Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 233क Simplified: कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों आदि का विधिमान्यकरण

अनुच्छेद 233क (233क) को 1966 में 20वें संविधान संशोधन द्वारा कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों, पदस्थापनाओं, पदोन्नतियों और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों को वैध (Valid) बनाने के लिए जोड़ा गया था। ऐसा तब किया गया जब न्यायालयों ने कुछ नियुक्तियों को अमान्य घोषित कर दिया क्योंकि राज्य सरकारों ने उच्च न्यायालय के साथ उचित परामर्श नहीं किया था।

Official Text

कुछ जिला न्यायाधीशों� क� �नियुक्तिय� का और उनके द्वारा �कए गए �निर्णय� आ�द का �व�धमेंान्यकरण–�कसी न्यायालयों का कोई �निर्णय, �डिक्री� या आदेश होतेहुए भी, – (क) (i) उस व्यिक्त क� जो राज्यों क� न्या�यक सेवा में� पहले से ह� है याउस व्यिक्त क�, जो कमेंसे कमेंसात वषर् तक अ�धवक्ता या प्ल�डर रहा है, उसराज्यों में� जिला न्यायाधीशों केरूप में� �नियुक्ति क� बाबत, और (ii) ऐसे व्यिक्त क� जिला न्यायाधीशों के रूप में� पदस्थापना, प्रोन्न�त याअंतरण क� बाबत, जो सं�विधिान (बीसवां संशोधन) अ�ध�नयमें, 1966 के प्रारंभ से पहले �कसी समेंयअनुच्छेद 233 या अनु च्छेद 235 के उपबंधों� के अनु सार न करके अन्यथा �कयागया है, के वल इस तथ्य के कारण �क ऐसी �नियुक्ति, पदस्थापना, प्रोन्न�त याअंतरण उक्त उपबंधों� के अनु सार नह�ं �कया गया था , यह नह�ं समेंझा जाएगा �कवह अवैध या शू न्य है या कभी भी अवैध या शू न्य रहा था ; (ख) �कसी राज्यों में� जिला न्यायाधीशों के रूप में� अनु च्छेद 233 याअनुच्छेद 235 के उपबंधों� के अनु सार न करके अन्यथा �नियुक्त, पदस्था�पत, प्रोन्नत या अंत�रत �कसी व्यिक्त द्वारा या उसके समें� सं�विधिान (बीसवांसंशोधन) अ�ध�नयमें, 1966 के प्रारंभ से पहले प्रयु क्त अ�ध का�रता क�, पा�रत �कए गए या �दएगए �निर्णय, �डिक्री�, दंडादेश या आदेश क� और �कए गए अन्यकायर् या कायर्वाह� क� बाबत, के वल इस तथ्य के कारण �क ऐसी �नियुक्ति, पदस्थापना, प्रोन्न�त या अंतरण उक्त उपबंधों� के अनु सार नह�ं �कया गया था, यह नह�ं समेंझा जाएगा �क वह अवैध या अ�व �धमेंान्य है या कभी भी अवैध याअ�व�धमेंान्य रहा था ।

Simple Meaning

अनुच्छेद 233क (233क) को 1966 में 20वें संविधान संशोधन द्वारा कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों, पदस्थापनाओं, पदोन्नतियों और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों को वैध (Valid) बनाने के लिए जोड़ा गया था। ऐसा तब किया गया जब न्यायालयों ने कुछ नियुक्तियों को अमान्य घोषित कर दिया क्योंकि राज्य सरकारों ने उच्च न्यायालय के साथ उचित परामर्श नहीं किया था।

Explain Like Ten

1960 के दशक में, कुछ जिला जजों की नियुक्ति में एक तकनीकी गलती हो गई थी क्योंकि सरकार ने उच्च न्यायालय से पूरी तरह सलाह नहीं ली थी। उनके द्वारा दिए गए पुराने फैसलों को अवैध होने से बचाने के लिए, सरकार ने यह नया नियम बनाया ताकि उन जजों के सभी फैसले और काम कानूनी रूप से सही माने जाएं।

Student Mode

अनुच्छेद 233क को 20वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1966 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। इसका मुख्य उद्देश्य उन जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों, पदस्थापनाओं, पदोन्नतियों और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों को वैध घोषित करना था जो अनुच्छेद 233 या 235 के प्रक्रियात्मक उल्लंघन के कारण कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे थे। इसने न्यायिक प्रणाली को प्रशासनिक अस्थिरता से बचाया।

Example

1960 के दशक में, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उत्तर प्रदेश में कई जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति को अवैध घोषित कर दिया क्योंकि राज्य सरकार ने नियमों के तहत उच्च न्यायालय से परामर्श नहीं किया था। इससे एक बड़ा संकट खड़ा हो गया क्योंकि उन न्यायाधीशों द्वारा दिए गए सैकड़ों फैसले अमान्य हो सकते थे। इस संकट से बचने के लिए, संसद ने अनुच्छेद 233क पारित किया ताकि उनके निर्णयों और नियुक्तियों को कानूनी माना जा सके।

Key Takeaway

अनुच्छेद 233क एक सुरक्षात्मक प्रावधान (Saving Clause) था जिसने प्रक्रियात्मक त्रुटियों के कारण विवादित रहे जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों और निर्णयों को पूर्वव्यापी प्रभाव (Retroactive Effect) से वैध घोषित किया।

FAQs

अनुच्छेद 233क को संविधान में क्यों शामिल किया गया था?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति को प्रक्रियात्मक खामियों (अनुच्छेद 233 के उल्लंघन) के कारण अमान्य घोषित किए जाने के बाद, उनके निर्णयों और नियुक्तियों को वैध बनाने के लिए इसे 1966 में जोड़ा गया था।

अनुच्छेद 233क को किस संशोधन द्वारा संविधान में शामिल किया गया था?

20वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1966 द्वारा।

यदि अनुच्छेद 233क नहीं लाया जाता तो क्या प्रभाव होता?

उन न्यायाधीशों द्वारा दिए गए सभी निर्णय, सजाएं और आदेश अवैध (Void) हो जाते, जिससे कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था में भारी अराजकता फैल सकती थी।

Quiz

किस संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 233क को संविधान में जोड़ा गया था?

Answer: 20वां संशोधन

अनुच्छेद 233क द्वारा उन नियुक्तियों और निर्णयों को वैध बनाया गया जो किसके अनुरूप नहीं थे?

Answer: अनुच्छेद 233 या 235

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