Part XXI - Temporary Provisions • अनुच्छेद

अनुच्छेद 370 Simplified: जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थायी उपबंध

अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था जिसने जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा और स्वायत्तता दी थी, जिसके तहत वहां का अपना अलग संविधान और ध्वज था। अगस्त 2019 में, भारत सरकार ने संसद की मंजूरी से इस विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है, और भारत का पूरा संविधान अन्य राज्यों की तरह वहां भी पूरी तरह लागू होता है।

Official Text

जम्मू -कश्मीर राज्य के संबंध मि अस्थायी उपबंध – (1) इस संविधान मि किसी बात के होते हु ए भी, – (क) अनु च्छेद 238 के उपबंध जम्मू -कश्मीर राज्य के संबंध मि लागू नहीं हगिे ; (ख) उक्त राज्य के लिए विधि बनाने कि संसद् कि शिक्त,– (i) संघ सू ची और समवति सू ची के उन विषयि तक सीमित होगी िजनको राष्ट्रपति, उस राज्य कि सरकार से परामशर् करके, उन विषयि के तत्स्थानी विषय घोषित कर दे, जो भारत डोमिनियन मि उस राज्य के अधिमिलन को शासि त करने वाले अधिमिलन पत्र मि ऐसे विषयि के रूप मि विनिदिर्ष्ट हि िजनके संबंध मि डोमिनियन विधान-मंडल उस राज्य के लिए विधि बना सकता है; और ∗∗ राष्ट्रपति, संसद् कि सिफारिश पर भारत के संविधान के अनु च्छेद 370 के खंड (1) के साथ पठित अनु च्छेद 370 के खंड (3) द्वारा प्रदि शिक्तयि का प्रयोग करते हु ए यह घोषणा करते हि कि 6 अगस्त, 2019 से उक्त अनु च्छेद 370 के सभी खंड, सिवाय निम्नलिखित के, जो नीचे दिए गए हि के अनु सार है, प्रचालन मि नहीं रहि गे, अथार्त ् : – “370. इस संविधान के समय-समय पर यथा संशोधित, सभी उपबंध बिना किन्हंि उपातंरणि या अपवादि के अनु च्छेद 152 या अनु च्छेद 308 या इस संविधान के किसी अन्य अनु च्छेद या जम्मू -कश्मीर के संविधान मि किसी अन्य उपाबंध या किसी विधि, दस्तावेज, निणर्य, अध्यादेश, आदेश, उपविधि, नियम, विनियम, अधिसू चना या भारत के राज्यिेत्र मि विधि का बल रखने वालि किसी रूढ़ि या प्रथा या किसी अन्य लिखत, संघी या करार जो अनु च्छेद 363 के अधीन यथा परिकिल्पत या अन्यथा है, मि तत्प्रतिकू ल किसी बात के अन्तविर्ष्ट होते हु ए भी, जम्मू -कश्मीर राज्य को लागू हगिे ।”। (परिशिष्ट 3 देखि ) । 1. भारत का संविधान कि खंड (3) द्वारा प्रदि शिक्तयि का प्रयोग करते हु ए राष्ट्रपति ने जम्मू -कश्मीर राज्य कि संविधान सभा कि सिफारिश पर यह घोषणा कि, कि 17 नवंबर , 1952 से उक्त अनु च्छेद 370 इस उपांतरण के साथ प्रवतर्नीय होगा कि उसके खंड (1) मि स्पष्टकिरण के स्थान पर निम्नलिखित स्पष्टकिरण रख दिया गया है, अथार्त ् : – “स्पष्टकिरण – इस अनु च्छेद के प्रयोजनि के लिए राज्य कि सरकार से वह व्यिक्त अभिप्रेत है िजसे राज्य कि विधान सभा कि सिफारिश पर राष्ट्रपति ने राज्य कि तत्समय पदारूढ़ मंति्र-परिषद् कि सलाह पर कायर् करने वाले जम्मू -कश्मीर के सदरे रियासत के रूप मि मान्यता प्रदान कि हो ।”। (सं.आ. 44, दिनांक 15 नवंबर, 1952) । * अब “राज्यपाल” (ii) उक्त सू चियि के उन अन्य विषयि तक सीमित होगी जो राष्ट्रपति, उस राज्य कि सरकार कि सहमति से, आदेश द्वारा, विनि दिर्ष्ट करे । स्पष्टकिरण – इस अनु च्छेद के प्रयोजनि के लिए, उस राज्य कि सरकार से वह व्यिक्त अभिप्रेत है िजसे राष्ट्रपति से, जम्मू -कश्मीर के महाराजा कि 5 माचर्, 1948 कि उद्घोषणा के अधीन तत्समय पदस्थ मंति्र-परिषद् कि सलाह पर कायर् करने वाले जम्मू -कश्मीर के महाराजा के रूप मि तत्समय मान्यता प्राप्त थी ; (ग) अनु च्छेद 1 और इस अन

