Part XII - Finance • अनुच्छेद

अनुच्छेद 279क Simplified: वस्तु और सेवा कर परिषद

अनुच्छेद 279क देश में 'वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद' का गठन करता है। यह एक संयुक्त मंच है जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं और इसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री सदस्य होते हैं। यह परिषद देश में GST की दरें, टैक्स स्लैब, छूट सीमा और कर के नियमों को तय करती है। कोई भी फैसला लेने के लिए 75% बहुमत की आवश्यकता होती है, जिसमें केंद्र सरकार का वोट शेयर 33.3% और सभी राज्यों का मिलकर 66.7% होता है।

Official Text

(1) राष्ट्रपति, संविधान (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 के प्रारंभ की तारीख से साठ दिन के भीतर, आदेश द्वारा, एक परिषद का गठन करेगा जिसे वस्तु और सेवा कर परिषद (जीएसटी काउंसिल) कहा जाएगा। (2) वस्तु और सेवा कर परिषद निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगी, अर्थात्- (क) केंद्रीय वित्त मंत्री-अध्यक्ष; (ख) राजस्व या वित्त के प्रभारी केंद्रीय राज्य मंत्री-सदस्य; (ग) प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट वित्त या कराधान के प्रभारी मंत्री या कोई अन्य मंत्री-सदस्य। (3) खंड (2) के उपखंड (ग) में निर्दिष्ट वस्तु और सेवा कर परिषद के सदस्य, यथाशीघ्र, अपने में से एक को ऐसी अवधि के लिए जो वे विनिश्चित करें, परिषद का उपाध्यक्ष चुनेंगे। (4) वस्तु और सेवा कर परिषद संघ और राज्यों को निम्नलिखित विषयों पर सिफारिशें करेगी- (क) संघ, राज्यों और स्थानीय निकायों द्वारा लगाए जाने वाले कर, उपकर और अधिभार जिन्हें वस्तु और सेवा कर में समाहित किया जा सकता है; (ख) वे माल और सेवाएं जिन्हें वस्तु और सेवा कर के अधीन किया जा सकेगा या उससे छूट दी जा सकेगी; (ग) आदर्श वस्तु और सेवा कर विधि, अधिरोपण के सिद्धांत, अनुच्छेद 269क के अधीन अंतरराज्यिक व्यापार या वाणिज्य के दौरान होने वाली आपूर्तियों पर लगाए गए वस्तु और सेवा कर का आवंटन और वे सिद्धांत जो आपूर्ति के स्थान को शासित करते हैं; (घ) टर्नओवर की वह सीमा जिसके नीचे माल और सेवाओं को वस्तु और सेवा कर से छूट दी जा सकेगी; (ङ) वस्तु और सेवा कर की दरें, जिनके अंतर्गत दरों की न्यूनतम सीमा (फ्लोर रेट) और बैंड भी हैं; (च) किसी प्राकृतिक आपदा या विपत्ति के दौरान अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए विनिर्दिष्ट अवधि के लिए कोई विशेष दर या दरें; (छ) अरुणाचल प्रदेश, असम, जम्मू और कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों के संबंध में विशेष उपबंध; और (ज) वस्तु और सेवा कर से संबंधित कोई अन्य विषय, जैसा परिषद विनिश्चित करे। (5) वस्तु और सेवा कर परिषद उस तारीख की सिफारिश करेगी जिससे पेट्रोलियम क्रूड, हाई स्पीड डीजल, मोटर स्पिरिट (आमतौर पर पेट्रोल के रूप में जाना जाता है), प्राकृतिक गैस और विमानन टर्बाइन ईंधन पर वस्तु और सेवा कर लगाया जाएगा। (6) इस अनुच्छेद द्वारा प्रदत्त कृत्यों का निर्वहन करते समय, वस्तु और सेवा कर परिषद वस्तु और सेवा कर की एक सुसंगत संरचना और माल और सेवाओं के लिए एक सुसंगत राष्ट्रीय बाजार के विकास की आवश्यकता द्वारा मार्गदर्शित होगी। (7) वस्तु और सेवा कर परिषद के कुल सदस्यों की आधी संख्या से उसकी बैठकों में गणपूर्ति (कोरम) होगी। (8) वस्तु और सेवा कर परिषद अपने कृत्यों के पालन में प्रक्रिया का निर्धारण स्वयं करेगी। (9) वस्तु और सेवा कर परिषद का प्रत्येक निर्णय उसकी बैठक में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के भारित मतों के कम से कम तीन-चौथाई (75%) बहुमत द्वारा लिया जाएगा, जो निम्नलिखित सिद्धांतों के अनुसार होगा, अर्थात्- (क) केंद्रीय सरकार के मत का भार डाले गए कुल मतों का एक-तिहाई (33.3%) होगा; और (ख) सभी राज्य सरकारों के मतों का मिलाकर भार डाले गए कुल मतों का दो-तिहाई (66.7%) होगा। (10) परिषद का कोई कार्य केवल इस आधार पर अवैध नहीं होगा कि उसकी स्थापना में कोई रिक्ति या त्रुटि थी, या किसी सदस्य की नियुक्ति में कोई त्रुटि थी। (11) वस्तु और सेवा कर परिषद अपनी सिफारिशों या उनके कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले किसी विवाद के न्यायनिर्णयन के लिए एक तंत्र स्थापित करेगी।

