Part XIII - Trade & Commerce • अनुच्छेद
अनुच्छेद 304 Simplified: राज्यों के बीच व्यापार, वाणिज्य और समागम पर निर्बन्धन
अनुच्छेद 304 राज्यों के बीच होने वाले व्यापार, वाणिज्य और आपसी व्यवहार पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को नियंत्रित करता है। यह राज्य सरकारों को यह अधिकार देता है कि वे अन्य राज्यों से आने वाले माल पर कर लगा सकें (बशर्ते वह कर स्थानीय माल के समान हो और भेदभाव न करता हो) तथा जनहित में व्यापार पर उचित प्रतिबंध लगा सकें।
Official Text
राज्यि के बीच व्यापार, वाणिज्य और समागम पर निबधिन – अनु च्छेद 301 या अनु च्छेद 303 मि किसी बात के होते हु ए भी, किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा,– (क) अन्य राज्यि [या संघ राज्यिेत्रि] से आयात किए गए माल पर कोई ऐसा कर अधिरोपित कर सकेगा जो उस राज्य मि विनिमिर्त या उत्पादित वैसे हि माल पर लगता है, किन्तु इस प्रकार कि उससे इस तरह आयात किए गए माल और ऐसे विनिमिर्त या उत्पादित माल के बीच कोई विभेद न हो ; या (ख) उस राज्य के साथ या उसके भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम कि स्वतंत्रता पर ऐसे यु िक्तयु क्त निबधिन अधिरोपित कर सकेगा जो लोक हित मि अपेिति हि : ु सू ची द्वारा ( 1-11- 1956 से) अंतःस्थापित । परंतु खंड (ख) के प्रयोजनि के लिए कोई विधेयक या संशोधन राष्ट्रपति कि पू वर् मंजू रि के बिना किसी राज्य के विधान-मंडल मि पु रःस्थापित या प्रस्तावित नहीं किया जाएगा ।
Simple Meaning
अनुच्छेद 304 राज्यों के बीच होने वाले व्यापार, वाणिज्य और आपसी व्यवहार पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को नियंत्रित करता है। यह राज्य सरकारों को यह अधिकार देता है कि वे अन्य राज्यों से आने वाले माल पर कर लगा सकें (बशर्ते वह कर स्थानीय माल के समान हो और भेदभाव न करता हो) तथा जनहित में व्यापार पर उचित प्रतिबंध लगा सकें।
Explain Like Ten
राज्य सरकारें दूसरे राज्यों से आने वाली चीजों पर टैक्स लगा सकती हैं, लेकिन वे अपने राज्य में बनी चीजों से ज्यादा टैक्स नहीं ले सकतीं। वे जनता की भलाई के लिए व्यापार पर रोक भी लगा सकती हैं, लेकिन ऐसा करने से पहले उन्हें देश के राष्ट्रपति से मंजूरी लेनी होगी।
Student Mode
अनुच्छेद 304 भाग XIII के तहत राज्य विधानमंडलों की नियामक और कराधान शक्तियों को परिभाषित करता है। खंड (क) के तहत, राज्य अन्य राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों से आयातित वस्तुओं पर गैर-भेदभावपूर्ण कर लगा सकते हैं, बशर्ते वे स्थानीय वस्तुओं के समान हों। खंड (ख) राज्यों को जनहित में व्यापार पर युक्तियुक्त निर्बन्धन लगाने की अनुमति देता है, जिसके लिए राज्य विधानसभा में विधेयक पेश करने से पहले राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी आवश्यक है।
Example
उदाहरण के लिए, यदि कोई राज्य बाहर से आने वाले सेब पर टैक्स लगाता है, तो वह टैक्स राज्य के भीतर उत्पादित सेब के टैक्स से अधिक नहीं होना चाहिए। साथ ही, यदि वह सुरक्षा कारणों से व्यापार पर कोई नया प्रतिबंध लगाना चाहता है, तो उसे पहले राष्ट्रपति की अनुमति लेनी होगी।
Key Takeaway
राज्य जनहित में अंतर्राज्यीय व्यापार पर कर या उचित प्रतिबंध लगा सकते हैं, बशर्ते वे गैर-भेदभावपूर्ण हों और राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति ली गई हो।
FAQs
क्या कोई राज्य स्थानीय उद्योगों को बचाने के लिए दूसरे राज्यों के माल पर अधिक टैक्स लगा सकता है?
नहीं। अनुच्छेद 304(क) भेदभावपूर्ण कराधान पर रोक लगाता है; आयातित माल पर टैक्स स्थानीय माल के बराबर ही होना चाहिए।
अनुच्छेद 304(ख) के तहत व्यापार पर प्रतिबंध लगाने के लिए राज्य के लिए क्या आवश्यकता है?
जनहित में व्यापार प्रतिबंध लगाने वाले किसी भी विधेयक या संशोधन को राज्य विधानमंडल में पेश करने से पहले भारत के राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी आवश्यक है।
Quiz
अनुच्छेद 304(क) के तहत, कोई राज्य दूसरे राज्यों से आयातित माल पर कर लगा सकता है यदि:
Answer: कर स्थानीय रूप से उत्पादित माल के समान हो (गैर-भेदभावपूर्ण)
अनुच्छेद 304(ख) के तहत व्यापार पर युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को पेश करने के लिए किसकी पूर्व मंजूरी आवश्यक है?
Answer: भारत के राष्ट्रपति