Part XII - Finance & Property • अनुच्छेद

अनुच्छेद 269 Simplified: संघ द्वारा लगाए जाने वाले और एकत्रित किए जाने वाले किंतु राज्यों को सौंपे जाने वाले कर

अनुच्छेद 269 यह व्यवस्था करता है कि गैर-GST वस्तुओं (जैसे समाचार पत्रों को छोड़कर अन्य सामान) के अंतर-राज्यीय (एक राज्य से दूसरे राज्य में) व्यापार या माल भेजने (परेषण) पर लगने वाले करों को केंद्र सरकार तय और वसूल करेगी। लेकिन यह वसूला गया पूरा धन उन राज्यों को दे दिया जाएगा जहाँ वह व्यापार हुआ है। वितरण के नियम संसद तय करती है।

Official Text

संघ द्वारा उद्गृ हति और संगृ हति कि ं तु राज्यि को सपिे जाने वाले कर– [(1) [अनु च्छेद 269क मि यथा उपबंधित के सिवाय,] माल के क्रय] या विक्रय पर कर और माल के परेषण पर कर, भारत सरकार द्वारा उद्गृ हति और संगृ हति किए जाएंगे किन्तु खंड (2) मि उपबंधित रीति से राज्यि को 1 अप्रैल, 1996 को या उसके पश्चात ् सपि दिए जाएंगे या सपि दिए गए समझे जाएंगे । स्पष्टकिरण – इस खंड के प्रयोजनि के लिए – (क) “माल के क्रय या विक्रय पर कर” पद से समाचारपत्रि से भिन्न माल के क्रय या विक्रय पर उस दशा मि कर अभिप्रेत है िजसमि ऐसा क्रय या विक्रय अंतररािज्यक व्यापार या वाणिज्य के दौरान होता है ; (ख) “माल के परेषण पर कर” पद से माल के परेषण पर (चाहे परेषण उसके करने वाले व्यिक्त को या किसी अन्य व्यिक्त को किया गया हो) उस दशा मि कर अभिप्रेत है िजसमि ऐसा परेषण अंतररािज्यक व्यापार या वाणिज्य के दौरान होता है । (2) किसी वििीय वषर् मि किसी ऐसे कर के शु द्ध आगम वहां तक के सिवाय, जहां तक वे आगम संघ राज्यिेत्रि से प्राप्त हु ए आगम माने जा सकते हि , भारत कि संचित निधि के भाग नहीं हगिे, कि ं तु उन राज्यि को सपि दिए जाएंगे िजनके भीतर वह कर उस वषर् मि उद्ग्रहणीय हि और वितरण के ऐसे सिद्धांति के अनु सार, जो संसद् विधि द्वारा बनाए, उन राज्यि के बीच वितरित किए जाएंगे ।] [(3) संसद्, यह अवधारित करने के लिए कि [माल का क्रय या विक्रय या परेषण] कब अंतररािज्यक व्यापार या वाणिज्य के दौरान होता है, विधि द्वारा सिद्धांत बना सकेगी ।]

Simple Meaning

अनुच्छेद 269 यह व्यवस्था करता है कि गैर-GST वस्तुओं (जैसे समाचार पत्रों को छोड़कर अन्य सामान) के अंतर-राज्यीय (एक राज्य से दूसरे राज्य में) व्यापार या माल भेजने (परेषण) पर लगने वाले करों को केंद्र सरकार तय और वसूल करेगी। लेकिन यह वसूला गया पूरा धन उन राज्यों को दे दिया जाएगा जहाँ वह व्यापार हुआ है। वितरण के नियम संसद तय करती है।

Explain Like Ten

यह नियम कहता है कि जब कोई दुकानदार एक राज्य से दूसरे राज्य में कोई सामान (जैसे तेल या कच्चा माल) भेजता है, तो उस पर लगने वाला टैक्स केंद्र सरकार इकट्ठा करेगी। लेकिन केंद्र सरकार उस पैसे को अपने पास नहीं रखेगी, बल्कि उसे उन राज्यों को दे देगी जहाँ से वह सामान भेजा और खरीदा गया है।

Student Mode

अनुच्छेद 269 अंतरराज्यिक व्यापार या वाणिज्य (Inter-State Trade or Commerce) के दौरान माल के क्रय-विक्रय (समाचार पत्रों को छोड़कर) व माल के परेषण (Consignment of Goods) पर कर लगाने से संबंधित है। यह कर भारत सरकार द्वारा अधिरोपित (Levy) और संग्रहित (Collect) किया जाता है, परंतु शुद्ध आगम (Net Proceeds) भारत की संचित निधि का हिस्सा नहीं बनते। इसके बजाय, वे उन राज्यों को सौंप (Assign) दिए जाते हैं जहाँ कर प्रभार्य है। संसद को अंतरराज्यिक परेषण या क्रय-विक्रय के सिद्धांतों को निर्धारित करने का अधिकार है।

Example

यदि असम की एक रिफाइनरी बिहार के एक खरीदार को कच्चा पेट्रोलियम (जो अभी GST के दायरे से बाहर है) बेचती है, तो इस अंतर-राज्यीय व्यापार पर कर केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 269 के तहत वसूला जाता है, लेकिन वह पूरी राशि संसद के नियमों के अनुसार संबंधित राज्यों को सौंप दी जाती है।

Key Takeaway

केंद्र सरकार अंतर-राज्यीय बिक्री/परेषण पर कर वसूलती है, लेकिन इसका पूरा राजस्व राज्यों को वितरित कर दिया जाता है।

FAQs

अनुच्छेद 269 के तहत कौन से कर शामिल नहीं हैं?

इसमें समाचार पत्रों की बिक्री और अनुच्छेद 269क के तहत आने वाले जीएसटी (GST) कर शामिल नहीं हैं।

क्या अनुच्छेद 269 के तहत एकत्रित कर भारत की संचित निधि का हिस्सा बनता है?

नहीं, संघ राज्यक्षेत्रों से संबंधित हिस्से को छोड़कर, यह कर सीधे राज्यों को सौंप दिया जाता है और संचित निधि का हिस्सा नहीं बनता।

Quiz

अनुच्छेद 269 के तहत अंतर-राज्यीय व्यापार के दौरान कर कौन वसूल करता है और वह अंततः किसे दिया जाता है?

Answer: केंद्र सरकार वसूलती है और पूरा पैसा राज्यों को सौंपा जाता है

समाचार पत्रों से भिन्न वस्तुओं के अंतर-राज्यीय क्रय-विक्रय पर करों के वितरण के सिद्धांत कौन तय करता है?

Answer: संसद (विधि द्वारा)

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