Part IX & IXA - Panchayats & Municipalities • अनुच्छेद

अनुच्छेद 243यघ Simplified: जिला योजना के लिए समिति

अनुच्छेद 243यघ हर जिले में एक 'जिला योजना समिति' (DPC) का गठन अनिवार्य बनाता है। इस समिति का मुख्य काम जिले के गाँवों (पंचायतों) और शहरों (नगरपालिकाओं) द्वारा बनाई गई विकास योजनाओं को जोड़कर पूरे जिले के लिए एक साझा और एकीकृत विकास योजना का ढांचा तैयार करना है। इसके 80% सदस्य निर्वाचित होते हैं।

Official Text

(1) प्रत्येक राज्य में जिला स्तर पर, जिले में पंचायतों और नगरपालिकाओं द्वारा तैयार की गई योजनाओं का समेकन करने और पूरे जिले के लिए एक विकास योजना का प्रारूप तैयार करने के लिए एक जिला योजना समिति का गठन किया जाएगा। (2) राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, जिला योजना समितियों की संरचना और उनके सदस्यों के भरे जाने की रीति के संबंध में उपबंध कर सकेगा: परन्तु ऐसी समिति की कुल सदस्य संख्या के कम से कम चार-तिहाई सदस्य, जिले में जिला स्तर की पंचायत और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से, जिले के ग्रामीण क्षेत्रों और नगरीय क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात के अनुसार निर्वाचित किए जाएंगे। (3) प्रत्येक जिला योजना समिति विकास योजना का प्रारूप तैयार करने में निम्नलिखित का ध्यान रखेगी— (क) पंचायतों और नगरपालिकाओं के बीच साझे हित के विषय, जिसके अंतर्गत भू-क्षेत्रीय योजना, जल और अन्य भौतिक और प्राकृतिक संसाधनों का बंटवारा, बुनियादी ढांचे का एकीकृत विकास और पर्यावरण संरक्षण है; (ख) वित्तीय या अन्य उपलब्ध संसाधनों की मात्रा और प्रकार; (ग) ऐसे संस्थानों और संगठनों से परामर्श करेगी जिन्हें राज्यपाल आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे। (4) प्रत्येक जिला योजना समिति का अध्यक्ष, ऐसी समिति द्वारा अनुशंसित विकास योजना को राज्य सरकार को भेजेगा।

Simple Meaning

अनुच्छेद 243यघ हर जिले में एक 'जिला योजना समिति' (DPC) का गठन अनिवार्य बनाता है। इस समिति का मुख्य काम जिले के गाँवों (पंचायतों) और शहरों (नगरपालिकाओं) द्वारा बनाई गई विकास योजनाओं को जोड़कर पूरे जिले के लिए एक साझा और एकीकृत विकास योजना का ढांचा तैयार करना है। इसके 80% सदस्य निर्वाचित होते हैं।

Explain Like Ten

यह नियम कहता है कि हर जिले में एक बड़ी टीम (कमेटी) बनाई जाएगी। यह टीम गाँवों की पंचायतों और शहरों की नगरपालिकाओं के प्लांस को मिलाएगी और पूरे जिले के लिए पानी, बिजली और सड़कों की एक साझा बड़ी योजना होगी।

Student Mode

अनुच्छेद 243यघ जिला स्तर पर नियोजन को विकेंद्रीकृत और समेकित करने के लिए जिला योजना समिति (District Planning Committee - DPC) की स्थापना करता है। यह ग्रामीण-शहरी योजना एकीकरण (Rural-Urban Planning Integration) का संवैधानिक माध्यम है। प्रावधान है कि समिति के न्यूनतम 80% (चार-तिहाई) सदस्य जिला पंचायत और नगरपालिकाओं के निर्वाचित पार्षदों-सदस्यों में से ग्रामीण और शहरी जनसंख्या के अनुपात में चुने जाएंगे। यह योजना निर्माण में लोकतांत्रिक भागीदारी को प्राथमिकता देता है।

Example

मान लीजिए पुणे जिले में गाँवों की पंचायतों ने अपनी पानी की योजना बनाई और पुणे शहर की नगरपालिका ने अपनी। जिला योजना समिति इन दोनों को जोड़ती है ताकि पानी के प्राकृतिक स्रोत, सड़कों और जंगलों का साझा विकास बिना किसी टकराव के हो सके। समिति इस विकास योजना को महाराष्ट्र सरकार को भेजती है।

Key Takeaway

अनुच्छेद 243यघ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की दूरी को पाटकर जिला स्तर पर नियोजित, समन्वित और लोकतांत्रिक विकास सुनिश्चित करता है।

FAQs

जिला योजना समिति (DPC) का मुख्य कार्य क्या है?

DPC का मुख्य कार्य जिले के ग्रामीण (पंचायतों) और शहरी (नगरपालिकाओं) क्षेत्रों द्वारा तैयार की गई विकास योजनाओं को समेकित करना और पूरे जिले के लिए एक एकीकृत विकास योजना का प्रारूप तैयार करना है।

जिला योजना समिति में कितने सदस्य निर्वाचित होने चाहिए?

समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम 80% (चार-तिहाई) सदस्य जिले के शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों के निर्वाचित सदस्यों में से स्वयं उनके द्वारा चुने जाते हैं।

Quiz

जिला योजना समिति द्वारा तैयार की गई एकीकृत विकास योजना को अंतिम मंजूरी के लिए किसे भेजा जाता है?

Answer: राज्य सरकार को

जिला योजना समिति के कितने सदस्यों का निर्वाचित होना अनिवार्य है?

Answer: कम से कम चार-तिहाई (80%)

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