Part XIX - Miscellaneous • अनुच्छेद

अनुच्छेद 361क Simplified: संसद और राज्यों के विधान-मंडलों की कार्यवाहियों के प्रकाशन का संरक्षण

अनुच्छेद 361क समाचार पत्रों और मीडिया को संसद या राज्य विधानसभाओं की कार्यवाहियों की सच्ची और निष्पक्ष रिपोर्ट प्रकाशित करने की कानूनी सुरक्षा देता है। यदि कोई व्यक्ति संसद या विधानसभा की चर्चाओं की सही रिपोर्ट छापता है, तो उस पर मानहानि या कोई अन्य दीवानी या आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, बशर्ते कि रिपोर्ट दुर्भावना (बुरे इरादे) से न छापी गई हो।

Official Text

(1) कोई व्यक्ति संसद के किसी सदन या, यथास्थिति, किसी राज्य की विधानसभा या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन की किन्हीं कार्यवाहियों के सारतः सही विवरण के किसी समाचारपत्र में प्रकाशन के संबंध में किसी न्यायालय में किसी भी प्रकार की सिविल या आपराधिक कार्रवाई का तब तक भागी नहीं होगा जब तक यह साबित नहीं कर दिया जाता है कि प्रकाशन विद्वेषपूर्वक किया गया है : परन्तु इस खंड की कोई बात संसद के किसी सदन या, यथास्थिति, किसी राज्य की विधानसभा या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन की गुप्त बैठक की कार्यवाहियों के विवरण के प्रकाशन को लागू नहीं होगी। (2) खंड (1) किसी प्रसारण केंद्र के माध्यम से उपलब्ध किसी कार्यक्रम या सेवा के भागरूप बेतार तारयांत्रिकी के माध्यम से प्रसारित रिपोर्ट या सामग्री के संबंध में उसी प्रकार लागू होगा जिस प्रकार वह किसी समाचारपत्र में प्रकाशित रिपोर्ट या सामग्री के संबंध में लागू होता है। स्पष्टीकरण–इस अनुच्छेद में, “समाचारपत्र” के अंतर्गत समाचार एजेंसी की ऐसी रिपोर्ट है जिसमें किसी समाचारपत्र में प्रकाशन के लिए सामग्री अंतर्विष्ट है।

Simple Meaning

अनुच्छेद 361क समाचार पत्रों और मीडिया को संसद या राज्य विधानसभाओं की कार्यवाहियों की सच्ची और निष्पक्ष रिपोर्ट प्रकाशित करने की कानूनी सुरक्षा देता है। यदि कोई व्यक्ति संसद या विधानसभा की चर्चाओं की सही रिपोर्ट छापता है, तो उस पर मानहानि या कोई अन्य दीवानी या आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, बशर्ते कि रिपोर्ट दुर्भावना (बुरे इरादे) से न छापी गई हो।

Explain Like Ten

अगर अखबार या टीवी वाले संसद में होने वाली बातचीत की सच्ची रिपोर्ट लोगों को बताते हैं, तो उन पर कोई केस नहीं कर सकता। यह प्रेस (मीडिया) की आज़ादी के लिए बहुत ज़रूरी नियम है।

Student Mode

अनुच्छेद 361क को 44वें संविधान संशोधन अधिनियम (1978) द्वारा जोड़ा गया था। यह संसद के दोनों सदनों या राज्यों की विधानसभा/विधान परिषद की कार्यवाहियों की सारतः सही रिपोर्ट (substantially true report) के प्रकाशन को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। (1) किसी भी व्यक्ति पर ऐसी रिपोर्ट के प्रकाशन के लिए किसी न्यायालय में दीवानी या आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती, बशर्ते प्रकाशन दुर्भावनापूर्ण (with malice) न हो। (2) यह संरक्षण रेडियो/वायरलेस प्रसारण पर भी लागू होता है। (3) यह संरक्षण संसद या विधानमंडल के गुप्त सत्रों (secret sittings) की कार्यवाहियों के प्रकाशन पर लागू नहीं होता है।

Example

यदि कोई समाचार पत्र संसद में किसी सांसद द्वारा दिए गए भाषण को ज्यों का त्यों (सच्ची रिपोर्ट के रूप में) प्रकाशित करता है, तो उस समाचार पत्र के खिलाफ अदालत में मानहानि का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

Key Takeaway

संसद और विधानसभाओं की कार्यवाहियों के निष्पक्ष और सच्चे प्रकाशन को अदालती मुकदमों से सुरक्षा दी गई है ताकि जनता तक सही जानकारी पहुँच सके।

FAQs

क्या संसद के गुप्त सत्र (Secret Sitting) की कार्यवाही छापने पर भी यह संरक्षण मिलता है?

नहीं, यह संरक्षण गुप्त सत्रों की कार्यवाहियों के प्रकाशन पर लागू नहीं होता है।

अनुच्छेद 361क को किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था?

इसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा भारतीय संविधान में जोड़ा गया था।

Quiz

संसद या राज्य विधानमंडलों की कार्यवाहियों के प्रकाशन को संरक्षण देने वाला अनुच्छेद 361क किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?

Answer: 44वां संशोधन

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