Part XXI - Temporary, Transitional and Special Provisions • अनुच्छेद

अनुच्छेद 381 Simplified: राष्ट्रपति की मंत्रि-परिषद

अनुच्छेद 381 मूल रूप से 26 जनवरी 1950 को डॉ। राजेंद्र प्रसाद (अनंतिम राष्ट्रपति) के लिए एक अस्थायी मंत्रि-परिषद बनाने का प्रावधान करता था। 1956 में देश में पहली स्थायी सरकार बनने के बाद 7वें संशोधन द्वारा इसे निरस्त कर दिया गया।

Official Text

[राष्ट्रपति कि मंति्र-परिषद् ।]–संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 कि धारा 29 और अनु सू ची द्वारा (1-11-1956 से) लोप किया गया ।

Simple Meaning

अनुच्छेद 381 मूल रूप से 26 जनवरी 1950 को डॉ। राजेंद्र प्रसाद (अनंतिम राष्ट्रपति) के लिए एक अस्थायी मंत्रि-परिषद बनाने का प्रावधान करता था। 1956 में देश में पहली स्थायी सरकार बनने के बाद 7वें संशोधन द्वारा इसे निरस्त कर दिया गया।

Explain Like Ten

यह नियम पुराने समय में हमारे पहले राष्ट्रपति जी की मदद के लिए एक अस्थायी मंत्रियों की टीम बनाने के लिए था, जो अब खत्म हो चुका है।

Student Mode

अनुच्छेद 381 एक संक्रमणकालीन उपबंध था जो अनंतिम राष्ट्रपति के लिए एक अंतरिम मंत्रि-परिषद की स्थापना सुनिश्चित करता था। इसे संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 द्वारा निरसित कर दिया गया क्योंकि आम चुनाव के बाद स्थायी सरकार बन चुकी थी।

Example

गणतंत्र के शुरुआती दिनों में शासन चलाने के लिए अंतरिम मंत्रिमंडल को ही इस अनुच्छेद के तहत अस्थायी मंत्रि-परिषद का दर्जा मिला था।

Key Takeaway

अनंतिम राष्ट्रपति के लिए अस्थायी मंत्रिमंडल की व्यवस्था करने वाला निरसित अनुच्छेद।

FAQs

अनुच्छेद 381 का मुख्य उद्देश्य क्या था?

इसका मुख्य उद्देश्य गणतंत्र के आरंभ में राष्ट्रपति के कार्यों के संचालन के लिए एक अस्थायी कैबिनेट की व्यवस्था करना था।

इस अनुच्छेद को कब और क्यों निरस्त किया गया?

इसे 1956 के 7वें संविधान संशोधन द्वारा निरस्त किया गया क्योंकि इसकी आवश्यकता समाप्त हो गई थी।

Quiz

गणतंत्र के प्रारंभ में राष्ट्रपति की अनंतिम मंत्रि-परिषद से संबंधित किस अनुच्छेद को 7वें संविधान संशोधन द्वारा निरस्त किया गया?

Answer: अनुच्छेद 381

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