Part XIX - Miscellaneous • अनुच्छेद

अनुच्छेद 363क Simplified: देशी राज्यों के शासकों को दी गई मान्यता की समाप्ति और प्रिवी पर्स का अंत

अनुच्छेद 363क के तहत पूर्व राजा-महाराजाओं को मिलने वाली शाही उपाधि, राजा के रूप में मान्यता और 'प्रिवी पर्स' (सरकार द्वारा दिया जाने वाला सालाना भत्ता या पेंशन) को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। 1971 के इस ऐतिहासिक कानून के बाद भारत में राजा, महाराजा, या युवराज जैसी सभी शाही उपाधियों की कानूनी मान्यता खत्म हो गई और उनका पेंशन बंद कर दिया गया।

Official Text

संविधान (छब्बीसवां संशोधन) अधिनियम, 1971 की धारा 3 द्वारा (28-12-1971 से) अंतःस्थापित। (क) ऐसा राजा, प्रमुख या अन्य व्यक्ति, जिसे संविधान (छब्बीसवां संशोधन) अधिनियम, 1971 के प्रारंभ से पहले किसी समय राष्ट्रपति से किसी देशी राज्य के शासक के रूप में मान्यता प्राप्त थी, या ऐसा व्यक्ति, जिसे ऐसे प्रारंभ से पहले किसी समय राष्ट्रपति से ऐसे शासक के उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता प्राप्त थी, ऐसे प्रारंभ को और से ऐसे शासक या ऐसे शासक के उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं रह जाएगा ; (ख) संविधान (छब्बीसवां संशोधन) अधिनियम, 1971 के प्रारंभ को और से निजी थैली (प्रिवी पर्स) का अंत किया जाता है और निजी थैली की बाबत सभी अधिकार, दायित्व और बाध्यताएं निर्वापित की जाती हैं और तदनुसार खंड (क) में निर्दिष्ट, यथास्थिति, शासक या ऐसे शासक के उत्तराधिकारी को या अन्य व्यक्ति को किसी राशि का निजी थैली के रूप में संदाय नहीं किया जाएगा।

Simple Meaning

अनुच्छेद 363क के तहत पूर्व राजा-महाराजाओं को मिलने वाली शाही उपाधि, राजा के रूप में मान्यता और 'प्रिवी पर्स' (सरकार द्वारा दिया जाने वाला सालाना भत्ता या पेंशन) को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। 1971 के इस ऐतिहासिक कानून के बाद भारत में राजा, महाराजा, या युवराज जैसी सभी शाही उपाधियों की कानूनी मान्यता खत्म हो गई और उनका पेंशन बंद कर दिया गया।

Explain Like Ten

आज़ादी के बाद सरकार पुराने राजाओं को उनके खर्चे के लिए हर साल बहुत सारा पैसा देती थी, जिसे 'प्रिवी पर्स' कहते थे। 1971 में सरकार ने यह नियम बनाया कि अब से किसी भी राजा को यह सरकारी पैसा नहीं मिलेगा और वे राजा नहीं बल्कि आम नागरिक कहलाएंगे।

Student Mode

अनुच्छेद 363क को 26वें संविधान संशोधन अधिनियम (1971) द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। इसके दो मुख्य प्रावधान हैं: (a) भारत के राष्ट्रपति द्वारा पूर्व रियासतों के शासकों या उनके उत्तराधिकारियों को दी गई 'शासक' के रूप में मान्यता पूरी तरह समाप्त कर दी गई। (b) रियासतों के विलय के बदले शासकों को मिलने वाला 'प्रिवी पर्स' (Privy Purse) पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया और प्रिवी पर्स के संबंध में सभी अधिकार, दायित्व और आभार पूरी तरह से लुप्त हो गए।

Example

1971 से पहले ग्वालियर, जयपुर या मैसूर के पूर्व शासकों को सरकार से सालाना प्रिवी पर्स (लाखों रुपये का भत्ता) मिलता था। 26वें संशोधन द्वारा अनुच्छेद 363क जोड़े जाने के बाद यह प्रिवी पर्स पूरी तरह बंद हो गया।

Key Takeaway

शाही पेंशन (प्रिवी पर्स) और राजाओं की आधिकारिक मान्यताओं को समाप्त कर देश में पूर्ण लोकतांत्रिक और सामाजिक समानता स्थापित की गई।

FAQs

प्रिवी पर्स (Privy Purse) क्या था?

देशी रियासतों को भारत संघ में मिलाने के बदले वहां के शासकों को जीवनयापन और शाही खर्च के लिए दी जाने वाली सालाना कर-मुक्त राशि या सरकारी भत्ता प्रिवी पर्स कहलाता था।

किस प्रधानमंत्री के कार्यकाल में प्रिवी पर्स को समाप्त किया गया था?

श्रीमती इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान वर्ष 1971 में 26वें संविधान संशोधन द्वारा प्रिवी पर्स को समाप्त किया गया था।

Quiz

किस अनुच्छेद के द्वारा पूर्व शासकों को दी जाने वाली प्रिवी पर्स (वार्षिक पेंशन) और उनकी शाही मान्यताओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया?

Answer: अनुच्छेद 363क

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