Part XII - Finance & Property • अनुच्छेद

अनुच्छेद 290क Simplified: कुछ देवस्वम् निधियों को वार्षिक संदाय

अनुच्छेद 290क केरल और तमिलनाडु की सरकारों को हर साल अपने सरकारी खजाने (संचित निधि) से एक निश्चित राशि 'देवस्वम् निधियों' (Devaswom Funds) को देने का संवैधानिक आदेश देता है। केरल सरकार हर साल ₹46.5 लाख त्रावणकोर देवस्वम् बोर्ड को देती है और तमिलनाडु सरकार ₹13.5 लाख अपने देवस्वम् कोष को देती है। यह पैसा उन हिंदू मंदिरों और धार्मिक स्थलों के रख-रखाव और पूजा-पाठ के लिए है जो 1956 में राज्यों की सीमाओं के बदलाव से पहले त्रावणकोर-कोचीन रियासत का हिस्सा थे।

Official Text

प्रत्येक वर्ष छियालीस लाख पचास हजार रुपये की राशि केरल राज्य की संचित निधि पर भारित की जाएगी और उसमें से त्रावणकोर देवस्वम् निधि को दी जाएगी; और प्रत्येक वर्ष तेरह लाख पचास हजार रुपये की राशि [तमिलनाडु] राज्य की संचित निधि पर भारित की जाएगी और उसमें से उस राज्य में स्थापित देवस्वम् निधि को दी जाएगी जो 1 नवंबर, 1956 को त्रावणकोर-कोचीन राज्य से स्थानांतरित क्षेत्रों में हिंदू मंदिरों और पूज्य स्थानों के रख-रखाव के लिए बनाई गई है।

Simple Meaning

अनुच्छेद 290क केरल और तमिलनाडु की सरकारों को हर साल अपने सरकारी खजाने (संचित निधि) से एक निश्चित राशि 'देवस्वम् निधियों' (Devaswom Funds) को देने का संवैधानिक आदेश देता है। केरल सरकार हर साल ₹46.5 लाख त्रावणकोर देवस्वम् बोर्ड को देती है और तमिलनाडु सरकार ₹13.5 लाख अपने देवस्वम् कोष को देती है। यह पैसा उन हिंदू मंदिरों और धार्मिक स्थलों के रख-रखाव और पूजा-पाठ के लिए है जो 1956 में राज्यों की सीमाओं के बदलाव से पहले त्रावणकोर-कोचीन रियासत का हिस्सा थे।

Explain Like Ten

यह नियम केरल और तमिलनाडु की सरकारों को एक पक्का काम सौंपता है। इसके तहत केरल सरकार को हर साल ₹46.5 लाख और तमिलनाडु सरकार को ₹13.5 लाख मंदिर कल्याण कोष (देवस्वम् फंड) में जमा करने होते हैं। इस पैसे का उपयोग उन पुराने और ऐतिहासिक हिंदू मंदिरों की देखभाल, मरम्मत और पूजा-पाठ के लिए किया जाता है जो बहुत साल पहले त्रावणकोर रियासत का हिस्सा थे।

Student Mode

अनुच्छेद 290क (संविधान के 7वें संशोधन अधिनियम, 1956 द्वारा अंतःस्थापित) केरल और तमिलनाडु राज्यों पर एक संवैधानिक दायित्व डालता है। इसके तहत, राज्यों के पुनर्गठन के समय त्रावणकोर-कोचीन से स्थानांतरित क्षेत्रों में स्थित हिंदू मंदिरों और देवालयों के रखरखाव के लिए केरल की संचित निधि से ₹46.5 लाख प्रतिवर्ष त्रावणकोर देवस्वम् निधि को तथा तमिलनाडु की संचित निधि से ₹13.5 लाख प्रतिवर्ष स्थानीय देवस्वम् निधि को दिए जाते हैं। यह व्यय गैर-मतदेय (Non-Votable) होता है क्योंकि यह संचित निधि पर भारित (Charged) है।

Example

केरल सरकार द्वारा सबरीमाला मंदिर और अन्य सैकड़ों ऐतिहासिक मंदिरों का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवस्वम् बोर्ड को प्रतिवर्ष ₹46.5 लाख का भुगतान किया जाता है। यह भुगतान केरल की संचित निधि पर सीधे भारित (Charged) होता है, जिसके लिए विधानसभा में अलग से बजट वोट की जरूरत नहीं होती।

Key Takeaway

केरल और तमिलनाडु सरकारों के लिए 1956 में स्थानांतरित क्षेत्रों के हिंदू मंदिरों के रख-रखाव हेतु देवस्वम् निधियों को प्रतिवर्ष तय संवैधानिक भुगतान करना अनिवार्य है।

FAQs

केरल सरकार प्रतिवर्ष देवस्वम् निधि को कितनी राशि देती है?

केरल सरकार प्रतिवर्ष ₹46,50,000 (छियालीस लाख पचास हजार रुपये) त्रावणकोर देवस्वम् निधि को देती है।

यह भुगतान राज्यों की संचित निधि पर क्यों भारित होता है?

यह एक संवैधानिक बाध्यता है, इसलिए इसे संचित निधि पर भारित किया गया है ताकि इसके लिए विधानसभा में हर साल मतदान कराने की आवश्यकता न पड़े।

Quiz

अनुच्छेद 290क के तहत मंदिरों के रख-रखाव के लिए प्रतिवर्ष त्रावणकोर देवस्वम् निधि को भुगतान करने वाला मुख्य राज्य कौन सा है?

Answer: केरल

तमिलनाडु सरकार त्रावणकोर-कोचीन से स्थानांतरित क्षेत्रों के मंदिरों के लिए प्रतिवर्ष कितनी राशि अपने देवस्वम् कोष को देती है?

Answer: ₹13.5 लाख

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