Part XII - Finance & Property • अनुच्छेद

अनुच्छेद 297 Simplified: राज्यांतर्गत समुद्र-क्षेत्र या महाद्वीपीय मग्नतट भूमि में स्थित मूल्यवान चीजों और अनन्य आर्थिक क्षेत्र के संसाधनों का संघ में निहित होना

अनुच्छेद 297 यह घोषणा करता है कि भारत की समुद्री सीमाओं के भीतर समुद्र तल में मिलने वाली सभी मूल्यवान चीजें (जैसे तेल, प्राकृतिक गैस, कोयला और अन्य खनिज) पूरी तरह केंद्र सरकार (संघ) की संपत्ति हैं। चाहे ये संसाधन तटीय राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, तमिलनाडु या गुजरात) के पास के समुद्र में मिलें, इन पर राज्यों का नहीं बल्कि केवल देश की केंद्र सरकार का अधिकार होगा। समुद्र की सीमाओं को तय करने का अधिकार भी संसद के पास है।

Official Text

[297. राज्यिेत्रीय सागर-खंड या महाद्वीपीय मग्नतट भू मि मि िस्थत मू ल्यवान चीजि और अनन्य आथिर्किेत्र के संपिि स्रोति का संघ मि निहित होना – (1) भारत के राज्यिेत्रीय सागर-खंड या महाद्वीपीय मग्नतट भू मि या अनन्य आथिर्किेत्र मि समु द्र के नीचे कि सभी भू मि, खनिज और अन्य मू ल्यवान चीजि संघ मि निहित हगिी और संघ के प्रयोजनि के लिए धारण कि जाएंगी । (2) भारत के अनन्य आथिर्किेत्र के अन्य सभी संपिि स्रोत भी संघ मि निहित हगिे और संघ के प्रयोजनि के लिए धारण किए जाएंगे । (3) भारत के राज्यिेत्रीय सागर-खंड, महाद्वीपीय मग्नतट भू मि, अनन्य आथिर्किेत्र और अन्य सामु दि्रकिेत्रि कि सीमाएं वे हगिी जो संसद् द्वारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन समय-समय पर विनिदिर्ष्ट कि जाएं ।]

Simple Meaning

अनुच्छेद 297 यह घोषणा करता है कि भारत की समुद्री सीमाओं के भीतर समुद्र तल में मिलने वाली सभी मूल्यवान चीजें (जैसे तेल, प्राकृतिक गैस, कोयला और अन्य खनिज) पूरी तरह केंद्र सरकार (संघ) की संपत्ति हैं। चाहे ये संसाधन तटीय राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, तमिलनाडु या गुजरात) के पास के समुद्र में मिलें, इन पर राज्यों का नहीं बल्कि केवल देश की केंद्र सरकार का अधिकार होगा। समुद्र की सीमाओं को तय करने का अधिकार भी संसद के पास है।

Explain Like Ten

यह नियम हमारे देश की समुद्री सीमा में मिलने वाले खजाने (जैसे तेल और गैस) के बारे में है। यह कहता है कि भारत के समुद्र के नीचे जो भी तेल, गैस या कीमती चीजें मिलेंगी, उन पर केवल पूरे देश की सरकार (केंद्र सरकार) का अधिकार होगा। पास के राज्य (जैसे महाराष्ट्र या केरल) यह नहीं कह सकते कि यह समुद्र हमारे पास है तो यह तेल हमारा है।

Student Mode

अनुच्छेद 297 भारत के समुद्री क्षेत्रों (Maritime Zones) पर संघ की संप्रभुता और मालिकाना हक को परिभाषित करता है। प्रादेशिक समुद्र (Territorial Waters - 12 समुद्री मील तक), महाद्वीपीय मग्नतट भूमि (Continental Shelf) और अनन्य आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone - EEZ) के भीतर समुद्र के नीचे की सभी भूमि, खनिज और अन्य मूल्यवान संपत्तियां संघ में निहित (Vest in the Union) होंगी। खंड (3) के तहत इन समुद्री क्षेत्रों की सीमाओं को निर्धारित करने की अनन्य शक्ति संसद को दी गई है।

Example

मुंबई के तट से कुछ दूरी पर अरब सागर में स्थित 'मुंबई हाई' भारत का एक प्रमुख तेल क्षेत्र है। हालांकि यह महाराष्ट्र के करीब स्थित है, लेकिन वहां से निकलने वाला कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस पूरी तरह से भारत की केंद्र सरकार की संपत्ति है। महाराष्ट्र सरकार इस पर अपना सीधा दावा नहीं कर सकती।

Key Takeaway

भारत के समुद्री क्षेत्रों (जैसे प्रादेशिक जल, महाद्वीपीय शेल्फ और अनन्य आर्थिक क्षेत्र) में पाए जाने वाले सभी खनिज, तेल और मूल्यवान संसाधन पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधिकार में हैं।

FAQs

क्या तटीय राज्य अपने समुद्र तट के पास पाए जाने वाले खनिज तेल पर दावा कर सकते हैं?

नहीं, अनुच्छेद 297 के तहत प्रादेशिक जल और आर्थिक क्षेत्रों के सभी समुद्री संसाधन केवल केंद्र सरकार के अधीन होते हैं।

समुद्री सीमाओं (जैसे प्रादेशिक जल या अनन्य आर्थिक क्षेत्र) की सीमाओं को कौन तय करता है?

इन सीमाओं को संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के तहत समय-समय पर निर्धारित किया जाता है।

Quiz

भारत के प्रादेशिक जल, महाद्वीपीय मग्नतट भूमि और अनन्य आर्थिक क्षेत्र में समुद्र के नीचे मिलने वाले खनिज और तेल किसमें निहित होते हैं?

Answer: भारत संघ (केंद्र सरकार) में

भारत के समुद्री क्षेत्रों (जैसे अनन्य आर्थिक क्षेत्र) की सीमाओं को निर्धारित करने का अधिकार किसे प्राप्त है?

Answer: भारत की संसद को (विधि द्वारा)

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