Part XII - Finance • अनुच्छेद

अनुच्छेद 276 Simplified: वृत्तियों, व्यापारों, आजीविकाओं और नियोजनों पर कर

अनुच्छेद 276 राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों (जैसे नगरपालिकाओं या जिला बोर्डों) को अपने राज्य में नौकरी या व्यवसाय करने वाले लोगों पर एक विशेष टैक्स लगाने की अनुमति देता है, जिसे 'व्यवसाय कर' या 'प्रोफेशन टैक्स' (Profession Tax) कहा जाता है। चूंकि आय पर कर लगाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है, इसलिए दोहरा कर न लगे, इसके लिए संविधान ने प्रोफेशन टैक्स की अधिकतम सीमा ₹2,500 प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति तय की है।

Official Text

वृ ियिि, व्यापारि , आजीविकाओं और नियोजनि पर कर – (1) अनु च्छेद 246 मि किसी बात के होते हु ए भी, किसी राज्य के विधान-मंडल कि ऐसे करि से संबंधित कोई विधि, जो उस राज्य के या उसमि किसी नगरपालिका, िजला बोडर्, स्थानीय बोडर् या अन्य स्थानीय प्राधिकारि के फायदे के लिए वृ ियिि, व्यापारि, आजीविकाओं या नियोजनि के संबंध मि है, इस आधार पर अविधिमान्य नहीं होगी कि वह आय पर कर से संबंधित है । 1. पू विरि िेत्र (पु नगर्ठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) कि धारा 71 द्वारा ( 21- 1-1972 से) “भाग क” के स्थान पर प्रतिस्थापित । (2) राज्य को या उस राज्य मि किसी एक नगरपालिका, िजला बोडर्, स्थानीय बोडर् या अन्य स्थानीय प्राधिकारि को किसी एक व्यिक्त के बारे मि वृ ियिि, व्यापारि, आजीविकाओं और नियोजनि पर करि के रूप मि संदेय कु ल रकम [दो हजार पाँच सौ रुपए] प्रति वषर् से अधिक नहीं होगी । * * * * (3) वृ ियिि, व्यापारि, आजीविकाओं और नियोजनि पर करि के संबंध मि पू वकि्त रूप मि विधियां बनाने कि राज्य के विधान-मंडल कि शिक्त का यह अथर् नहीं लगाया जाएगा कि वह वृ ियिि, व्यापारि, आजीविकाओं और नियोजनि से प्रोद्भू त या उद्भू त आय पर करि के संबंध मि विधियां बनाने कि संसद् कि शिक्त को किसी प्रकार सीमित करती है ।

Simple Meaning

अनुच्छेद 276 राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों (जैसे नगरपालिकाओं या जिला बोर्डों) को अपने राज्य में नौकरी या व्यवसाय करने वाले लोगों पर एक विशेष टैक्स लगाने की अनुमति देता है, जिसे 'व्यवसाय कर' या 'प्रोफेशन टैक्स' (Profession Tax) कहा जाता है। चूंकि आय पर कर लगाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है, इसलिए दोहरा कर न लगे, इसके लिए संविधान ने प्रोफेशन टैक्स की अधिकतम सीमा ₹2,500 प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति तय की है।

Explain Like Ten

यह नियम राज्यों को अपने इलाके में काम करने वाले डॉक्टरों, इंजीनियरों, नौकरीपेशा लोगों या दुकानदारों से एक छोटा सा टैक्स लेने की अनुमति देता है, जिसे 'प्रोफेशन टैक्स' कहते हैं। यह टैक्स बहुत ज्यादा न हो, इसके लिए संविधान में तय किया गया है कि राज्य सरकार किसी भी व्यक्ति से 1 साल में ₹2,500 से ज्यादा का यह टैक्स नहीं ले सकती।

Student Mode

अनुच्छेद 276 राज्यों और उनके स्थानीय निकायों को वृत्तियों, व्यापारों, आजीविकाओं या नियोजनों (Professions, Trades, Callings, or Employments) पर कर लगाने का अधिकार प्रदान करता है। चूंकि यह कर आय (Income) से संबंधित होता है, अतः इसे आयकर पर संघ के अनन्य अधिकार के अतिक्रमण के रूप में अवैध न ठहराया जाए, इसके लिए खंड (1) इसे संवैधानिक संरक्षण देता है। दोहरे कराधान से बचने के लिए, खंड (2) के तहत प्रति व्यक्ति अधिकतम राशि ₹2,500 प्रति वर्ष निर्धारित (60वें संशोधन अधिनियम, 1988 द्वारा संशोधित) की गई है।

Example

यदि आप कर्नाटक या महाराष्ट्र में नौकरी करते हैं, तो आपकी सैलरी स्लिप में हर महीने लगभग ₹200 का 'प्रोफेशन टैक्स' कटा हुआ दिखता है। यह पैसा राज्य सरकार के खाते में जाता है और इसका सालाना कुल योग संविधान द्वारा तय सीमा (₹2,500) से अधिक नहीं हो सकता।

Key Takeaway

राज्य सरकारें अधिकतम ₹2,500 सालाना प्रति व्यक्ति की सीमा तक प्रोफेशन टैक्स लगा सकती हैं।

FAQs

प्रोफेशन टैक्स (व्यवसाय कर) की संवैधानिक अधिकतम सीमा क्या है?

संविधान के अनुच्छेद 276(2) के अनुसार, प्रोफेशन टैक्स की अधिकतम सीमा ₹2,500 प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति है।

क्या प्रोफेशन टैक्स लगाने से संसद की आयकर लगाने की शक्ति कम होती है?

नहीं, अनुच्छेद 276(3) स्पष्ट करता है कि राज्यों की यह शक्ति संसद के आयकर लगाने के अधिकार को किसी भी प्रकार प्रभावित या सीमित नहीं करती है।

Quiz

राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों द्वारा वसूले जाने वाले प्रोफेशन टैक्स (व्यवसाय कर) की अधिकतम वार्षिक सीमा कितनी है?

Answer: ₹2,500

किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा प्रोफेशन टैक्स की सीमा ₹250 से बढ़ाकर ₹2,500 की गई थी?

Answer: 60वां संशोधन अधिनियम (1988)

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