Simple Meaning

अनुच्छेद 279क देश में 'वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद' का गठन करता है। यह एक संयुक्त मंच है जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं और इसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री सदस्य होते हैं। यह परिषद देश में GST की दरें, टैक्स स्लैब, छूट सीमा और कर के नियमों को तय करती है। कोई भी फैसला लेने के लिए 75% बहुमत की आवश्यकता होती है, जिसमें केंद्र सरकार का वोट शेयर 33.3% और सभी राज्यों का मिलकर 66.7% होता है।

Explain Like Ten

यह नियम एक बहुत बड़ी टीम बनाता है जिसे 'GST काउंसिल' कहते हैं। इस टीम के बॉस देश के वित्त मंत्री होते हैं और इसमें हर राज्य के गृह या वित्त मंत्री भी शामिल होते हैं। यह टीम मिलकर तय करती है कि चॉकलेट, मोबाइल या गाड़ी पर कितना टैक्स (GST) लगेगा। इस टीम में कोई भी फैसला तब तक पास नहीं होता जब तक केंद्र सरकार और ज्यादातर राज्य सरकारें मिलकर इसके लिए राजी न हो जाएं।

Student Mode

अनुच्छेद 279क 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 द्वारा जोड़ा गया, जो सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके अंतर्गत 'जीएसटी परिषद' (GST Council) की स्थापना की गई है। परिषद का मुख्य कार्य जीएसटी की दरों, छूटों, अंतरराज्यिक कर (IGST) के आवंटन और आपूर्ति के स्थान (Place of Supply) के सिद्धांतों पर संघ और राज्यों को सिफारिशें देना है। इसके निर्णयों के लिए बैठकों में 50% गणपूर्ति (Quorum) तथा 75% भारित बहुमत (Weighted Majority) आवश्यक है, जिसमें केंद्र का भारांश 1/3 और राज्यों का 2/3 होता है।

Example

यदि सरकार मोबाइल फोन पर GST दर को 18% से घटाकर 12% करना चाहती है, तो इसके लिए GST काउंसिल की बैठक बुलानी होगी। इस प्रस्ताव को पास कराने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री और अधिकांश राज्यों के वित्त मंत्रियों की सहमति आवश्यक है ताकि 75% का वोट स्तर प्राप्त हो सके।

Key Takeaway

GST परिषद एक सहकारी संघीय संस्था है जो सर्वसम्मति और 75% भारित मतदान प्रणाली के माध्यम से देश के संपूर्ण अप्रत्यक्ष कर (GST) ढांचे को नियंत्रित करती है।

FAQs

जीएसटी परिषद (GST Council) का अध्यक्ष कौन होता है?

केंद्रीय वित्त मंत्री (Union Finance Minister) जीएसटी परिषद के पदेन अध्यक्ष होते हैं।

जीएसटी परिषद में राज्यों का मत भार (Voting Weightage) कितना होता है?

बैठक में डाले गए कुल वोटों में सभी राज्य सरकारों का सामूहिक मत भार दो-तिहाई (66.7%) होता है।

Quiz

अनुच्छेद 279क के तहत जीएसटी परिषद की स्थापना करने का अधिकार किसे दिया गया है?

Answer: भारत के राष्ट्रपति को (आदेश द्वारा)

जीएसटी परिषद में कोई भी निर्णय लेने के लिए न्यूनतम कितने भारित मतों का समर्थन आवश्यक है?

Answer: तीन-चौथाई बहुमत (75%)

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