Part XXI - Temporary, Transitional and Special Provisions • अनुच्छेद
अनुच्छेद 369 Simplified: राज्य सूची के कुछ विषयों के संबंध में कानून बनाने की संसद की अस्थायी शक्ति
अनुच्छेद 369 एक अस्थायी नियम था जिसने देश की आजादी के बाद शुरुआती 5 वर्षों (1950 से 1955) के लिए संसद को राज्य सूची के कुछ महत्वपूर्ण विषयों (जैसे कपास, ऊन, कोयला, लोहा और खाद्यान्न के उत्पादन व वितरण) पर कानून बनाने की शक्ति दी थी, जैसे कि वे समवर्ती सूची के विषय हों। यह अवधि समाप्त होने के बाद यह शक्ति स्वतः समाप्त हो गई।
Official Text
राज्य सू ची के कु छ विषयि के संबंध मि विधि बनाने कि संसद् कि इस प्रकार अस्थायी शिक्त मानो वे समवति सू ची के विषय हि – इस संविधान मि किसी बात के होते हु ए भी, संसद् को इस संविधान के प्रारंभ से पाँच वषर् कि अवधि के दौरान निम्नलिखित विषयि के बारे मि विधि बनाने कि इस प्रकार शिक्त होगी मानो वे विषय समवति सू ची मि प्रगणित हि, अथार्त ् :– (क) सू ती और ऊनी वस्त्रि, कच्ची कपास (िजसके अंतगर्त ओटि हु ई रुई और बिना ओटि रुई या कपास है), बिनौले, कागज (िजसके अंतगर्त अखबारि कागज है), खाद्य पदाथर् (िजसके अंतगर्त खाद्य तिलहन और तेल हि ), पशु ओं के चारे (िजसके अंतगर्त खलि और अन्य सारकृ त चारे हि ), कोयले (िजसके अंतगर्त कोक और कोयले के व्यु त्पाद हि ), लोहे, इस्पात और अħक का किसी राज्य के भीतर व्यापार और वाणिज्य तथा उनका उत्पादन, प्रदाय और वितरण ; (ख) खंड (क) मि वणिर्त विषयि मि से किसी विषय से संबंधित विधियि के विरुद्ध अपराध, उन विषयि मि से किसी के संबंध मि उच्चतम न्यायालय से भिन्न सभी न्यायालयि कि अधिकारिता और शक्तियाँ, तथा उन विषयि मि से किसी के संबंध मि फसि कि ं तु इसके अंतगर्त किसी न्यायालय मि लि जाने वालि फसि नहीं है, कि ं तु संसद् द्वारा बनाई गई कोई विधि, िजसे संसद् इस अनु च्छेद के उपबंधि के अभाव मि बनाने के लिए समि नहीं होती, उक्त अवधि कि समािप्त पर अमिता कि मात्रा तक उन बाति के सिवाय प्रभावी नहीं रहेगी िजन्हि उस अवधि कि समािप्त के पहले किया गया है या करने का लोप किया गया है । उपबंध” के स्थान पर प्रतिस्थापित । ∗∗
Simple Meaning
अनुच्छेद 369 एक अस्थायी नियम था जिसने देश की आजादी के बाद शुरुआती 5 वर्षों (1950 से 1955) के लिए संसद को राज्य सूची के कुछ महत्वपूर्ण विषयों (जैसे कपास, ऊन, कोयला, लोहा और खाद्यान्न के उत्पादन व वितरण) पर कानून बनाने की शक्ति दी थी, जैसे कि वे समवर्ती सूची के विषय हों। यह अवधि समाप्त होने के बाद यह शक्ति स्वतः समाप्त हो गई।
Explain Like Ten
जब हमारा देश नया-नया आज़ाद हुआ था, तब देश में चीज़ों की कमी थी। इसलिए 5 सालों के लिए केंद्र सरकार को यह शक्ति दी गई थी कि वह राज्यों के कुछ कामों (जैसे कोयला और खाना बांटना) पर भी नियम बना सके ताकि देश में सब कुछ ठीक से चले। अब यह नियम खत्म हो चुका है।
Student Mode
अनुच्छेद 369 संविधान के भाग 21 (अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध) के तहत एक संक्रमणकालीन प्रावधान था। इसके तहत संविधान के प्रारंभ से पांच वर्ष की अवधि के लिए संसद को राज्य सूची (State List) के कुछ विषयों, जैसे सूती और ऊनी वस्त्रों, कच्चे कपास, कोयले, लोहे, इस्पात आदि के व्यापार, वाणिज्य, उत्पादन और वितरण के संबंध में कानून बनाने की शक्ति प्रदान की गई थी। यह व्यवस्था 1955 में समाप्त हो गई।
Example
आजादी के तुरंत बाद देश में खाद्यान्न और कोयले की भारी कमी को देखते हुए, संसद ने इस अनुच्छेद का उपयोग करके राज्यों में इन आवश्यक वस्तुओं के वितरण को नियंत्रित करने के लिए अस्थाई केंद्रीय कानून बनाए थे।
Key Takeaway
यह एक अस्थायी प्रावधान था जिसे आजादी के बाद के शुरुआती आर्थिक संकटों और समन्वय की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाया गया था।
FAQs
क्या अनुच्छेद 369 के तहत संसद की कानून बनाने की शक्ति आज भी लागू है?
नहीं, यह केवल संविधान के लागू होने के शुरुआती 5 वर्षों (1950-1955) के लिए एक अस्थायी व्यवस्था थी, जो अब समाप्त हो चुकी है।
Quiz
अनुच्छेद 369 के तहत संसद को राज्य सूची के कुछ विषयों पर कानून बनाने की अस्थायी शक्ति कितने समय के लिए दी गई थी?
Answer: 5 वर्ष