Part XII - Finance & Property • अनुच्छेद

अनुच्छेद 273 Simplified: पटसन और पटसन उत्पादों पर निर्यात शुल्क के बदले अनुदान

अनुच्छेद 273 आजादी के बाद जूट (पटसन) उत्पादक राज्यों जैसे असम, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के लिए एक अस्थाई मदद थी। पहले जूट के निर्यात (विदेश भेजने) पर लगने वाला टैक्स केंद्र सरकार लेती थी, जिसके बदले में इन राज्यों को मुआवजा (सहायता अनुदान) दिया जाता था। यह व्यवस्था संविधान लागू होने के केवल 10 साल तक (यानी 1960 तक) ही लागू थी, जिसके बाद यह स्वतः समाप्त हो गई।

Official Text

जू ट पर और जू ट उत्पादि पर नियार् त शु ल्क के स्थान पर अनु दान – (1) जू ट पर और जू ट उत्पादि पर नियार्त शु ल्क के प्रत्येक वषर् के शु द्ध आगम का कोई भाग असम , बिहार, [ओड़िशा] और पिश्चमी बंगाल राज्यि को सपि दिए जाने के स्थान पर उन राज्यि के राजस्व मि सहायता अनु दान के रूप मि प्रत्येक वषर् भारत कि संचित निधि पर ऐसी राशियां भारित कि जाएंगी जो विहित कि जाएं । (2) जू ट पर और जू ट उत्पादि पर जब तक भारत सरकार कोई नियार्त शु ल्क उद्गृ हति करती रहती है तब तक या इस संविधान के प्रारंभ से दस वषर् कि समािप्त तक, इन दोनि मि से जो भी पहले हो, इस प्रकार विहि त राशियां भारत कि संचित निधि पर भारित बनी रहि गी । 2. उड़ीसा (नाम परिवतर्न) अधिनियम, 2011 (2011 का 15) कि धारा 5 द्वारा (1-11-2011 से) “उड़ी सा” के स्थान पर प्रतिस्थापित । (3) इस अनु च्छेद मि , “विहित” पद का वहि अथर् है जो अनु च्छेद 270 मि है ।

Simple Meaning

अनुच्छेद 273 आजादी के बाद जूट (पटसन) उत्पादक राज्यों जैसे असम, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के लिए एक अस्थाई मदद थी। पहले जूट के निर्यात (विदेश भेजने) पर लगने वाला टैक्स केंद्र सरकार लेती थी, जिसके बदले में इन राज्यों को मुआवजा (सहायता अनुदान) दिया जाता था। यह व्यवस्था संविधान लागू होने के केवल 10 साल तक (यानी 1960 तक) ही लागू थी, जिसके बाद यह स्वतः समाप्त हो गई।

Explain Like Ten

यह एक पुराना नियम था जिसके तहत पूर्वी भारत के जूट (जिससे बोरे और रस्सियाँ बनती हैं) उगाने वाले राज्यों (असम, बिहार, बंगाल) को केंद्र सरकार कुछ आर्थिक मदद (अनुदान) देती थी। यह मदद केवल 10 सालों के लिए दी गई थी और 1960 में इसे बंद कर दिया गया।

Student Mode

अनुच्छेद 273 पटसन (Jute) और पटसन उत्पादों पर निर्यात शुल्क (Export Duty) के विभाजन के स्थान पर राज्यों को सहायता अनुदान (Grants-in-aid) प्रदान करने का संक्रमणकालीन प्रावधान (Transitional Provision) था। इसके लाभार्थी मुख्य रूप से चार जूट उत्पादक राज्य—असम, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल थे। संविधान के सूर्यास्त खंड (Sunset Clause) के तहत यह अनुदान केवल 10 वर्ष की अवधि (1960 तक) या निर्यात शुल्क के बने रहने तक (जो भी पहले हो) के लिए ही वैध था।

Example

1950 के दशक में, जब बिहार या पश्चिम बंगाल से जूट विदेशों में निर्यात किया जाता था, तो केंद्र सरकार उस पर निर्यात शुल्क वसूलती थी। इसके बदले में इन राज्यों को अनुच्छेद 273 के तहत आर्थिक सहायता दी जाती थी, जो 1960 में बंद हो गई।

Key Takeaway

अनुच्छेद 273 जूट उत्पादक राज्यों को दिया जाने वाला एक अस्थाई वित्तीय संरक्षण था, जो संविधान निर्माण के 10 वर्ष बाद (1960 में) समाप्त हो गया।

FAQs

अनुच्छेद 273 के तहत किन राज्यों को अनुदान दिया जाता था?

यह अनुदान असम, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल को दिया जाता था।

जूट उत्पादक राज्यों को दिए जाने वाले इस अनुदान की समय-सीमा क्या थी?

यह अनुदान संविधान लागू होने के 10 वर्ष की समाप्ति (वर्ष 1960) तक ही सीमित था।

Quiz

अनुच्छेद 273 के तहत पटसन निर्यात शुल्क के बदले अनुदान का भुगतान किस निधि से किया जाता था?

Answer: भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से

संविधान के प्रारंभ से कितने वर्षों के बाद अनुच्छेद 273 के तहत दी जाने वाली सहायता समाप्त हो गई?

Answer: 10 वर्ष

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