Part XII - Finance & Property • अनुच्छेद

अनुच्छेद 284 Simplified: लोक सेवकों और न्यायालयों द्वारा प्राप्त वादकर्ताओं की जमा राशियों और अन्य धनराशियों की अभिरक्षा

अनुच्छेद 284 अदालतों और सरकारी अधिकारियों के पास जमा होने वाले 'अमानत' (ट्रस्ट) के पैसों की सुरक्षा करता है। जब किसी कोर्ट में जमानत का पैसा (Bail money) या किसी मुकदमे से जुड़ा पैसा जमा किया जाता है, या किसी सरकारी कर्मचारी को अपनी ड्यूटी के दौरान कोई प्राइवेट जमा राशि मिलती है, तो वह पैसा सरकार का टैक्स राजस्व नहीं होता। इस पैसे को सीधे 'लोक लेखे' (Public Account) में रखा जाता है ताकि यह सरकारी खर्चों में न बहे और सुरक्षित रहे।

Official Text

लोक सेवकि और न्यायालयि द्वारा प्राप्त वादकतार्ओं कि जमा राशियि और अन्य धनराशियि कि अभिरिा – ऐसी सभी धनराशियां, जो – (क) यथािस्थति, भारत सरकार या राज्य कि सरकार द्वारा जु टाए गए या प्राप्त राजस्व या लोक धनराशियि से भिन्न हि , और संघ या किसी राज्य के कायर्कलाप के संबंध मि नियोिजत किसी अधिकारि को उसकि उस हैसियत मि , या (ख) किसी वाद, विषय, लेखे या व्यिक्तयि के नाम मि जमा भारत के राज्यिेत्र के भीतर किसी न्यायालय को, ु सू ची द्वारा (1-11- 1956 से) “या राजप्रमु ख” शब्दि का लोप किया गया । प्राप्त होती है या उसके पास नििपि्त कि जाती है, यथािस्थति, भारत के लोक लेखे मि या राज्य के लोक लेखे मि जमा कि जाएगी ।

Simple Meaning

अनुच्छेद 284 अदालतों और सरकारी अधिकारियों के पास जमा होने वाले 'अमानत' (ट्रस्ट) के पैसों की सुरक्षा करता है। जब किसी कोर्ट में जमानत का पैसा (Bail money) या किसी मुकदमे से जुड़ा पैसा जमा किया जाता है, या किसी सरकारी कर्मचारी को अपनी ड्यूटी के दौरान कोई प्राइवेट जमा राशि मिलती है, तो वह पैसा सरकार का टैक्स राजस्व नहीं होता। इस पैसे को सीधे 'लोक लेखे' (Public Account) में रखा जाता है ताकि यह सरकारी खर्चों में न बहे और सुरक्षित रहे।

Explain Like Ten

यह नियम कोर्ट और सरकारी अधिकारियों के पास जमा होने वाले लोगों के अमानत के पैसों (जैसे जमानत का पैसा) को सुरक्षित रखने के लिए है। यह कहता है कि यह पैसा सरकार का अपना नहीं है, इसलिए इसे सरकार के रोज के खर्चों वाले खाते में नहीं डाला जाएगा। इसे एक अलग खाते (लोक लेखे) में सुरक्षित रखा जाएगा और काम पूरा होने पर मालिक को वापस दे दिया जाएगा।

Student Mode

अनुच्छेद 284 लोक सेवकों और न्यायालयों के पास धारित न्यास धनराशियों (Trust Moneys) की सुरक्षा की व्यवस्था करता है। यह स्पष्ट करता है कि किसी लोक सेवक को उसकी आधिकारिक क्षमता में प्राप्त होने वाला गैर-राजस्व धन या किसी न्यायालय में जमा वादकर्ताओं की राशि (जैसे जमानत राशि, न्यायिक जमा आदि) क्रमशः भारत या राज्य के लोक लेखे (Public Account) में जमा की जाएगी। यह निधि सरकार के सामान्य राजस्व से अलग एक धरोहर (Trust) के रूप में प्रबंधित की जाती है।

Example

जब कोई व्यक्ति अदालत में ₹50,000 की जमानत राशि जमा करता है, तो अदालत उसे सरकारी तिजोरी में नहीं डालती। वह पैसा अनुच्छेद 284 के तहत राज्य के लोक लेखे (Public Account) में एक अमानत के रूप में जमा होता है और मुकदमा खत्म होने पर उस व्यक्ति को वापस कर दिया जाता है।

Key Takeaway

अदालतों या सरकारी बाबुओं के पास जमा होने वाली निजी अमानतों (जैसे जमानत या सिक्योरिटी डिपॉजिट) को लोक लेखे में सुरक्षित रखा जाता है, सरकारी बजट से अलग।

FAQs

न्यायालयों में जमा जमानत राशि (Bail Money) कहाँ जमा की जाती है?

अनुच्छेद 284 के अनुसार, यह राशि भारत या राज्य के लोक लेखे (Public Account) में जमा की जाती है।

लोक सेवक को उसकी आधिकारिक क्षमता में मिलने वाले पैसे और सरकारी राजस्व में क्या अंतर है?

सरकारी राजस्व सरकार की अपनी आय होती है (जो संचित निधि में जाती है), जबकि लोक सेवक को मिलने वाली निजी जमा राशियां अमानत होती हैं जो लोक लेखे में जमा होती हैं।

Quiz

अदालतों में जमा किए गए वादकर्ताओं के पैसों को किस खाते में रखना अनिवार्य है?

Answer: लोक लेखा (Public Account) में

अनुच्छेद 284 के तहत कौन सी धनराशि लोक लेखे में जमा की जाती है?

Answer: सरकारी अधिकारियों और अदालतों द्वारा प्राप्त गैर-राजस्व जमा राशियां

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