Part III - Fundamental Rights • अनुच्छेद
अनुच्छेद 25 Simplified: अंतःकरण की और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 25 भारत के पंथनिरपेक्ष (Secular) ढांचे की रक्षा करता है। यह हर व्यक्ति को अपने विवेक के अनुसार किसी भी धर्म को मानने, उसके रीति-रिवाजों का पालन करने और अपने धर्म के बारे में दूसरों को बताने की पूरी आजादी देता है। आप चाहें तो किसी भी धर्म को न मानें, इसकी भी पूरी छूट है। हालाँकि, यह स्वतंत्रता लोक व्यवस्था (Public Order), नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है—यानी धर्म के नाम पर कानून तोड़ना या दूसरों को परेशान करना प्रतिबंधित है।
Official Text
ंतःकरण की और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता–(1) लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य तथा इस भाग के अन्य उपबंधि के अधीन रहते हु ए, सभी व्यक्तियि को अंतःकरण की स्वतंत्रता का और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान हक होगा । (2) इस अनुच्छेद की कोई बात किसी ऐसी वदि्यमान विधि के प्रवर्तन पर प्रभाव नहीं डालेगी या राज्य को कोई ऐसी विधि बनाने से नविारति नहीं करेगी जो– (क) धामरि्क आचरण से संबद्ध किसी आथरि्क, वित्तीय, राजनैतकी या अन्य लौककी कि्रयाकलाप का विनियमन या नबिर्न्धन करती है ; (ख) सामाजिक कल्याण और सु धार के लिए या सावर्जनकी प्रकार की हंिदु ओं की धामरि्क संस्थाओं को हंिदु ओं के सभी वगि और अनु भागि के लिए खोलने का उपबंध करती है । स्पष्टकरिण 1–कृ पाण धारण करना और लेकर चलना सकि्ख धर्म के मानने का अंग समझा जाएगा । स्पष्टकरिण 2–खंड (2) के उपखंड (ख) मि हंिदु ओं के प्रति निर्देश का यह अथर् लगाया जाएगा की उसके अंतगर्त सकि्ख, जैन या बौद्ध धर्म के मानने वाले व्यक्तियि के प्रति निर्देश है और हंिदु ओं की धामरि्क संस्थाओं के प्रति निर्देश का अथर् तदनु सार लगाया जाएगा ।
Simple Meaning
अनुच्छेद 25 भारत के पंथनिरपेक्ष (Secular) ढांचे की रक्षा करता है। यह हर व्यक्ति को अपने विवेक के अनुसार किसी भी धर्म को मानने, उसके रीति-रिवाजों का पालन करने और अपने धर्म के बारे में दूसरों को बताने की पूरी आजादी देता है। आप चाहें तो किसी भी धर्म को न मानें, इसकी भी पूरी छूट है। हालाँकि, यह स्वतंत्रता लोक व्यवस्था (Public Order), नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है—यानी धर्म के नाम पर कानून तोड़ना या दूसरों को परेशान करना प्रतिबंधित है।
Explain Like Ten
यह आपको अपने धर्म को मानने, पूजा करने और दूसरों को इसके बारे में बताने की पूरी आजादी देता है।
Student Mode
यह अंतःकरण की और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने तथा प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है, जो लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के अधीन है।
Example
सिख समुदाय के लोगों को कृपाण धारण करने और लेकर चलने का अधिकार है। लेकिन कोई भी धार्मिक आयोजन सार्वजनिक सड़कों पर इस प्रकार नहीं किया जा सकता कि यातायात पूरी तरह ठप हो जाए या लोगों का स्वास्थ्य खतरे में पड़े।
Key Takeaway
आस्था आपका व्यक्तिगत चुनाव है। हमारा संविधान हर नागरिक की अंतरात्मा की आवाज का सम्मान करता है।
FAQs
क्या धार्मिक स्वतंत्रता पूर्ण (absolute) है?
नहीं, यह लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है। आप धर्म के नाम पर गैर-कानूनी काम नहीं कर सकते।
क्या अनुच्छेद 25 धर्म परिवर्तन की अनुमति देता है?
यह 'प्रचार' (अपने विश्वासों को साझा करने) की अनुमति देता है, लेकिन कई राज्यों में जबरन धर्म परिवर्तन अवैध है।
क्या कोई व्यक्ति किसी भी धर्म का पालन नहीं करना चुन सकता है?
हाँ, 'अंतःकरण की स्वतंत्रता' के अधिकार में नास्तिक या अज्ञेयवादी होने का अधिकार भी शामिल है।
क्या सिखों को कृपाण धारण करने की अनुमति है?
हाँ, अनुच्छेद 25 में विशेष रूप से उल्लेख है कि 'कृपाण' धारण करना और लेकर चलना सिख धर्म को मानने का हिस्सा माना जाएगा।
Quiz
क्या कोई व्यक्ति किसी भी धर्म का पालन नहीं करना चुन सकता है?
Answer: हाँ
धार्मिक स्वतंत्रता किसके अधीन है?
Answer: लोक व्यवस्था और स्वास्थ्य
अपने धर्म को दूसरों के साथ साझा करना क्या कहलाता है?
Answer: प्रचार
धार्मिक स्वतंत्रता के लिए कौन सा अनुच्छेद है?
Answer: अनुच्छेद 25