Part XIV & XIVA - Services and Tribunals • अनुच्छेद
अनुच्छेद 317 Simplified: लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को हटाया जाना या निलंबित किया जाना
अनुच्छेद 317 आयोग के सदस्यों को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया को बेहद सुरक्षित बनाता है ताकि उन्हें राजनीतिक द्वेष के कारण न हटाया जा सके। उन्हें केवल कदाचार (Misbehaviour) के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है, वह भी तब जब सुप्रीम कोर्ट जांच में उन्हें दोषी पाए। दिवालिया होने, अन्य सवैतनिक नौकरी करने या मानसिक/शारीरिक अक्षमता के आधार पर राष्ट्रपति सीधे हटा सकते हैं।
Official Text
लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य का हटाया जाना और निलंबित किया जाना – (1) खंड (3) के उपबंधि के अधीन रहते हु ए, लोक सेवा आयोग के अध्यि या किसी अन्य सदस्य को के वल कदाचार के आधार पर किए गए राष्ट्रपति के ऐसे आदेश से उसके पद से हटाया जाएगा जो उच्चतम न्यायालय को राष्ट्रपति द्वारा निदशि किए जाने पर उस न्यायालय द्वारा अनु च्छेद 145 के अधीन इस निमिि विहित प्रक्रिया के अनु सार कि गई जांच पर, यह प्रतिवेदन किए जाने के पश्चात ् किया गया है कि, यथािस्थति, अध्यि या ऐसे किसी सदस्य को ऐसे किसी आधार पर हटा दिया जाए । (2) आयोग के अध्यि या किसी अन्य सदस्य को, िजसके संबंध मि खंड (1) के अधीन उच्चतम न्यायालय को निदशि किया गया है, *** संघ आयोग या संयु क्त आयोग कि दशा मि राष्ट्रपति और राज्य आयोग कि दशा मि राज्यपाल उसके पद से तब तक के लिए निलंबित कर सकेगा जब तक राष्ट्रपति ऐसे निदशि पर उच्चतम न्यायालय का प्रतिवेदन मिलने पर अपना आदेश पारित नहीं कर देता है । (3) खंड (1) मि किसी बात के होते हु ए भी, यदि लोक सेवा आयोग का, यथािस्थति, अध्यि या कोई अन्य सदस्य – (क) दिवालिया न्यायनिणति किया जाता है, या (ख) अपनी पदावधि मि अपने पद के कतर्व्यि के बाहर किसी सवेतन नियोजन मि लगता है, या (ग) राष्ट्रपति कि राय मि मानसिक या शारिरिक शैथिल्य के कारण अपने पद पर बने रहने के लिए अयोग्य है, तो राष्ट्रपति, अध्यि या ऐसे अन्य सदस्य को आदेश द्वारा पद से हटा सकेगा । (4) यदि लोक सेवा आयोग का अध्यि या कोई अन्य सदस्य, निगमित कं पनी के सदस्य के रूप मि और कं पनी के अन्य सदस्यि के साथ सिम्मलित रूप से अन्यथा, उस संविदा या करार से, जो भारत सरकार या राज्य सरकार के द्वारा या निमिि कि गई या किया गया है, किसी प्रकार से संपृ क्त या हितबद्ध है या हो जाता है या उसके लाभ या उससे उद्भू त किसी फायदे या उपलिब्ध मि
Simple Meaning
अनुच्छेद 317 आयोग के सदस्यों को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया को बेहद सुरक्षित बनाता है ताकि उन्हें राजनीतिक द्वेष के कारण न हटाया जा सके। उन्हें केवल कदाचार (Misbehaviour) के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है, वह भी तब जब सुप्रीम कोर्ट जांच में उन्हें दोषी पाए। दिवालिया होने, अन्य सवैतनिक नौकरी करने या मानसिक/शारीरिक अक्षमता के आधार पर राष्ट्रपति सीधे हटा सकते हैं।
Explain Like Ten
अगर भर्ती करने वाली टीम का कोई सदस्य गलत काम (जैसे रिश्वत लेना या बेईमानी) करता है, तो उसे आसानी से नहीं हटाया जा सकता। केवल देश के राष्ट्रपति ही सुप्रीम कोर्ट की जांच के बाद उसे नौकरी से निकाल सकते हैं।
Student Mode
यह अनुच्छेद लोक सेवा आयोगों की स्वायत्तता का सुरक्षा कवच है। इसके तहत कदाचार के मामले में राष्ट्रपति द्वारा संदर्भ (Reference) मिलने पर सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 145 के तहत जांच करता है। जांच की रिपोर्ट राष्ट्रपति पर बाध्यकारी होती है। जांच लंबित रहने के दौरान राष्ट्रपति (UPSC/संयुक्त के लिए) या राज्यपाल (SPSC के लिए) सदस्य को निलंबित कर सकते हैं।
Example
यदि किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पर भ्रष्टाचार (कदाचार) का आरोप लगता है, तो राज्यपाल उन्हें निलंबित तो कर सकते हैं, लेकिन हटाने का अंतिम अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास है। राष्ट्रपति भी तब तक नहीं हटा सकते जब तक सुप्रीम कोर्ट जांच कर पुष्टि न कर दे।
Key Takeaway
अनुच्छेद 317 आयोग की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने के लिए सदस्यों को पद से हटाने की एक अत्यंत निष्पक्ष और न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करता है।
FAQs
कदाचार के मामले में लोक सेवा आयोग के सदस्य को हटाने के लिए जांच कौन करता है?
राष्ट्रपति के निर्देश पर भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) कदाचार के आरोपों की विस्तृत जांच करता है।
क्या राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य को उस राज्य के राज्यपाल द्वारा हटाया जा सकता है?
नहीं, राज्यपाल केवल निलंबित कर सकते हैं। हटाने की अंतिम शक्ति केवल भारत के राष्ट्रपति के पास है।
Quiz
लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को कदाचार के आधार पर हटाने से पहले किस न्यायालय की जांच आवश्यक है?
Answer: भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court)
जांच लंबित रहने के दौरान राज्य लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को निलंबित करने का अधिकार किसे है?
Answer: संबंधित राज्य के राज्यपाल को