Part XVIII - Emergency Provisions • अनुच्छेद

अनुच्छेद 356 Simplified: राज्यों में संवैधानिक तंत्र के विफल हो जाने की दशा में उपबंध

अनुच्छेद 356 (जिसे आमतौर पर 'राष्ट्रपति शासन' या 'राज्य आपातकाल' कहा जाता है) केंद्र सरकार को यह शक्ति देता है कि यदि किसी राज्य की सरकार संविधान के अनुसार काम करने में विफल हो जाती है, तो राष्ट्रपति उस राज्य सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं। इसके बाद राज्य का नियंत्रण राज्यपाल (केंद्र के प्रतिनिधि) के पास चला जाता है और वहां कानून बनाने की शक्ति संसद को मिल जाती है।

Official Text

राज्यि मि सांविधानिक तंत्र के विफल हो जाने कि दशा मि उपबंध – (1) यदि राष्ट्रपति का किसी राज्य के राज्यपाल *** से प्रतिवेदन मिलने पर या अन्यथा, यह समाधान हो जाता है कि ऐसी िस्थति उत्पन्न हो गई है िजसमि उस राज्य का शासन इस संविधान के उपबंधि के अनु सार नहीं चलाया जा सकता है तो राष्ट्रपति उद्घोषणा द्वारा – ु सू ची द्वारा (1-11-1956 से) “या राजप्रमु ख” शब्दि का लोप कि या गया । (क) उस राज्य कि सरका र के सभी या कोई कृ त्य और [राज्यपाल] मि या राज्य के विधान-मंडल से भिन्न राज्य के किसी निकाय या प्राधिकारि मि निहित या उसके द्वारा प्रयोक्तव्य सभी या कोई शक्तियाँ अपने हाथ मि ले सकेगा ; (ख) यह घोषणा कर सकेगा कि राज्य के विधान-मंडल कि शक्तियाँ संसद् द्वारा या उसके प्राधिकार के अधीन प्रयोक्तव्य हगिी ; (ग ) राज्य के किसी निकाय या प्राधिकारि से संबंधित इस संविधान के किन्हंि उपबंधि के प्रवतर्न को पू णर्तः या भागतः निलंबित करने के लिए उपबंधि सहित ऐसे आनु षंगिक और पारिणामिक उपबंध कर सकेगा जो उद्घोषणा के उद्दे श्यि को प्रभावी करने के लिए राष्ट्रपति को आवश्यक या वांछनीय प्रतीत हि : परन्तु इस खंड कि कोई बात राष्ट्रपति को उच्च न्यायालय मि निहित या उसके द्वारा प्रयोक्तव्य किसी शिक्त को अपने हाथ मि लेने या उच्च न्यायालयि से संबंधित इस संविधान के किसी उपबंध के प्रवतर्न को पू णर्तः या भागतः निलंबित करने के लिए प्राधिकृ त नहीं करेगी । (2) ऐसी कोई उद्घोषणा किसी पश्चातवति उद्घोषणा द्वारा वापस लि जा सकेगी या उसमि परिवतर्न किया जा सकेगा । (3) इस अनु च्छेद के अधीन कि गई प्रत्येक उद्घोषणा संसद् के प्रत्येक सदन के समि रखी जाएगी और जहां वह पू वर्वति उद्घोषणा को वापस लेने वालि उद्घोषणा नहीं है वहां वह दो मास कि समािप्त पर प्रवतर्न मि नहीं रहेगी यदि उस अवधि कि समािप्त से पहले संसद् के दोनि सदनि के संकल्पि द्वारा उसका अनु मोदन नहीं कर दिया जाता है : परन्तु यदि ऐसी कोई उद्घोषणा (जो पू वर्वति उद्घोषणा को वापस लेने वालि उद्घोषणा नहीं है) उस समय कि जाती है जब लोक सभा का विघटन हो गया है या लोक सभा का विघटन इस खंड मि निदिर्ष्ट दो मास कि अवधि के दौरान हो जाता है और यदि उद्घोषणा का अनु मोदन करने वाला संकल्प राज्य सभा द्वारा पा रित कर दिया गया है, किन्तु ऐसी उद्घोषणा के संबंध मि कोई संकल्प लोक सभा द्वारा उस अवधि कि समािप्त से पहले पारित नहीं किया गया है तो, उद्घोषणा उस तारीख से िजसको लोक सभा अपने पु नगर्ठन के पश्चात ् प्रथम बार बैठती है, तीस दिन कि समािप्त पर, प्रवतर्न मि नहीं रहेगी यदि उक्त तीस दिन कि अवधि कि समािप्त से पहले उद्घोषणा का अनु मोदन करने वाला संकल्प लोक सभा द्वारा भी पारित नहीं कर दिया जाता है । ु सू ची द्वारा (1-11-1956 से) “यथािस्थति, या राजप्रमु ख” शब्दि के स्थान पर प्रतिस्थापित । (4) इस प्रकार अनु मोदित उद्घोषणा, यदि वापस नहीं लि जाती है तो, [ऐसी उद्घोषणा के किए जाने कि तारीख से छह मास] कि अवधि कि समा िप्त पर प्रवतर्न मि नहीं रहेगी : परन्तु यदि औरिजतनी बार ऐसी उद्घोषणा को प्रवृ ि बनाए रखने का अनु मोदन करने वाला संकल्प संसद् के दोनि सदनि द्वारा पारित कर दिया जाता है तो और उतनी बार वह उद्घोषणा, यदि वापस नहीं लि जाती है तो, उस तारीख से िजसको वह इस खंड के अधीन अन्यथा प्रवतर्न मि नहीं रहती, [छह मास] कि अवधि तक प्रव

