Part XXI - Temporary, Transitional and Special Provisions • अनुच्छेद
अनुच्छेद 377 Simplified: भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के बारे में उपबंध
अनुच्छेद 377 ने स्वतंत्रता-पूर्व भारत के महालेखापरीक्षक को भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) के नवनिर्मित संवैधानिक पद में परिवर्तित किया। इसने सुनिश्चित किया कि उनके वेतन, पेंशन और कर्तव्यों को नए संविधान के तहत संरक्षित किया जाए, जिससे देश की वित्तीय लेखापरीक्षा की निरंतरता बनी रहे।
Official Text
भारत के नियंत्रक-महालेखापरिकि के बारे मि उपबंध – इस संविधान के प्रारंभ से ठकि पहले पद धारण करने वाला भारत का महालेखापरिकि, यदि वह अन्यथा निर्वाचन न कर चु का हो तो, ऐसे प्रारंभ पर भारत का नियंत्रक-महालेखापरिकि हो जाएगा और तब ऐसे वेतनि तथा अनु पिस्थति छु ट्टि और पि शन के संबंध मि ऐसे अधिकारि का हकदार होगा जो भारत के नियंत्रक-महालेखापरिकि के संबंध मि अनु च्छेद 148 के खंड (3) के अधीन उपबंधित है और अपनी उस पदाव धि कि समािप्त तक पद धारण करने का हकदार होगा जो ऐसे प्रारंभ से ठकि पहले उसे लागू होने वाले उपबंधि के अधीन अवधारित कि जाए । 1. सं विधान (पहला संशोधन) अधिनियम, 1951 कि धारा 13 द्वारा ( 18- 6-1951 से) जोड़ा गया ।
Simple Meaning
अनुच्छेद 377 ने स्वतंत्रता-पूर्व भारत के महालेखापरीक्षक को भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) के नवनिर्मित संवैधानिक पद में परिवर्तित किया। इसने सुनिश्चित किया कि उनके वेतन, पेंशन और कर्तव्यों को नए संविधान के तहत संरक्षित किया जाए, जिससे देश की वित्तीय लेखापरीक्षा की निरंतरता बनी रहे।
Explain Like Ten
1950 से पहले, एक मुख्य अधिकारी होता था जिसका काम यह देखना था कि सरकारी पैसा सही जगह खर्च हो। जब संविधान लागू हुआ, तो इस नियम ने उस पद का नाम बदलकर 'भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक' कर दिया और उसी व्यक्ति को अपना काम जारी रखने की मंजूरी दी।
Student Mode
अनुच्छेद 377 वित्तीय लेखापरीक्षा विभाग के प्रमुख के पद के संक्रमण से संबंधित है। इसके तहत पूर्व महालेखापरीक्षक को भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) के रूप में पुनर्गठित किया गया। लोक धन के इस प्रहरी की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए उनके वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़े अधिकारों को अनुच्छेद 148(3) के तहत सुरक्षित किया गया।
Example
श्री वी। नरहरि राव, जो औपनिवेशिक भारत के महालेखापरीक्षक थे, 26 जनवरी, 1950 को बिना किसी नई नियुक्ति प्रक्रिया के, अनुच्छेद 377 के तहत स्वतंत्र भारत के पहले नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) बन गए।
Key Takeaway
यह स्वतंत्रता-पूर्व महालेखापरीक्षक को सीएजी के संवैधानिक पद पर स्थानांतरित करके देश की वित्तीय निगरानी की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
FAQs
स्वतंत्र भारत के पहले नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) कौन थे?
श्री वी। नरहरि राव, जिन्होंने अनुच्छेद 377 के तहत भारत के महालेखापरीक्षक के पद से पदभार ग्रहण किया था।
भारत के सीएजी के वेतन और पेंशन की रक्षा कौन सा अनुच्छेद करता है?
अनुच्छेद 148(3) उनके वेतन, छुट्टी और पेंशन की शर्तों की रक्षा करता है।
Quiz
अनुच्छेद 377 के तहत, स्वतंत्रता-पूर्व महालेखापरीक्षक किस पद में परिवर्तित हो गए?
Answer: भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक
अनुच्छेद 377 के तहत सीएजी के वेतन और भत्ते किस अनुच्छेद के तहत संरक्षित हैं?
Answer: अनुच्छेद 148