Part XVI - Special Provisions for Certain Classes • अनुच्छेद

अनुच्छेद 334 Simplified: स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का एक निश्चित अवधि के बाद समाप्त होना

यह अनुच्छेद तय करता है कि लोकसभा और विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण तथा आंग्ल-भारतीयों के नामांकन की व्यवस्था शुरू में कितने वर्षों के लिए होगी। इसे हर 10 साल में बढ़ाया जाता रहा है। वर्तमान में यह आरक्षण 2030 तक बढ़ा दिया गया है।

Official Text

[स्थानि के आरक्षण और विशे ष प्रतिनिधित्व का कतिपय अवधि] के पश्चात ् न रहना–इस भाग के पू वर्गामी उपबंधि मि किसी बात के होते हु ए भी,– (क) लोक सभा मि और राज्यि कि विधान सभाओं मि अनु सू चित जातियि और अनु सू चित जनजातियि के लिए स्थानि के आरक्षण संबंधी, और (ख) लोक सभा मि और राज्यि कि विधान सभाओं मि नामनिदशिन द्वारा आंग्ल-भारतीय समु दाय के प्रतिनिधित्व संबंधी, इस संविधान के उपबंध इस संविधान के प्रारंभ से [खंड (क) के संबंध मि अस्सी वषर् और खंड (ख) के संबंध मि सरि वषर्] कि अवधि कि समािप्त पर प्रभावी नहीं रहि गे : परन्तु इस अनु च्छेद कि किसी बात से लोक सभा मि या किसी राज्य कि विधान सभा मि किसी प्रतिनिधित्व पर तब तक कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जब तक, यथािस्थति, उस समय विद्यमान लोक सभा या विधान सभा का विघटन नहीं हो जाता है ।

Simple Meaning

यह अनुच्छेद तय करता है कि लोकसभा और विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण तथा आंग्ल-भारतीयों के नामांकन की व्यवस्था शुरू में कितने वर्षों के लिए होगी। इसे हर 10 साल में बढ़ाया जाता रहा है। वर्तमान में यह आरक्षण 2030 तक बढ़ा दिया गया है।

Explain Like Ten

यह नियम तय करता है कि चुनाव में पिछड़ी जातियों के लिए जो सीटें आरक्षित की जाती हैं, वे कितने सालों तक रहेंगी। सरकार इसे हर 10 साल में संसद में चर्चा करके आगे बढ़ा देती है।

Student Mode

अनुच्छेद 334 के तहत, मूल संविधान में आरक्षण 10 वर्षों के लिए था। इसे संशोधनों (हाल ही में 104वें संशोधन द्वारा 2019 में) के माध्यम से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण को बढ़ाकर 80 वर्ष (यानी 2030 तक) कर दिया गया, जबकि आंग्ल-भारतीयों के नामांकन (70 वर्ष यानी 2020 तक) को आगे नहीं बढ़ाया गया, जिससे वह स्वतः समाप्त हो गया।

Example

संविधान निर्माताओं ने आरक्षण को 10 वर्ष के लिए रखा था, लेकिन अनुसूचित जातियों और जनजातियों की सामाजिक-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए संसद ने इसे बार-बार आगे बढ़ाया है।

Key Takeaway

राजनीतिक आरक्षण की समय-सीमा का निर्धारण, जिसे वर्तमान में 80 वर्षों (2030) तक बढ़ाया गया है।

FAQs

मूल संविधान में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए राजनीतिक आरक्षण की अवधि कितनी तय की गई थी?

मूल रूप से इसे केवल 10 वर्षों (1960 तक) के लिए लागू किया गया था।

वर्तमान में लोकसभा और विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण किस वर्ष तक बढ़ा दिया गया है?

104वें संविधान संशोधन के द्वारा इसे 25 जनवरी 2030 तक (संविधान के प्रारंभ से 80 वर्ष) बढ़ा दिया गया है।

Quiz

लोकसभा और विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण की अवधि को नियंत्रित करने वाला अनुच्छेद कौन सा है?

Answer: अनुच्छेद 334

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