Part XIV & XIVA - Services and Tribunals • अनुच्छेद
अनुच्छेद 310 Simplified: संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की पदावधि
अनुच्छेद 310 'प्रसाद के सिद्धांत' (Doctrine of Pleasure) को लागू करता है। इसके अनुसार, केंद्र सरकार के सभी अधिकारी (जैसे आईएएस, आईपीएस और रक्षा सेवाओं के लोग) राष्ट्रपति की इच्छा (प्रसादपर्यन्त) तक अपने पद पर बने रहते हैं, और राज्य के सरकारी अधिकारी राज्यपाल की इच्छा तक। हालांकि, वे मनमाने ढंग से नहीं हटाए जा सकते क्योंकि उन्हें अनुच्छेद 311 के तहत सुरक्षा भी मिली हुई है।
Official Text
संघ या राज्य कि सेवा करने वाले व्यिक्तयि कि पदावधि – (1) इस संविधान द्वारा अभिव्यक्त रूप से यथा उपबंधित के सिवाय, प्रत्येक व्यिक्त जो रिा सेवा का या संघ कि सिविल सेवा का या अखिल भारतीय सेवा का सदस्य है अथवा रिा से संबंधित कोई पद या संघ के अधीन कोई सिविल पद धारण करता है, राष्ट्रपति के प्रसादपयति पद धारण करता है और प्रत्येक व्यिक्त जो किसी राज्य कि सिविल सेवा का सदस्य है या राज्य के अधीन कोई सिविल पद धारण करता है, उस राज्य के राज्यपाल के प्रसादपयति पद धारण करता है । (2) इस बात के होते हु ए भी कि संघ या किसी राज्य के अधीन सिविल पद धारण करने वाला व्यिक्त, यथािस्थति, राष्ट्रपति या राज्य के राज्यपाल *** के प्रसादपयति पद धारण करता है, कोई संविदा िजसके अधीन कोई व्यिक्त जो रिा सेवा का या अखिल भारतीय सेवा का या संघ या राज्य कि सिविल सेवा का सदस्य नहीं है, ऐसे किसी पद को धारण करने के लिए इस संविधान के अधीन नियु क्त किया जाता है, उस दशा मि , िजसमि , यथािस्थति, राष्ट्रपति या राज्यपाल *** विशेष अहर्ताओं वाले किसी व्यिक्त कि सेवाएंु सू ची द्वारा (1-11-1956 से) “प्रथम अनु सू ची के भाग क या भाग ख मि विनिदिर्ष्ट राज्य अभिप्रेत है” के स्थान पर प्रतिस्थापित । ु सू ची द्वारा (1-11-1956 से) “या राजप्रमु ख” शब्दि का लोप किया गया । ु सू ची द्वारा (1-11-1956 से) “यथािस्थति, उस राज्य के राज्यपाल या राजप्रमु ख” के स्थान पर उपरोक्त रूप मि रखा गया । ु सू ची द्वारा (1-11-1956 से) “या राजप्रमु ख” शब्दि का लोप किया गया । प्राप्त करने के लिए आवश्यक समझता है, यह उपबंध कर सकेगी कि यदि करार कि गई अवधि कि समािप्त से पहले वह पद समाप्त कर दिया जाता है या ऐसे कारणि से, जो उसके किसी अवचार से संबंधित नहीं है, उससे वह पद रिक्त करने कि अपेिा कि जाती है तो, उसे प्रतिकर दिया जाएगा ।
Simple Meaning
अनुच्छेद 310 'प्रसाद के सिद्धांत' (Doctrine of Pleasure) को लागू करता है। इसके अनुसार, केंद्र सरकार के सभी अधिकारी (जैसे आईएएस, आईपीएस और रक्षा सेवाओं के लोग) राष्ट्रपति की इच्छा (प्रसादपर्यन्त) तक अपने पद पर बने रहते हैं, और राज्य के सरकारी अधिकारी राज्यपाल की इच्छा तक। हालांकि, वे मनमाने ढंग से नहीं हटाए जा सकते क्योंकि उन्हें अनुच्छेद 311 के तहत सुरक्षा भी मिली हुई है।
Explain Like Ten
यह नियम कहता है कि सरकारी कर्मचारी राष्ट्रपति (देश के लिए) या राज्यपाल (राज्य के लिए) की इच्छा तक काम कर सकते हैं। इसका मतलब है कि वे जब चाहें इन्हें हटा सकते हैं, लेकिन असल में ऐसा नहीं होता क्योंकि कर्मचारियों को बचाने के लिए दूसरे नियम भी बनाए गए हैं ताकि किसी को बिना वजह नौकरी से न निकाला जाए।
Student Mode
अनुच्छेद 310 अंग्रेजी साझा कानून (English Common Law) के क्राउन के प्रसाद के सिद्धांत (Doctrine of Pleasure) को कुछ संशोधनों के साथ अपनाता है। इसके तहत संघ के सिविल व रक्षा पद राष्ट्रपति के और राज्य के सिविल पद राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त बने रहते हैं। इस शक्ति पर संविधान में सीमाएं लगाई गई हैं, जैसे अनुच्छेद 311 के तहत विभागीय जांच का अधिकार और न्यायाधीशों, सीएजी (CAG) तथा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) जैसे पदों का अपवाद होना। खंड (2) के तहत विशेष संविदात्मक पदों के लिए समय से पहले पद समाप्ति पर मुआवजे का प्रावधान है।
Example
यदि किसी विशेष विशेषज्ञ को सरकार में संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर किसी पद पर रखा जाता है और वह पद बिना किसी गलती के समय से पहले समाप्त कर दिया जाता है, तो अनुच्छेद 310(2) के तहत उसे आर्थिक मुआवजा (प्रतिकर) दिया जा सकता है।
Key Takeaway
सरकारी अधिकारी राष्ट्रपति या राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त पद धारण करते हैं, लेकिन यह शक्ति संविधान में दिए गए सुरक्षा नियमों (जैसे अनुच्छेद 311) के अधीन है।
FAQs
भारतीय संविधान में 'प्रसादपर्यन्त का सिद्धांत' (Doctrine of Pleasure) क्या है?
अनुच्छेद 310 के तहत सरकारी सेवक राष्ट्रपति या राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त काम करते हैं। इसका उद्देश्य सिविल सेवाओं पर राजनीतिक नियंत्रण रखना है, लेकिन भारत में यह सिद्धांत अनुच्छेद 311 की संवैधानिक सीमाओं से बंधा हुआ है।
क्या प्रसादपर्यन्त के सिद्धांत के कोई अपवाद हैं?
हाँ, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG), तथा मुख्य चुनाव आयुक्त इसके अपवाद हैं; इन्हें राष्ट्रपति अपनी मर्जी से नहीं हटा सकते, केवल महाभियोग जैसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है।
Quiz
अनुच्छेद 310 के अनुसार, संघ के अधीन काम करने वाले सिविल सेवक किसके प्रसादपर्यन्त पद धारण करते हैं?
Answer: राष्ट्रपति के
अनुच्छेद 310(2) के तहत, किसी विशेष योग्यता वाले संविदा कर्मचारी को मुआवजा दिया जा सकता है यदि:
Answer: उनका पद अनुबंध समाप्त होने से पहले खत्म कर दिया जाए (बिना किसी कदाचार के)