Part XVI - Special Provisions for Certain Classes • अनुच्छेद
अनुच्छेद 338 Simplified: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग
अनुच्छेद 338 भारत में एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयोग - राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) का गठन करता है। इसका मुख्य कार्य अनुसूचित जातियों (SC) के अधिकारों की रक्षा करना, उनके शोषण और भेदभाव के मामलों की जाँच करना और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सरकार को सुझाव देना है। इसके पास सिविल कोर्ट जैसी शक्तियाँ होती हैं।
Official Text
[राष्ट्रयि अनु सू चित जाति आयोग]– [ [(1) अनु सू चित जातियि के लिए एक आयोग होगा जो राष्ट्रयि अनु सू चित जाति आयोग के नाम से िात होगा । ु सू ची द्वारा (1-11- 1956 से) “पहलि अनु सू ची के भाग क या भाग ख मि विनिदिर् ष्ट” शब्दि और अरिि का लोप किया गया । प्रतिस्थापित । ि सठवां संशोधन) अधिनियम, 1990 कि धारा 2 द्वारा (12-3-1992 से) खंड (1) और खंड (2) के स्थान पर प्रतिस्थापित । पर प्रतिस्थापित । ु छ वगि के संबंध मि विशेष उपबंध) (2) संसद् द्वारा इस निमिि बनाई गई किसी विधि के उपबंधि के अधीन रहते हु ए, आयोग एक अध्यि, एक उपाध्यि और तीन अन्य सदस्यि से मिलकर बनेगा और इस प्रकार नियु क्त किए गए अध्यि, उपाध्यि और अन्य सदस्यि कि सेवा कि शति और पदावधि ऐसी हगिी जो राष्ट्रपति, नियम द्वारा, अवधारित करे ।] (3) राष्ट्रपति अपने हस्तारि और मु द्रा सहित अधिपत्र द्वारा आयो ग के अध्यि, उपाध्यि और अन्य सदस्यि को नियु क्त करेगा । (4) आयोग को अपनी प्रक्रिया स्वयं विनियमित करने कि शिक्त होगी । (5) आयोग का यह कतर्व्य होगा कि वह,– (क) अनु सू चित जातियि *** के लिए इस संविधान या तत्समय प्रवृ ि किसी अन्य विधि या सरकार के किसी आदे श के अधीन उपबंधित रिोपायि से संबंधित सभी विषयि का अन्वेषण करे और उन पर निगरानी रखे तथा ऐसे रिोपायि के कायर्करण का मू ल्यांकन करे ; (ख) अनु सू चित जातियि *** को उनके अधिकारि और रिोपायि से वंचित करने कि बाबत विनिदिर्ष्ट शिकायति कि जांच करे ; (ग) अनु सू चित जातियि *** के सामािजक-आथिर्क विकास कि योजना प्रक्रिया मि
Simple Meaning
अनुच्छेद 338 भारत में एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयोग - राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) का गठन करता है। इसका मुख्य कार्य अनुसूचित जातियों (SC) के अधिकारों की रक्षा करना, उनके शोषण और भेदभाव के मामलों की जाँच करना और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सरकार को सुझाव देना है। इसके पास सिविल कोर्ट जैसी शक्तियाँ होती हैं।
Explain Like Ten
यह नियम एक विशेष टीम (आयोग) बनाता है जिसका काम यह देखना है कि अनुसूचित जाति के लोगों के साथ कोई भेदभाव न हो और उन्हें उनके पूरे अधिकार मिलें।
Student Mode
अनुच्छेद 338 राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) की स्थापना, संरचना, शक्तियों और कर्तव्यों को परिभाषित करता है। इसमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन सदस्य होते हैं। आयोग को अनुसूचित जातियों के संरक्षण उपायों की निगरानी करने, विशिष्ट शिकायतों की जाँच करने और राष्ट्रपति को वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अधिकार है। जाँच के दौरान इसे सिविल न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
Example
यदि किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति के साथ नौकरी में भेदभाव होता है या किसी सार्वजनिक स्थान पर प्रवेश से रोका जाता है, तो वह सीधे इस आयोग में शिकायत दर्ज करा सकता है।
Key Takeaway
अनुच्छेद 338 अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र राष्ट्रीय आयोग की स्थापना करता है।
FAQs
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पास शिकायत कैसे की जा सकती?
पीड़ित व्यक्ति या कोई अन्य व्यक्ति आयोग की वेबसाइट पर या सीधे डाक द्वारा लिखित शिकायत दर्ज करा सकता है।
क्या इस आयोग के पास सजा देने का अधिकार है?
नहीं, आयोग दोषी को सीधे सजा नहीं दे सकता, लेकिन यह पुलिस या सरकार को कार्रवाई करने और कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे सकता है।
Quiz
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का गठन किस अनुच्छेद के तहत किया गया है?
Answer: अनुच्छेद 338