Simple Meaning

अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था जिसने जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा और स्वायत्तता दी थी, जिसके तहत वहां का अपना अलग संविधान और ध्वज था। अगस्त 2019 में, भारत सरकार ने संसद की मंजूरी से इस विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है, और भारत का पूरा संविधान अन्य राज्यों की तरह वहां भी पूरी तरह लागू होता है।

Explain Like Ten

पहले कश्मीर के लिए कुछ अलग और खास नियम हुआ करते थे, जिससे वहां भारत के सारे नियम सीधे नहीं चलते थे। लेकिन साल 2019 में सरकार ने इस नियम को बदल दिया। अब कश्मीर भी भारत के किसी भी दूसरे राज्य की तरह है और वहां भी वही नियम चलते हैं जो बाकी देश में चलते हैं।

Student Mode

अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष स्वायत्तता प्रदान करने वाला एक अस्थायी उपबंध (Temporary Provision) था। (1) इसके तहत केवल अनुच्छेद 1 और अनुच्छेद 370 ही जम्मू-कश्मीर पर स्वतः लागू होते थे, और अन्य प्रावधान राष्ट्रपति के आदेश द्वारा ही लागू किए जा सकते थे। (2) 5 अगस्त 2019 को, राष्ट्रपति ने संविधान (जम्मू-कश्मीर पर लागू) आदेश, 2019 (C.O. 272) जारी कर अनुच्छेद 367 में संशोधन किया, जिसने अनुच्छेद 370 के तहत 'राज्य की संविधान सभा' को 'राज्य की विधानसभा' के रूप में व्याख्यायित किया। इसके बाद संसद ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 पारित किया, जिसने राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नामक दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया। दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने इस निर्णय को वैध ठहराया।

Example

पहले सूचना का अधिकार (RTI) और शिक्षा का अधिकार (RTE) जैसे कई केंद्रीय कानून जम्मू-कश्मीर में सीधे लागू नहीं होते थे, लेकिन अब अगस्त 2019 के सुधारों के बाद ये सभी कानून वहां के नागरिकों पर भी पूरी तरह लागू होते हैं।

Key Takeaway

अनुच्छेद 370 के बदलावों के साथ जम्मू-कश्मीर का भारत संघ में पूर्ण प्रशासनिक और कानूनी एकीकरण हो गया है।

FAQs

क्या अनुच्छेद 370 को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है?

तकनीकी रूप से, अनुच्छेद 370 अभी भी संविधान में मौजूद है, लेकिन राष्ट्रपति के आदेशों के माध्यम से इसके सभी विशेष अधिकारों और उपबंधों को पूरी तरह से निष्प्रभावी कर दिया गया है।

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के बाद वहां प्रशासनिक व्यवस्था में क्या बदलाव आया?

जम्मू-कश्मीर को विधानसभा सहित एक केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory with Legislature) बनाया गया है, जबकि लद्दाख को बिना विधानसभा का केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है।

Quiz

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को किस वर्ष प्रभावी रूप से निष्प्रभावी किया गया?

Answer: 2019

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