Simple Meaning

अनुच्छेद 356 (जिसे आमतौर पर 'राष्ट्रपति शासन' या 'राज्य आपातकाल' कहा जाता है) केंद्र सरकार को यह शक्ति देता है कि यदि किसी राज्य की सरकार संविधान के अनुसार काम करने में विफल हो जाती है, तो राष्ट्रपति उस राज्य सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं। इसके बाद राज्य का नियंत्रण राज्यपाल (केंद्र के प्रतिनिधि) के पास चला जाता है और वहां कानून बनाने की शक्ति संसद को मिल जाती है।

Explain Like Ten

अगर किसी राज्य की सरकार ठीक से काम नहीं कर पा रही है या नियमों को तोड़ रही है, तो राष्ट्रपति जी उस सरकार को हटाकर राज्य का शासन सीधे अपने हाथों में ले सकते हैं। इसे 'राष्ट्रपति शासन' कहते हैं।

Student Mode

अनुच्छेद 356 राज्यों में संवैधानिक मशीनरी के विफल होने पर केंद्रीय हस्तक्षेप (राष्ट्रपति शासन) का प्रावधान करता है। (1) यदि राष्ट्रपति को राज्यपाल की रिपोर्ट से या अन्यथा (अनुच्छेद 365 सहित) यह समाधान हो जाता है कि राज्य का शासन संविधान के अनुरूप नहीं चलाया जा सकता, तो वे उद्घोषणा जारी कर सकते हैं। (2) इस उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा 2 महीने के भीतर साधारण बहुमत से अनुमोदित किया जाना चाहिए। (3) यह एक बार में 6 महीने तक लागू रहता है और अधिकतम 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है (1 वर्ष से अधिक बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग का प्रमाण पत्र या राष्ट्रीय आपातकाल सक्रिय होना आवश्यक है)। एस.आर। बोम्मई मामले (1994) में सुप्रीम कोर्ट ने इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए इसे न्यायिक समीक्षा के अधीन घोषित किया।

Example

यदि किसी राज्य में चुनाव के बाद कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में न हो (त्रिशंकु विधानसभा), या राज्य सरकार केंद्र के निर्देशों का पालन न करे, तो वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाता है।

Key Takeaway

अनुच्छेद 356 राज्यों में संवैधानिक व्यवस्था के टूटने पर केंद्र को हस्तक्षेप करने की चरम शक्ति प्रदान करता है, जिसे व्यक्तिगत और राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग से बचाने के लिए सख्त न्यायिक समीक्षा के अधीन रखा गया है।

FAQs

राष्ट्रपति शासन और राष्ट्रीय आपातकाल में क्या अंतर है?

राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) पूरे देश या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा खतरे में होने पर लगता है, जबकि राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) केवल किसी एक राज्य में संवैधानिक व्यवस्था विफल होने पर लगाया जाता है।

एस.आर। बोम्मई मामला (1994) क्यों महत्वपूर्ण है?

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया कि राष्ट्रपति शासन लगाने के निर्णय की अदालत द्वारा जांच (न्यायिक समीक्षा) की जा सकती है, जिससे इसका राजनीतिक दुरुपयोग काफी कम हो गया।

Quiz

राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) को लागू करने के बाद कितने समय के भीतर संसद की मंजूरी मिलना आवश्यक है?

Answer: 2 महीने

किस ऐतिहासिक न्यायिक फैसले ने अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?

Answer: एस.आर। बोम्मई मामला

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