Part XVIII - Emergency Provisions • अनुच्छेद

अनुच्छेद 358 Simplified: आपात के दौरान अनुच्छेद 19 के उपबंधों का निलंबन

अनुच्छेद 358 यह प्रावधान करता है कि जब देश में युद्ध या विदेशी आक्रमण के कारण 'राष्ट्रीय आपातकाल' लगाया जाता है, तो नागरिकों की स्वतंत्रता से जुड़े 6 मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19, जैसे बोलने, घूमने और संगठन बनाने की आज़ादी) स्वतः (अपने आप) ही निलंबित हो जाते हैं। इसके लिए किसी अलग आदेश की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, सशस्त्र विद्रोह (आंतरिक आपातकाल) के समय यह निलंबन लागू नहीं होता।

Official Text

आपात के दौरान अनु च्छेद 19 के उपबंधि का निलंबन – [(1)] [जब यु द्ध या बाह्य आक्रमण के कारण भारत या उसके राज्यिेत्र के किसी भाग कि सु रिा के संकट मि होने कि घोषणा करने वालि आपात कि उद्घोषणा प्रवतर्न मि है] तब अनु च्छेद कि कोई बात भाग 3 मि यथा परिभाषित राज्य कि कोई ऐसी विधि बनाने कि या कोई ऐसी कार्यपालिका कारर्वाई करने कि शिक्त को, िजसे वह राज्य उस भाग मि अंतविर्ष्ट उपबंधि के अभाव मि बनाने या करने के लिए समि होता, निबिधित नहीं करेगी, किन्तु इस प्रकार बनाई गई कोई विधि उद्घोषणा के प्रवतर्न मि न रहने पर अमिता कि मात्रा तक उन बाति के सिवाय तु रन्त प्रभावहनि हो जाए गी, िजन्हि विधि के इस प्रकार प्रभावहनि होने के पहले किया गया है या करने का लोप किया गया है : [परन्तु [जहां आपात कि ऐसी उद्घोषणा] भारत के राज्यिेत्र के के वल किसी

Simple Meaning

अनुच्छेद 358 यह प्रावधान करता है कि जब देश में युद्ध या विदेशी आक्रमण के कारण 'राष्ट्रीय आपातकाल' लगाया जाता है, तो नागरिकों की स्वतंत्रता से जुड़े 6 मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19, जैसे बोलने, घूमने और संगठन बनाने की आज़ादी) स्वतः (अपने आप) ही निलंबित हो जाते हैं। इसके लिए किसी अलग आदेश की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, सशस्त्र विद्रोह (आंतरिक आपातकाल) के समय यह निलंबन लागू नहीं होता।

Explain Like Ten

जब देश का किसी दूसरे देश के साथ युद्ध चल रहा हो, तो सरकार हमारी कुछ आज़ादियाँ (जैसे कहीं भी घूमने या भाषण देने की आज़ादी) को कुछ समय के लिए रोक सकती है ताकि देश की सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे और कोई गड़बड़ी न हो।

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अनुच्छेद 358 राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त छह मूल स्वतंत्रताओं के निलंबन से संबंधित है। (1) यह निलंबन केवल युद्ध या बाह्य आक्रमण (बाह्य आपातकाल) के आधार पर घोषित आपातकाल में ही स्वतः हो जाता है। (2) 44वें संविधान संशोधन (1978) के बाद इसे सशस्त्र विद्रोह (आंतरिक आपातकाल) के दौरान निलंबित नहीं किया जा सकता। (3) आपातकाल के दौरान राज्य अनुच्छेद 19 को सीमित करने वाले कानून बना सकता है और प्रशासनिक कार्रवाई कर सकता है, लेकिन उन कानूनों में यह उल्लेख होना आवश्यक है कि वे आपातकाल से संबंधित हैं।

Example

यदि भारत का किसी देश से युद्ध छिड़ जाता है, तो सरकार सुरक्षा कारणों से किसी भी स्थान पर लोगों के इकट्ठा होने या भाषण देने पर रोक लगा सकती है, और नागरिक इसे मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताकर अदालत नहीं जा सकते।

Key Takeaway

युद्ध या विदेशी आक्रमण की स्थिति में अभिव्यक्ति और स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 19) देश की सुरक्षा के लिए स्वतः निलंबित हो जाते हैं।

FAQs

क्या देश के भीतर सशस्त्र विद्रोह होने पर भी अनुच्छेद 19 निलंबित हो जाता है?

नहीं, 44वें संशोधन के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि केवल बाहरी युद्ध या आक्रमण के समय ही अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित होगा, आंतरिक विद्रोह के समय नहीं।

आपातकाल समाप्त होने पर क्या अनुच्छेद 19 के अधिकार वापस मिल जाते हैं?

हाँ, जैसे ही आपातकाल की उद्घोषणा समाप्त होती है, अनुच्छेद 19 के सभी अधिकार स्वतः ही पुनर्जीवित हो जाते हैं।

Quiz

युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर आपातकाल घोषित होने पर कौन सा अनुच्छेद स्वतः निलंबित हो जाता है?

Answer: अनुच्छेद 19

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