Part XIV & XIVA - Services and Tribunals • अनुच्छेद
अनुच्छेद 319 Simplified: आयोग के सदस्यों द्वारा ऐसे सदस्य न रहने पर पद धारण करने का प्रतिषेध
अनुच्छेद 319 लोक सेवा आयोग के सदस्यों पर सेवानिवृत्ति के बाद सरकार के अधीन अन्य नौकरियां लेने पर सख्त पाबंदी लगाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सदस्य अपने कार्यकाल के दौरान निष्पक्ष रहें और भविष्य में किसी सरकारी नौकरी के लालच में सरकार का पक्ष न लें। UPSC का अध्यक्ष भारत या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नौकरी के लिए पूरी तरह अपात्र हो जाता है। अन्य सदस्य केवल उच्च आयोगों के अध्यक्ष बन सकते हैं।
Official Text
आयोग के सदस्यि द्वारा ऐसे सदस्य न रहने पर पद धारण करने के संबंध मि प्रतिषेध – पद पर न रह जाने पर – (क) संघ लोक सेवा आयोग का अध्यि भारत सरकार या किसी राज्य कि सरकार के अधीन किसी भी और नियोजन का पात्र नहीं होगा ; (ख) किसी राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यि संघ लोक सेवा आयोग के अध्यि या अन्य सदस्य के रूप मि अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यि के रूप मि नियु क्त होने का पात्र होगा, किन्तु भारत सरकार या किसी राज्य कि सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन का पात्र नहीं होगा ; (ग) संघ लोक सेवा आयोग के अध्यि से भिन्न कोई अन्य सदस्य संघ लोक सेवा आयोग के अध्यि के रूप मि या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यि के रूप मि नियु क्त होने का पात्र होगा, किन्तु भारत सरकार या किसी राज्य कि सरकार के अधीन कि सी अन्य नियोजन का पात्र नहीं होगा ; (घ) किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यि से भिन्न कोई अन्य सदस्य संघ लोक सेवा आयोग के अध्यि या किसी अन्य सदस्य के रूप मि अथवा उसी या किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यि के रूप मि नियु क्त होने का पात्र होगा, किन्तु भारत सरकार या किसी राज्य कि सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन का पात्र नहीं होगा ।
Simple Meaning
अनुच्छेद 319 लोक सेवा आयोग के सदस्यों पर सेवानिवृत्ति के बाद सरकार के अधीन अन्य नौकरियां लेने पर सख्त पाबंदी लगाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सदस्य अपने कार्यकाल के दौरान निष्पक्ष रहें और भविष्य में किसी सरकारी नौकरी के लालच में सरकार का पक्ष न लें। UPSC का अध्यक्ष भारत या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नौकरी के लिए पूरी तरह अपात्र हो जाता है। अन्य सदस्य केवल उच्च आयोगों के अध्यक्ष बन सकते हैं।
Explain Like Ten
यह नियम कहता है कि जो लोग भर्ती करने वाली टीम के सदस्य थे, वे रिटायर होने के बाद सरकार में कोई और नौकरी नहीं पा सकते। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि वे काम करते समय सरकार को खुश करने की कोशिश न करें।
Student Mode
यह अनुच्छेद लोक सेवा आयोगों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) को रोकने का प्रयास करता है। सेवानिवृत्त होने पर: (क) UPSC का अध्यक्ष किसी सरकारी नियोजन के योग्य नहीं रहता, (ख) SPSC का अध्यक्ष केवल UPSC के सदस्य/अध्यक्ष या किसी अन्य SPSC के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त हो सकता है, (ग) अन्य सदस्य केवल आयोगों के अध्यक्ष या सदस्य बन सकते हैं, किसी अन्य सरकारी नौकरी में नहीं जा सकते।
Example
UPSC के सेवानिवृत्त अध्यक्ष को केंद्र या राज्य सरकार का सलाहकार या किसी सार्वजनिक उपक्रम का प्रमुख नहीं बनाया जा सकता। वे सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी अन्य सरकारी पद को ग्रहण करने के लिए संवैधानिक रूप से अपात्र हैं।
Key Takeaway
अनुच्छेद 319 सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी रोजगार पर प्रतिबंध लगाकर लोक सेवा आयोगों की निष्पक्षता और अखंडता की रक्षा करता है।
FAQs
क्या UPSC का सेवानिवृत्त अध्यक्ष किसी राज्य सरकार के अधीन नौकरी कर सकता है?
नहीं, अनुच्छेद 319(क) के अनुसार, वे भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य नियोजन (नौकरी) के लिए पूर्णतः अपात्र होते हैं।
क्या राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) का अध्यक्ष सेवानिवृत्ति के बाद UPSC का सदस्य बन सकता है?
हाँ, SPSC का अध्यक्ष सेवानिवृत्ति के बाद UPSC के सदस्य या अध्यक्ष के रूप में या किसी अन्य SPSC के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने का पात्र होता है।
Quiz
UPSC का अध्यक्ष सेवानिवृत्ति के बाद किस सरकारी पद के लिए पात्र होता है?
Answer: भारत या राज्य सरकार के अधीन किसी भी नियोजन के लिए अपात्र
अनुच्छेद 319 का मुख्य उद्देश्य क्या सुनिश्चित करना है?
Answer: हितों के टकराव को रोकना और निष्पक्षता बनाए रखना