Part XII - Finance & Property • अनुच्छेद
अनुच्छेद 286 Simplified: माल के क्रय या विक्रय पर कर के अधिरोपण के संबंध में निर्बन्धन
अनुच्छेद 286 राज्य सरकारों को अपनी सीमाओं के बाहर होने वाले या देश के अंतरराष्ट्रीय आयात-निर्यात (इंपोर्ट-एक्सपोर्ट) के दौरान होने वाले लेन-देन पर टैक्स लगाने से रोकता है। यह सुनिश्चित करता है कि अंतर-राज्यीय व्यापार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कर लगाने के नियमों को केवल संसद ही नियंत्रित कर सके। 2016 में 101वें संशोधन द्वारा कर प्रणाली को जीएसटी (GST) के अनुकूल बनाने के लिए इसमें 'माल के क्रय-विक्रय' की जगह 'माल या सेवाओं की आपूर्ति' शब्द जोड़े गए।
Official Text
माल के क्रय या विक्रय पर कर के अधिरोपण के बारे मि निबधिन – (1) राज्य कि कोई विधि, [माल के या सेवाओं के या दोनि के प्रदाय पर, जहां ऐसा प्रदाय]– (क) राज्य के बाहर, या (ख) भारत के राज्यिेत्र मि [माल के या सेवाओं के या दोनि के आयात अथवा माल के या सेवाओं के या दोनि के] बाहर नियार्त के दौरान, होता है वहां, कोई कर अधिरोपित नहीं करेगी या अधिरोपित करना प्राधिकृ त नहीं करेगी । [* * * *] [(2) संसद्, यह अवधारित करने के लिए कि [माल का या सेवाओं का या दोनि का प्रदाय] खंड (1) मि वणिर्त रीतियि मि से किसी रीति से कब होता है विधि द्वारा, सिद्धांत बना सकेगी । [(3)* * * *]
Simple Meaning
अनुच्छेद 286 राज्य सरकारों को अपनी सीमाओं के बाहर होने वाले या देश के अंतरराष्ट्रीय आयात-निर्यात (इंपोर्ट-एक्सपोर्ट) के दौरान होने वाले लेन-देन पर टैक्स लगाने से रोकता है। यह सुनिश्चित करता है कि अंतर-राज्यीय व्यापार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कर लगाने के नियमों को केवल संसद ही नियंत्रित कर सके। 2016 में 101वें संशोधन द्वारा कर प्रणाली को जीएसटी (GST) के अनुकूल बनाने के लिए इसमें 'माल के क्रय-विक्रय' की जगह 'माल या सेवाओं की आपूर्ति' शब्द जोड़े गए।
Explain Like Ten
यह नियम राज्यों को अपनी सीमा से बाहर होने वाले व्यापार पर टैक्स लगाने से रोकता है। उदाहरण के लिए, यदि उत्तर प्रदेश की कोई कंपनी अमेरिका को कोई सामान बेचती है, तो उत्तर प्रदेश की सरकार उस पर टैक्स नहीं लगा सकती। साथ ही, यदि सामान एक राज्य से दूसरे राज्य भेजा जा रहा है, तो उस पर टैक्स लगाने के नियम केवल दिल्ली की केंद्र सरकार (संसद) बना सकती है।
Student Mode
अनुच्छेद 286 माल या सेवाओं की आपूर्ति पर कर लगाने की राज्यों की शक्ति पर निर्बन्धन (Restrictions) लगाता है। खंड (1) के तहत, कोई भी राज्य विधानमंडल (State Legislature) ऐसी आपूर्तियों पर कर नहीं लगा सकता जो: (क) राज्य के भौगोलिक क्षेत्राधिकार से बाहर (Outside the State) होती हैं, या (ख) भारत में आयात (Import) अथवा भारत से निर्यात (Export) के दौरान होती हैं। खंड (2) संसद को यह अवधारित करने के सिद्धांत बनाने की शक्ति देता है कि कोई आपूर्ति कब इन श्रेणियों के अंतर्गत आती है। 101वें संशोधन, 2016 द्वारा इसे जीएसटी (GST) व्यवस्था के अनुरूप संशोधित किया गया था।
Example
यदि कर्नाटक की कोई कंपनी अमेरिका को सॉफ्टवेयर निर्यात करती है, तो कर्नाटक सरकार उस निर्यात पर कोई स्थानीय टैक्स नहीं लगा सकती। इसी प्रकार, यदि माल गुजरात से दिल्ली भेजा जाता है, तो रास्ते में पड़ने वाले राज्य उस माल पर राज्य बिक्री कर नहीं लगा सकते; अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर कर लगाने के नियम संसद द्वारा GST के तहत बनाए जाते हैं।
Key Takeaway
राज्य सरकारें आयात, निर्यात और अपनी राज्य सीमाओं के बाहर होने वाली आपूर्तियों पर टैक्स नहीं लगा सकती हैं; इसका नियंत्रण पूरी तरह संसद के पास है।
FAQs
क्या राज्य सरकारें विदेशों में किए जाने वाले निर्यात पर टैक्स लगा सकती हैं?
नहीं, अनुच्छेद 286(1)(ख) के तहत राज्यों को आयात और निर्यात पर टैक्स लगाने से पूरी तरह रोका गया है।
संविधान के किस संशोधन द्वारा अनुच्छेद 286 में 'माल और सेवाओं की आपूर्ति' शब्द जोड़े गए थे?
इसे संविधान (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 द्वारा जोड़ा गया था।
Quiz
अनुच्छेद 286 के अनुसार, कोई भी राज्य निम्नलिखित में से किस स्थिति में माल या सेवाओं की आपूर्ति पर टैक्स नहीं लगा सकता?
Answer: यदि आपूर्ति राज्य की सीमा के बाहर या देश के आयात-निर्यात के दौरान हो रही हो
यह निर्धारित करने के लिए कि आपूर्ति कब राज्य के बाहर या आयात-निर्यात के दौरान मानी जाएगी, इसके सिद्धांत बनाने का अधिकार किसके पास है?
Answer: केवल भारत की संसद के पास