Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 230 Simplified: उच्च न्यायालयों की अधिकारिता का संघ राज्यक्षेत्रों पर विस्तार

अनुच्छेद 230 संसद (Parliament) को किसी राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किसी संघ राज्यक्षेत्र (Union Territory) पर करने या उसे वहां से हटाने की शक्ति देता है। एक बार अधिकार क्षेत्र का विस्तार हो जाने पर, संबंधित राज्य का विधानमंडल उस अधिकार क्षेत्र को बदल या समाप्त नहीं कर सकता है, और केंद्र शासित प्रदेश की निचली अदालतों के लिए नियम बनाने के मामले में राज्यपाल (Governor) की जगह राष्ट्रपति (President) की मंजूरी आवश्यक होती है।

Official Text

[230 . उच्च न्यायालयि कि अधिकारिता का संघ राज्यिेत्रि पर विस्तार–(1) संसद्, विधि द्वारा, किसी संघ राज्यिेत्र पर किसी उच्च न्यायालय कि अधिकारिता का विस्तार कर सकेगी या किसी संघ राज्यिेत्र से किसी उच्च न्यायालय कि अधिकारिता का अपवजर्न कर सकेगी । (2) जहां किसी राज्य का उच्च न्यायालय किसी संघ राज्यिेत्र के संबंध मि अधिकारिता का प्रयोग करता है, वहां– (क) इस संविधान कि किसी बात का यह अथर् नहीं लगाया जाएगा कि वह उस राज्य के विधान-मंडल को उस अधिकारिता मि वृ द्धि, उसका निबधिन या उत्सादन करने के लिए सशक्त करती है ; और (ख) उस राज्यिेत्र मि अधीनस्थ न्यायालयि के लिए किन्हंि नियमि, प्ररूपि या सारणियि के संबंध मि , अनु च्छेद 227 मि राज्यपाल के प्रति निदशि का, यह अथर् लगाया जाएगा कि वह राष्ट्रपति के प्रति निदशि है ।

Simple Meaning

अनुच्छेद 230 संसद (Parliament) को किसी राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किसी संघ राज्यक्षेत्र (Union Territory) पर करने या उसे वहां से हटाने की शक्ति देता है। एक बार अधिकार क्षेत्र का विस्तार हो जाने पर, संबंधित राज्य का विधानमंडल उस अधिकार क्षेत्र को बदल या समाप्त नहीं कर सकता है, और केंद्र शासित प्रदेश की निचली अदालतों के लिए नियम बनाने के मामले में राज्यपाल (Governor) की जगह राष्ट्रपति (President) की मंजूरी आवश्यक होती है।

Explain Like Ten

केवल देश की संसद ही यह तय कर सकती है कि किसी राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) का अधिकार क्षेत्र किसी पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश (जैसे लक्षद्वीप) पर लागू होगा या नहीं। एक बार ऐसा होने पर, उस राज्य के नेता इस कोर्ट के अधिकारों में कोई बदलाव नहीं कर सकते हैं।

Student Mode

अनुच्छेद 230 संसद को यह अधिकार देता है कि वह कानून द्वारा किसी संघ राज्यक्षेत्र पर किसी उच्च न्यायालय की अधिकारिता का विस्तार कर सके या उसे अपवर्जित (Exclude) कर सके। यदि ऐसा विस्तार किया जाता है, तो: (a) राज्य विधानमंडल को उस अधिकारिता को बढ़ाने, सीमित करने या समाप्त करने का कोई अधिकार नहीं होगा, और (b) अनुच्छेद 227 के तहत राज्यपाल के प्रति संदर्भों को संघ राज्यक्षेत्र के संदर्भ में राष्ट्रपति (President) के प्रति संदर्भ माना जाएगा।

Example

संसद ने केरल उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का विस्तार केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप तक किया है। अनुच्छेद 230 के तहत, केवल संसद ही इस अधिकार क्षेत्र में बदलाव कर सकती है। केरल राज्य विधानमंडल के पास लक्षद्वीप पर केरल उच्च न्यायालय के अधिकारों को कम करने या बदलने का कोई अधिकार नहीं है।

Key Takeaway

अनुच्छेद 230 संसद को केंद्र शासित प्रदेशों पर उच्च न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र का निर्धारण करने का विशेष अधिकार देता है और उन्हें राज्य-स्तरीय विधायी हस्तक्षेप से बचाता है।

FAQs

क्या कोई राज्य विधानमंडल केंद्र शासित प्रदेश पर अपने उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को सीमित कर सकता है?

नहीं, अनुच्छेद 230(2)(a) स्पष्ट रूप से राज्य विधानमंडलों को उस अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने, सीमित करने या समाप्त करने से रोकता है जो संसद द्वारा संघ राज्यक्षेत्र पर विस्तारित किया गया है।

संघ राज्यक्षेत्र में अधीनस्थ न्यायालयों के लिए उच्च न्यायालय द्वारा बनाए गए नियमों को कौन मंजूरी देता है?

भारत के राष्ट्रपति (President)। अनुच्छेद 230(2)(b) के अनुसार, ऐसी स्थिति में राज्यपाल के स्थान पर राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक होती है।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर किस उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र है?

कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) का, जिसका विस्तार संसद द्वारा कानून बनाकर किया गया था।

Quiz

किसी संघ राज्यक्षेत्र पर उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का विस्तार करने की शक्ति किसके पास है?

Answer: भारत की संसद

जब किसी राज्य के उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र किसी संघ राज्यक्षेत्र तक फैलाया जाता है, तो वहां की निचली अदालतों के नियमों को मंजूरी दी जाती है:

Answer: भारत के राष्ट्रपति द्वारा

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