निरंतरता सुनिश्चित करता था। इसके तहत पुराने प्रांतों के मंत्रियों को अनंतिम राज्यपाल के अधीन अनंतिम मंत्रि-परिषद के रूप में काम करने का अधिकार मिला, जिसे 1956 में 7वें संशोधन द्वारा हटाया गया।
Example
बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों ने गणतंत्र लागू होने के बाद भी शासन जारी रखा क्योंकि अनुच्छेद 384 ने उन्हें अनंतिम मंत्रि-परिषद घोषित किया था।
Key Takeaway
राज्यों में अंतरिम मंत्रिमंडलों को कानूनी मान्यता देने वाला निरसित संक्रमणकालीन अनुच्छेद।
FAQs
क्या 1950 में गणतंत्र बनने के बाद राज्य के पुराने मंत्री तुरंत हट गए थे?
नहीं, अनुच्छेद 384 के तहत वे अनंतिम रूप से अपने पदों पर बने रहे।
Quiz
राज्यों के स्तर पर राज्यपालों की अनंतिम मंत्रि-परिषद की निरंतरता से संबंधित कौन सा अनुच्छेद 7वें संशोधन द्वारा हटाया गया?
Answer: अनुच्छेद 384