Part XIV & XIVA - Services and Tribunals • अनुच्छेद

अनुच्छेद 309 Simplified: संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तें

अनुच्छेद 309 सरकार को सिविल सेवकों (जैसे आईएएस, आईपीएस, क्लर्क आदि) की भर्ती करने और उनकी नौकरी की शर्तों (जैसे वेतन, प्रमोशन, छुट्टियां, रिटायरमेंट) को तय करने के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है। जब तक संसद या राज्य विधानसभा ऐसा कानून नहीं बनाती, तब तक राष्ट्रपति (केंद्र के लिए) और राज्यपाल (राज्य के लिए) नियम बना सकते हैं।

Official Text

संघ या राज्य कि सेवा करने वाले व्यिक्तयि कि भति और सेवा कि शति – इस संविधान के उपबंधि के अधीन रहते हु ए, समु चित विधान-मंडल के अधिनियम संघ या किसी राज्य के कायर्कलाप से संबंधित लोक सेवाओं और पदि के लिए भति का और नियु क्त व्यिक्तयि कि सेवा कि शति का विनियमन कर सकि गे : परंतु जब तक इस अनु च्छेद के अधीन समु चित विधान-मंडल के अधिनियम द्वारा या उसके अधीन इस निमिि उपबंध नहीं किया जाता है तब तक, यथािस्थति, संघ के कायर्कलाप से संबंधित सेवाओं और पदि कि दशा मि राष्ट्रपति या ऐसा व्यिक्तिजसे वह निदिष्ट करे और राज्य के कायर्कलाप से संबंधित सेवाओं और पदि कि दशा मि राज्य का राज्य पाल *** या ऐसा व्यिक्तिजसे वह निदिष्ट करे, ऐसी सेवाओं और पदि के लिए भति का और नियु क्त व्यिक्तयि कि सेवा कि शति का विनियमन करने वाले नियम बनाने के लिए समि होगा और इस प्रकार बनाए गए नियम किसी ऐसे अधिनियम के उपबंधि के अधीन रहते हु ए प्रभावी हगिे ।

Simple Meaning

अनुच्छेद 309 सरकार को सिविल सेवकों (जैसे आईएएस, आईपीएस, क्लर्क आदि) की भर्ती करने और उनकी नौकरी की शर्तों (जैसे वेतन, प्रमोशन, छुट्टियां, रिटायरमेंट) को तय करने के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है। जब तक संसद या राज्य विधानसभा ऐसा कानून नहीं बनाती, तब तक राष्ट्रपति (केंद्र के लिए) और राज्यपाल (राज्य के लिए) नियम बना सकते हैं।

Explain Like Ten

यह नियम बताता है कि सरकार में नौकरी पाने वाले लोगों (जैसे पुलिस, डॉक्टर या क्लर्क) को कैसे चुना जाएगा और उन्हें कितनी सैलरी या छुट्टी मिलेगी। संसद या राज्य के नेता इस पर कानून बना सकते हैं। जब तक वे कानून नहीं बनाते, तब तक देश के राष्ट्रपति या राज्यों के राज्यपाल नौकरी के अस्थायी नियम बना सकते हैं।

Student Mode

अनुच्छेद 309 भारत में लोक सेवाओं (Civil Services) के विनियमन का संवैधानिक आधार प्रदान करता है। इसके तहत भर्ती और सेवा शर्तें दो माध्यमों से तय होती हैं: विधायिका के अधिनियमों द्वारा और राष्ट्रपति/राज्यपाल द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा (परंतुक के तहत)। राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा बनाए गए नियम तब तक प्रभावी रहते हैं जब तक कि संबंधित विधायिका इस विषय पर कोई कानून पारित नहीं कर देती।

Example

उदाहरण के लिए, जब संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है, तो भर्ती की प्रक्रिया और नियम अनुच्छेद 309 के तहत राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियमों के आधार पर तय होते हैं, जब तक कि संसद इस पर कोई कानून नहीं बना देती।

Key Takeaway

सरकार को सिविल सेवकों की भर्ती और सेवा शर्तों को विनियमित करने के लिए कानून बनाने का अधिकार है, और कानून न होने की स्थिति में राष्ट्रपति या राज्यपाल नियम बना सकते हैं।

FAQs

यदि संसद का कोई कानून न हो, तो केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए नियम कौन बनाता है?

अनुच्छेद 309 के परंतुक (proviso) के तहत, संसद का कानून न होने तक भारत के राष्ट्रपति या उनके द्वारा निर्देशित व्यक्ति को भर्ती और सेवा शर्तों के नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है।

क्या अनुच्छेद 309 के तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा बनाए गए नियमों का बल किसी विधायी अधिनियम के समान होता है?

यह नियम संबंधित विधानमंडल द्वारा पारित कानून के अधीन होते हैं। यदि विधायिका कानून बना देती है, तो वह कानून राष्ट्रपति या राज्यपाल के नियमों के ऊपर लागू होता है।

Quiz

संसद का अधिनियम न होने पर, संघ के अधीन सेवाओं के लिए नियम बनाने का अधिकार किसे प्राप्त है?

Answer: राष्ट्रपति को

अनुच्छेद 309 के परंतुक के अधीन बनाए गए नियम किसके अधीन होते हैं?

Answer: समुचित विधान-मंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम के

Related Topics