Part XVIII - Emergency Provisions • अनुच्छेद
अनुच्छेद 360 Simplified: वित्तीय आपात के बारे में उपबंध
अनुच्छेद 360 देश में 'वित्तीय आपातकाल' (फाइनेंशियल इमरजेंसी) लगाने का प्रावधान करता है। यदि राष्ट्रपति को यह विश्वास हो जाए कि भारत की आर्थिक स्थिरता या साख (क्रेडिट) गंभीर खतरे में है, तो वे इसकी घोषणा कर सकते हैं। इस दौरान केंद्र सरकार सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के जजों के वेतन और भत्तों में कटौती करने का आदेश दे सकती है। भारत में आज तक कभी भी वित्तीय आपातकाल लागू नहीं किया गया है।
Official Text
वििीय आपात के बारे मि उपबंध – (1) यदि राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी िस्थति उत्पन्न हो गई है िजससे भारत या उसके राज्यिेत्र के किसी
Simple Meaning
अनुच्छेद 360 देश में 'वित्तीय आपातकाल' (फाइनेंशियल इमरजेंसी) लगाने का प्रावधान करता है। यदि राष्ट्रपति को यह विश्वास हो जाए कि भारत की आर्थिक स्थिरता या साख (क्रेडिट) गंभीर खतरे में है, तो वे इसकी घोषणा कर सकते हैं। इस दौरान केंद्र सरकार सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के जजों के वेतन और भत्तों में कटौती करने का आदेश दे सकती है। भारत में आज तक कभी भी वित्तीय आपातकाल लागू नहीं किया गया है।
Explain Like Ten
अगर हमारे देश में बहुत बड़ा आर्थिक संकट (पैसों की भारी कमी) आ जाए, तो राष्ट्रपति जी वित्तीय आपातकाल घोषित कर सकते हैं। इस समय देश को बचाने के लिए सरकारी अधिकारियों और यहाँ तक कि जजों की सैलरी भी कम की जा सकती है ताकि देश के पैसे बचाए जा सकें। लेकिन भारत में ऐसा कभी नहीं हुआ है।
Student Mode
अनुच्छेद 360 देश में वित्तीय आपातकाल की घोषणा और उसके प्रभावों को विनियमित करता है। (1) यदि राष्ट्रपति संतुष्ट हैं कि भारत या उसके किसी हिस्से की वित्तीय स्थिरता या साख खतरे में है, तो वे उद्घोषणा जारी कर सकते हैं। (2) इसे संसद द्वारा 2 महीने के भीतर साधारण बहुमत से स्वीकृत किया जाना आवश्यक है। (3) इसके प्रभाव में, संघ की कार्यपालिका किसी भी राज्य को वित्तीय औचित्य के सिद्धांतों (canons of financial propriety) का पालन करने के निर्देश दे सकती है। (4) राष्ट्रपति संघ और राज्यों के अधीन काम करने वाले सभी अधिकारियों, और उच्चतम व उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के वेतन-भत्तों में कमी करने का निर्देश दे सकते हैं।
Example
यदि देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ढह जाती है या खजाना खाली हो जाता है, तो राष्ट्रपति वित्तीय स्थिरता बहाल करने के लिए इस अनुच्छेद का उपयोग कर सकते हैं।
Key Takeaway
वित्तीय आपातकाल देश को गंभीर आर्थिक संकट से बचाने का एक चरम वित्तीय उपाय है, जिसे भारत में कभी भी लागू करने की आवश्यकता नहीं पड़ी है।
FAQs
क्या भारत में कभी वित्तीय आपातकाल लगाया गया है?
नहीं, भारत के इतिहास में आज तक कभी भी वित्तीय आपातकाल (Financial Emergency) नहीं लगाया गया है, यहाँ तक कि 1991 के गंभीर भुगतान संतुलन संकट के समय भी नहीं।
वित्तीय आपातकाल में किसकी सैलरी कम की जा सकती है?
इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और सुप्रीम कोर्ट तथा हाई कोर्ट के न्यायाधीशों (जजों) के वेतन और भत्तों में कटौती की जा सकती है।
Quiz
वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा को संसद द्वारा कितने समय के भीतर अनुमोदित किया जाना चाहिए?
Answer: 2 महीने
भारत में अब तक कितनी बार वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) लगाया गया है?
Answer: कभी नहीं