Part XIV & XIVA - Services and Tribunals • अनुच्छेद
अनुच्छेद 318 Simplified: आयोग के सदस्यों और कर्मचारिवृंद की सेवा की शर्तों के बारे में विनियम बनाने की शक्ति
अनुच्छेद 318 राष्ट्रपति (संघ आयोग के लिए) और राज्यपाल (राज्य आयोग के लिए) को यह शक्ति देता है कि वे आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों की संख्या और उनकी सेवा-शर्तें (जैसे वेतन, भत्ते, अवकाश) तय करने के लिए नियम बनाएं। एक बार सदस्य की नियुक्ति हो जाने के बाद, उसके वेतन और भत्तों में कोई भी कटौती (अलाभकारी परिवर्तन) नहीं की जा सकती।
Official Text
आयोग के सदस्यि और कमर्चारिवृ ंद कि सेवा कि शति के बारे मि विनियम बनाने कि शिक्त – संघ आयोग या संयु क्त आयोग कि दशा मि राष्ट्रपति और राज्य आयोग कि दशा मि उस राज्य का राज्यपाल *** विनियमि द्वारा – ु सू ची द्वारा (1-11- 1956 से) “या राजप्रमु ख” शब्दि का लोप किया गया । (क) आयोग के सदस्यि कि संख्या और उनकि सेवा कि शति का अवधारण कर सकेगा ; और (ख) आयोग के कमर्चारिवृ ंद के सदस्यि कि संख्या और उनकि सेवा कि शति के संबंध मि उपबंध कर सकेगा : परंतु लोक सेवा आयोग के सदस्य कि सेवा कि शति मि उसकि नियु िक्त के पश्चात ् उसके लिए अलाभकारि परिवतर्न नहीं किया जाएगा ।
Simple Meaning
अनुच्छेद 318 राष्ट्रपति (संघ आयोग के लिए) और राज्यपाल (राज्य आयोग के लिए) को यह शक्ति देता है कि वे आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों की संख्या और उनकी सेवा-शर्तें (जैसे वेतन, भत्ते, अवकाश) तय करने के लिए नियम बनाएं। एक बार सदस्य की नियुक्ति हो जाने के बाद, उसके वेतन और भत्तों में कोई भी कटौती (अलाभकारी परिवर्तन) नहीं की जा सकती।
Explain Like Ten
यह नियम देश के राष्ट्रपति और राज्यों के राज्यपालों को यह तय करने की शक्ति देता है कि भर्ती करने वाली टीम में कितने लोग होंगे और उनका वेतन कितना होगा। एक बार नौकरी मिलने के बाद उनका वेतन कम नहीं किया जा सकता।
Student Mode
यह अनुच्छेद लोक सेवा आयोगों के संगठनात्मक ढांचे का आधार है। यह राष्ट्रपति या राज्यपाल को सदस्यों और कर्मचारियों की संख्या तथा उनकी सेवा शर्तों को विनियमित करने का अधिकार देता है। परंतुक (Proviso) यह सुनिश्चित करता है कि सदस्यों की नियुक्ति के पश्चात उनकी सेवा शर्तों में कोई भी अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा, जो न्यायिक स्वतंत्रता की तरह प्रशासनिक स्वायत्तता की गारंटी है।
Example
यदि किसी राज्य आयोग में सदस्यों की संख्या 5 से बढ़ाकर 7 करनी है, तो इसका फैसला राज्य के राज्यपाल विनियम बनाकर करेंगे। साथ ही, नियुक्त सदस्यों का वेतन सरकार कम नहीं कर सकती ताकि वे निष्पक्ष रहें।
Key Takeaway
अनुच्छेद 318 नियुक्त सदस्यों की सेवा शर्तों की रक्षा करके वित्तीय स्वायत्तता और स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।
FAQs
क्या सरकार नियुक्ति के बाद लोक सेवा आयोग के सदस्य के वेतन में कटौती कर सकती है?
नहीं, अनुच्छेद 318 का परंतुक स्पष्ट करता है कि सदस्य की नियुक्ति के बाद उसकी सेवा शर्तों में कोई भी अलाभकारी परिवर्तन (वेतन या भत्ते में कटौती) नहीं किया जा सकता।
UPSC के कर्मचारियों की संख्या कौन निर्धारित करता है?
UPSC के सदस्यों और कर्मचारियों की संख्या और उनकी सेवा शर्तें निर्धारित करने का अधिकार भारत के राष्ट्रपति को है।
Quiz
अनुच्छेद 318 के तहत, किसी सदस्य की नियुक्ति के बाद उसकी सेवा शर्तों में:
Answer: केवल अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता
राज्य लोक सेवा आयोग के कर्मचारियों की संख्या और उनकी सेवा शर्तें तय करने के नियम बनाने की शक्ति किसे प्राप्त है?
Answer: राज्य के राज्यपाल को