Part XXI - Temporary, Transitional and Special Provisions • अनुच्छेद

अनुच्छेद 378क Simplified: आंध्र प्रदेश विधानसभा की अवधि के बारे में विशेष उपबंध

अनुच्छेद 378क एक अस्थायी प्रावधान था जिसे 1956 में जोड़ा गया था। जब मद्रास और हैदराबाद के कुछ हिस्सों को मिलाकर आंध्र राज्य का गठन किया गया था, तो इसने इसकी पहली विधानसभा के लिए एक निश्चित पांच साल की अवधि तय की थी, जिससे नियमित चुनाव सुनिश्चित हो सकें।

Official Text

आंध्र प्रदेश �विधिान सभा क� अव�ध के बारे में� �विशेष उपबंधों – अनु च्छेद 172 में� �कसी बात के होते हु ए भी, राज्यों पु नगर्ठन अ�ध�नयमें, 1956 क� धारा 28 औरधारा 29 के उपबंधों� के अधीन ग�ठत आंĢ प्रदेश राज्यों क� �विधिानसभा, य�द पहले ह� �वघ�टत नह�ं कर द� जाती है तो, उक्त धारा 29 में� �न�दर्ष्ट तार�ख से पांच वषर् क� अव�ध तक बनी रहेगी, इससे अ�धक नह�ं और उक्त अव�ध क� समेंािप्त का प�रणामेंउस �विधिान सभा का �विघटन होगा ।

Simple Meaning

अनुच्छेद 378क एक अस्थायी प्रावधान था जिसे 1956 में जोड़ा गया था। जब मद्रास और हैदराबाद के कुछ हिस्सों को मिलाकर आंध्र राज्य का गठन किया गया था, तो इसने इसकी पहली विधानसभा के लिए एक निश्चित पांच साल की अवधि तय की थी, जिससे नियमित चुनाव सुनिश्चित हो सकें।

Explain Like Ten

1956 में, जब आंध्र प्रदेश नाम का नया राज्य बना, तो उसकी सरकार को बाकी राज्यों के साथ तालमेल में रखने के लिए इस नियम ने वहां की विधानसभा के लिए 5 साल का कार्यकाल तय कर दिया, जिसके बाद वहां नए चुनाव होने थे।

Student Mode

अनुच्छेद 378क को 7वें संविधान संशोधन अधिनियम (1956) द्वारा संविधान में शामिल किया गया था। यह अनुच्छेद 172 के सामान्य नियमों पर एक अपवाद था। इसने आंध्र राज्य अधिनियम, 1953 के तहत नवगठित आंध्र प्रदेश विधानसभा के कार्यकाल को 5 वर्ष के लिए निर्धारित किया, ताकि भाषाई आधार पर पुनर्गठित राज्यों के चुनावी चक्रों को समन्वित किया जा सके।

Example

1956 में आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद, तुरंत राज्य चुनाव कराने के बजाय, अनुच्छेद 378क ने मौजूदा विधानसभा को 1962 में समाप्त होने वाले पांच साल के कार्यकाल को पूरा करने की अनुमति दी, जिससे इसके चुनावी चक्र को अन्य राज्यों के साथ जोड़ा जा सके।

Key Takeaway

यह 1950 के दशक में नवनिर्मित आंध्र प्रदेश विधानसभा के लिए चुनावी चक्रों को संरेखित करने के लिए पांच साल का निश्चित कार्यकाल तय करता था।

FAQs

संविधान में अनुच्छेद 378क क्यों जोड़ा गया था?

इसे 1956 में नवगठित आंध्र प्रदेश विधानसभा के लिए पांच वर्ष का कार्यकाल निर्धारित करने के लिए जोड़ा गया था।

अनुच्छेद 378क ने अस्थायी रूप से किस अनुच्छेद को दरकिनार किया था?

इन्होंने अनुच्छेद 172 को दरकिनार किया था, जो राज्य विधानसभाओं की अवधि से संबंधित है।

Quiz

किस संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 378क जोड़ा गया था?

Answer: 7वां संशोधन

अनुच्छेद 378क के तहत आंध्र प्रदेश विधानसभा की अवधि कितने वर्ष तय की गई थी?

Answer: 5 वर्ष

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