Part XII - Finance & Property • अनुच्छेद
अनुच्छेद 285 Simplified: संघ की संपत्ति को राज्य कराधान से छूट
अनुच्छेद 285 केंद्र सरकार की संपत्तियों को राज्य और स्थानीय करों (जैसे हाउस टैक्स या नगर निगम के टैक्स) से छूट देता है। इसके अनुसार, राज्य सरकार या कोई नगरपालिका (जैसे दिल्ली नगर निगम या मुंबई नगर निगम) केंद्र सरकार की किसी बिल्डिंग या जमीन पर टैक्स नहीं लगा सकती, जब तक कि संसद खुद कानून बनाकर इसकी अनुमति न दे। हालांकि, जो टैक्स 1950 से पहले से केंद्र की संपत्ति पर वसूले जा रहे थे, वे चलते रहेंगे जब तक संसद नया नियम नहीं बनाती।
Official Text
संघ कि संपिि को राज्य के कराधान से छू ट – (1) वहां तक के सिवाय, जहां तक संसद् विधि द्वारा अन्यथा उपबंध करे, किसी राज्य द्वारा या राज्य के भीतर किसी प्राधिकारि द्वारा अधिरोपित सभी करि से संघ कि संपिि को छू ट होगी । (2) जब तक संसद् विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे तब तक खंड (1) कि कोई बात किसी राज्य के भीतर किसी प्राधिकारि को संघ कि किसी संपिि पर कोई ऐसा कर, िजसका दायित्व इस संविधान के प्रारंभ से ठकि पहले, ऐसी संपिि पर था या माना जाता था, उद्गृ हति करने से तब तक नहीं रोके गी जब तक वह कर उस राज्य मि उद्गृ हति होता रहता है ।
Simple Meaning
अनुच्छेद 285 केंद्र सरकार की संपत्तियों को राज्य और स्थानीय करों (जैसे हाउस टैक्स या नगर निगम के टैक्स) से छूट देता है। इसके अनुसार, राज्य सरकार या कोई नगरपालिका (जैसे दिल्ली नगर निगम या मुंबई नगर निगम) केंद्र सरकार की किसी बिल्डिंग या जमीन पर टैक्स नहीं लगा सकती, जब तक कि संसद खुद कानून बनाकर इसकी अनुमति न दे। हालांकि, जो टैक्स 1950 से पहले से केंद्र की संपत्ति पर वसूले जा रहे थे, वे चलते रहेंगे जब तक संसद नया नियम नहीं बनाती।
Explain Like Ten
यह नियम कहता है कि केंद्र सरकार की इमारतों (जैसे रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे या डाकघर) पर राज्य सरकार या शहर का नगर निगम कोई टैक्स (जैसे हाउस टैक्स) नहीं लगा सकता। चूंकि ये पूरे देश के लोगों की भलाई के लिए हैं, इसलिए इन्हें इस तरह के स्थानीय टैक्स से दूर रखा गया है। लेकिन यदि 1950 से पहले से कोई टैक्स लिया जा रहा था, तो उसे तब तक लिया जा सकता है जब तक संसद मना न कर दे।
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अनुच्छेद 285 अंतर-सरकारी कर उन्मुक्ति (Intergovernmental Tax Immunity) के सिद्धांत पर आधारित है। खंड (1) के तहत संघ की संपत्ति (Property of the Union) को राज्यों या उनके स्थानीय निकायों (जैसे नगरपालिकाओं या जिला बोर्डों) द्वारा लगाए जाने वाले सभी करों से पूर्ण मुक्ति प्राप्त है, जब तक कि संसद विधि बनाकर अन्यथा उपबंध न करे। खंड (2) एक अपवाद प्रदान करता है कि संविधान के प्रारंभ से ठीक पूर्व वसूले जा रहे कर तब तक लागू रह सकते हैं जब तक संसद कोई विपरीत विधि लागू नहीं करती।
Example
लखनऊ नगर निगम वहां स्थित रेलवे स्टेशन या मुख्य डाकघर (जो केंद्र सरकार की संपत्ति हैं) पर कोई गृह कर (House Tax) या संपत्ति कर नहीं वसूल सकता, क्योंकि अनुच्छेद 285 के तहत उन्हें छूट प्राप्त है।
Key Takeaway
केंद्र सरकार की संपत्तियों को राज्य या स्थानीय करों से संवैधानिक सुरक्षा (छूट) प्राप्त है, जब तक कि संसद इसके विरुद्ध कोई कानून पारित न करे।
FAQs
क्या कोई नगरपालिका रेलवे की संपत्ति पर गृह कर (Property Tax) लगा सकती है?
नहीं, रेलवे केंद्र सरकार की संपत्ति है और अनुच्छेद 285 के तहत इस पर कोई भी राज्य या स्थानीय टैक्स नहीं लगाया जा सकता, जब तक कि संसद इसके लिए कानून न बनाए।
क्या केंद्र की संपत्ति पर कर लगाने के लिए संसद को कानून बनाना पड़ता है?
काफी सही, केवल संसद ही कानून द्वारा राज्यों को केंद्र की संपत्ति पर टैक्स लगाने की अनुमति दे सकती है।
Quiz
अनुच्छेद 285 के अनुसार, संघ (केंद्र सरकार) की संपत्ति को किसके कराधान से छूट प्राप्त है?
Answer: राज्य और उसके भीतर के स्थानीय प्राधिकारियों (नगरपालिकाओं आदि) के कराधान से
केंद्र की संपत्ति पर राज्यों को कर लगाने का अधिकार देने वाला कानून कौन बना सकता है?
Answer: केवल भारत की संसद