Part XXI - Temporary, Transitional and Special Provisions • अनुच्छेद
अनुच्छेद 372 Simplified: विद्यमान विधियों का प्रवृत्त बने रहना और उनका अनुकूलन
अनुच्छेद 372 ने यह सुनिश्चित किया कि 1950 में संविधान लागू होने से ठीक पहले भारत में सक्रिय सभी कानून (जैसे औपनिवेशिक काल के कानून, जैसे भारतीय दंड संहिता या पुलिस अधिनियम) तब तक लागू रहें जब तक कि संसद द्वारा उन्हें बदला या निरस्त नहीं कर दिया जाता। इसने कानून व्यवस्था में किसी भी शून्य को आने से रोका और गणतंत्र में परिवर्तन के दौरान निरंतरता सुनिश्चित की। राष्ट्रपति को इन कानूनों को संविधान के अनुरूप ढालने का अधिकार भी दिया गया था।
Official Text
विद्यमान विधियि का प्रवृ ि बने रहना और उनका अनु कू लन – (1) अनु च्छेद 395 मि निदिर्ष्ट अधिनियमितियि का इस संविधान द्वारा निरसन होने पर भी, कि ं तु इस संविधान के अन्य उपबंधि के अधीन रहते हु ए, इस संविधान के प्रारंभ से ठकि पहले भारत के राज्यिेत्र मि सभी प्रवृ ि विधि वहां तब तक प्रवृ ि बनी रहेगी जब तक किसी समि विधान-मंडल या अन्य समि प्राधिकारि द्वारा उसे परिवतिर्त या निरसित या संशोधित नहीं कर दिया जाता है । (2) भारत के राज्यिेत्र मि किसी प्रवृ ि विधि के उपबंधि को इस संविधान के उपबंधि के अनु रूप बनाने के प्रयोजन के लिए राष्ट्रपति, आदेश ∗ द्वारा, ऐसी विधि मि निरसन के रूप मि या संशोधन के रूप मि ऐसे अनु कू लन और उपांतरण कर सकेगा जो आवश्यक या समीचीन हि और यह उपबंध कर सकेगा कि वह विधि ऐसी तारीख से जो आदेश मि विनिदिर्ष्ट कि जाए, इस प्रकार किए गए अनु कू लनि और उपांतरणि के अधीन रहते हु ए प्रभावी होगी और किसी ऐसे अनु कू लन या उपांतरण को किसी न्यायालय मि प्रश्नगत नहीं किया जाएगा । (3) खंड (2) कि कोई बात– (क) राष्ट्रपति को इस संविधान के प्रारंभ से [तीन वषर्] कि समािप्त के पश्चात ् किसी विधि का कोई अनु कू लन या उपांतरण करने के लिए सशक्त करने वालि, या (ख) किसी समि विधान-मंडल या अन्य समि प्राधिकारि को, राष्ट्रपति द्वारा उक्त खंड के अधीन अनु कू लित या उपांतरित किसी विधि का निरसन या संशोधन करने से रोकने वालि, नहीं समझी जाएगी । ∗ देखिए, अधिसू चना सं0 का0नि 0आ0 115, तारीख 5 जू न 1950, भारत का राजपत्र, असाधारण, भाग 2, अनु भाग 3, पृ 0 51 अधिसू चना सं 0 का0नि 0आ0 870, तारीख 4 नवंबर , 1950, भारत का राजपत्र, असाधारण, भाग 2, अनु
Simple Meaning
अनुच्छेद 372 ने यह सुनिश्चित किया कि 1950 में संविधान लागू होने से ठीक पहले भारत में सक्रिय सभी कानून (जैसे औपनिवेशिक काल के कानून, जैसे भारतीय दंड संहिता या पुलिस अधिनियम) तब तक लागू रहें जब तक कि संसद द्वारा उन्हें बदला या निरस्त नहीं कर दिया जाता। इसने कानून व्यवस्था में किसी भी शून्य को आने से रोका और गणतंत्र में परिवर्तन के दौरान निरंतरता सुनिश्चित की। राष्ट्रपति को इन कानूनों को संविधान के अनुरूप ढालने का अधिकार भी दिया गया था।
Explain Like Ten
जब भारत 1950 में गणतंत्र बना, तो हमने पुराने सभी नियम अचानक नहीं हटाए। इस नियम ने कहा कि पुराने कानून वैसे ही चलते रहेंगे ताकि देश सामान्य रूप से काम करता रहे, जब तक कि हमारी अपनी नई संसद उन्हें बदल न दे।
Student Mode
अनुच्छेद 372 का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और कानूनी महत्व है। खंड (1) यह प्रावधान करता है कि संविधान लागू होने (26 जनवरी, 1950) से ठीक पहले भारत के राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त सभी कानून प्रवृत्त बने रहेंगे, भले ही अनुच्छेद 395 द्वारा पुराने औपनिवेशिक अधिनियमों को निरस्त कर दिया गया हो। खंड (2) राष्ट्रपति को इन कानूनों को नए संविधान के अनुरूप ढालने के लिए उनमें आवश्यक अनुकूलन और रूपांतरण करने की शक्ति प्रदान करता है।
Example
जब भारत 26 जनवरी, 1950 को एक गणतंत्र बना, तो पुलिस ने काम करना बंद नहीं किया और न ही अदालतें बंद हुईं। अनुच्छेद 372 के तहत, नए लोकतांत्रिक शासन के तहत भी पुराने पुलिस कानून और नागरिक संहिताएं बिना किसी रुकावट के लागू रहीं।
Key Takeaway
यह नए गणतंत्र में पुराने कानूनों को तब तक लागू रखकर कानूनी निरंतरता सुनिश्चित करता है जब तक कि उन्हें नई संसद द्वारा बदला या निरस्त न किया जाए।
FAQs
संविधान लागू होने के बाद ब्रिटिश काल के कानूनों का क्या हुआ?
अनुच्छेद 372 के तहत, वे तब तक प्रवृत्त बने रहे जब तक कि सक्षम भारतीय विधायिका द्वारा उनमें संशोधन या उन्हें निरस्त नहीं कर दिया गया।
नये संविधान के लागू होने पर पुराने कानूनों को उसके अनुरूप बनाने का अधिकार किसे दिया गया था?
राष्ट्रपति को पुराने कानूनों को संविधान के सिद्धांतों के अनुरूप ढालने और संशोधित करने का अधिकार दिया गया था।
Quiz
भारत के संविधान का कौन सा अनुच्छेद विद्यमान विधियों के प्रवृत्त बने रहने का उपबंध करता है?
Answer: अनुच्छेद 372
विद्यमान कानूनों को संविधान के अनुरूप बनाने के लिए उनमें अनुकूलन और रूपांतरण करने की शक्ति किसके पास थी?
Answer: राष्ट्रपति