Part XII - Finance & Property • अनुच्छेद
अनुच्छेद 292 Simplified: भारत सरकार द्वारा उधार लेना
अनुच्छेद 292 केंद्र सरकार को देश का विकास करने या खर्च चलाने के लिए उधार (कर्ज) लेने का अधिकार देता है। केंद्र सरकार भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) को गारंटी (बंधक) के रूप में रखकर देश के भीतर से या विदेशी बैंकों/संस्थाओं से कर्ज ले सकती है। हालांकि, केंद्र सरकार कितना कर्ज ले सकती है और कितनी गारंटी दे सकती है, इसकी अधिकतम सीमा तय करने का अंतिम अधिकार संसद के पास है।
Official Text
भारत सरकार द्वारा उधार लेना – संघ कि कार्यपालिका शिक्त का विस्तार, भारत कि संचित निधि कि प्रतिभू ति पर ऐसी सीमाओं के भीतर, यदि कोई हि, िजन्हि संसद् समय-समय पर विधि द्वारा नियत करे, उधार लेने तक और ऐसी सीमाओं के भीतर, यदि कोई हि, िजन्हि इस प्रकार नियत किया जाए, प्रत्याभू ति देने तक है ।
Simple Meaning
अनुच्छेद 292 केंद्र सरकार को देश का विकास करने या खर्च चलाने के लिए उधार (कर्ज) लेने का अधिकार देता है। केंद्र सरकार भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) को गारंटी (बंधक) के रूप में रखकर देश के भीतर से या विदेशी बैंकों/संस्थाओं से कर्ज ले सकती है। हालांकि, केंद्र सरकार कितना कर्ज ले सकती है और कितनी गारंटी दे सकती है, इसकी अधिकतम सीमा तय करने का अंतिम अधिकार संसद के पास है।
Explain Like Ten
यह नियम हमारी केंद्र सरकार को बैंक या अन्य देशों से कर्ज (लोन) लेने की अनुमति देता है। सरकार यह लोन देश में सड़कें, रेलवे और विकास के काम करने के लिए लेती है। लेकिन सरकार अपनी मर्जी से बहुत ज्यादा कर्ज लेकर देश को कर्ज में न डुबा दे, इसलिए संसद (नेताओं की सभा) कानून बनाकर यह लिमिट तय कर सकती है कि सरकार अधिकतम कितना लोन ले सकती है।
Student Mode
अनुच्छेद 292 संघ सरकार की ऋण लेने की शक्ति (Borrowing Power of the Union) को स्पष्ट करता है। संघ की कार्यपालिका (Executive) को यह अधिकार है कि वह भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) की सुरक्षा पर घरेलू व बाह्य (विदेशी) दोनों स्रोतों से ऋण ले सके अथवा वित्तीय गारंटी दे सके। हालांकि, इस ऋण लेने की सीमा को संसद द्वारा समय-समय पर अधिनियम पारित करके विनियमित व सीमित किया जा सकता है, जैसा कि एफआरबीएम (FRBM Act, 2003) के माध्यम से राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
Example
भारत सरकार जब बैंकों को ट्रेजरी बिल या सरकारी बॉन्ड बेचकर कर्ज लेती है, या विश्व बैंक (World Bank) से बड़ा लोन लेती है, तो वह इसी अनुच्छेद 292 का उपयोग करती है। संसद ने इस कर्ज पर नियंत्रण रखने के लिए 'राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन' (FRBM) कानून बनाया है, जो देश के घाटे की सीमा तय करता है।
Key Takeaway
केंद्र सरकार देश की संचित निधि की गारंटी पर कर्ज ले सकती है, लेकिन उसकी अधिकतम सीमा संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के अधीन होगी।
FAQs
केंद्र सरकार किसकी गारंटी पर कर्ज लेती है?
केंद्र सरकार 'भारत की संचित निधि' (Consolidated Fund of India) की प्रतिभूति (गारंटी) पर कर्ज लेती है।
क्या केंद्र सरकार की कर्ज लेने की शक्ति पर कोई सीमा होती है?
हाँ, केंद्र सरकार की कर्ज लेने और गारंटी देने की सीमाएं संसद द्वारा कानून बनाकर तय की जा सकती हैं।
Quiz
अनुच्छेद 292 के तहत भारत सरकार को उधार लेने और गारंटी देने की सीमाएं तय करने का अधिकार किसे है?
Answer: केवल भारत की संसद को
भारत सरकार द्वारा लिए जाने वाले ऋणों के लिए सुरक्षा (Security) के रूप में किस निधि का उपयोग किया जाता है?
Answer: भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) का