Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 229 Simplified: उच्च न्यायालयों के अधिकारी और सेवक तथा व्यय

अनुच्छेद 229 उच्च न्यायालयों (High Courts) की प्रशासनिक स्वतंत्रता को सुरक्षित करता है। इसके तहत उच्च न्यायालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) या उनके द्वारा निर्देशित न्यायाधीश/अधिकारी को होता है। कर्मचारियों की सेवा शर्तें भी मुख्य न्यायाधीश द्वारा बनाए गए नियमों से तय होती हैं, लेकिन वेतन, भत्ते, छुट्टी और पेंशन से संबंधित नियमों के लिए राज्यपाल (Governor) की मंजूरी आवश्यक है। उच्च न्यायालय के सभी प्रशासनिक खर्चे और वेतन सीधे राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State) पर भारित (Charged) होते हैं।

Official Text

उच्च न्यायालयि के अधिकारि और सेवक तथा व्यय–(1) किसी उच्च न्यायालय के अधिकारियि और सेवकि कि नियु िक्तयां उस न्यायालय का मु ख्य न्यायमू तिर् करेगा या उस न्यायालय का ऐसा अन्य न्यायाधीश या अधिकारि करेगा िजसे वह निदिष्ट करे : गया और संविधान (चवालसिवां संशोधन) अधिनियम, 1978 कि धारा 31 द्वारा (20- 6-1979 से) उसका लोप किया गया । अपने पा स मंगा लेगा तथा--” के स्थान पर प्रतिस्थापित । ि तालसिवां संशोधन) अधिनियम, 1977 कि धारा 9 द्वारा (13- 4-1978 से) “अनु च्छेद 131क के उपबंधि के अधीन रहते हु ए” शब्दि, अंकि और अरि का लोप किया गया । परंतु उस राज्य का राज्यपाल *** नियम द्वारा यह अपेिा कर सकेगा कि ऐसी किन्हंि दशाओं मि जो नियम मि विनिदिर्ष्ट कि जाएं, किसी ऐसे व्यिक्त को, जो पहले से हि न्यायालय से संलग्न नहीं है, न्यायालय से संबंधित किसी पद पर राज्य लोक सेवा आयोग से परामशर् करके हि नियु क्त किया जाएगा, अन्यथा नहीं । (2) राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि के उपबंधि के अधीन रहते हु ए, उच्च न्यायालय के अधिकारियि और सेवकि कि सेवा कि शति ऐसी हगिी जो उस न्याया लय के मु ख्य न्यायमू तिर् या उस न्यायालय के ऐसे अन्य न्यायाधीश या अधिकारि द्वारा, िजसे मु ख्य न्यायमू तिर् ने इस प्रयोजन के लिए नियम बनाने के लिए प्राधिकृ त किया है, बनाए गए नियमि द्वारा विहित कि जाएं : परंतु इस खंड के अधीन बनाए गए नियमि के लिए, जहां तक वे वेतनि, भिि, छु ट्टि या पि शनि से संबंधित हि , उस राज्य के राज्यपाल के *** अनु मोदन कि अपेिा होगी । (3) उच्च न्यायालय के प्रशासनिक व्यय, िजनके अंतगर्त उस न्यायालय के अधिकारियि और सेवकि को या उनके संबंध मि संदेय सभी वेतन, भिे और पि शन हि , राज्य कि संचित निधि पर भारित हगिे और उस न्यायालय द्वारा लि गई फसि ि और अन्य धनराशियां उस निधि का भाग हगिी ।

Simple Meaning

अनुच्छेद 229 उच्च न्यायालयों (High Courts) की प्रशासनिक स्वतंत्रता को सुरक्षित करता है। इसके तहत उच्च न्यायालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) या उनके द्वारा निर्देशित न्यायाधीश/अधिकारी को होता है। कर्मचारियों की सेवा शर्तें भी मुख्य न्यायाधीश द्वारा बनाए गए नियमों से तय होती हैं, लेकिन वेतन, भत्ते, छुट्टी और पेंशन से संबंधित नियमों के लिए राज्यपाल (Governor) की मंजूरी आवश्यक है। उच्च न्यायालय के सभी प्रशासनिक खर्चे और वेतन सीधे राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State) पर भारित (Charged) होते हैं।

Explain Like Ten

राज्य के मुख्य न्यायाधीश के पास उच्च न्यायालय के सभी कर्मचारियों (जैसे क्लर्क, सहायक आदि) को काम पर रखने और उनके लिए नियम बनाने की पूरी शक्ति होती है। कोर्ट को सरकार के दबाव से बचाने के लिए, इसके सभी खर्चे और वेतन राज्य के खजाने से अपने आप दिए जाते हैं, और इसके लिए नेताओं के वोट की जरूरत नहीं होती।

Student Mode

अनुच्छेद 229 उच्च न्यायालय की प्रशासनिक स्वायत्तता सुनिश्चित करता है। खंड (1) के तहत, उच्च न्यायालय के कर्मचारियों की नियुक्ति मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित व्यक्ति द्वारा की जाती है (राज्यपाल नियमों के तहत राज्य लोक सेवा आयोग (State Public Service Commission) से परामर्श का प्रावधान कर सकते हैं)। खंड (2) सेवा शर्तों को तय करने का अधिकार मुख्य न्यायाधीश को देता है, हालांकि वित्तीय प्रभाव वाले नियमों (वेतन, पेंशन) पर राज्यपाल की स्वीकृति आवश्यक है। खंड (3) के अनुसार, न्यायालय के सभी प्रशासनिक व्यय और कर्मचारियों के वेतन राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State) पर भारित होते हैं, जो गैर-मतदान योग्य (Non-votable) होते हैं।

Example

यदि राज्य सरकार का वित्त विभाग उच्च न्यायालय के क्लर्कों की भर्ती पर एकतरफा रोक लगाना चाहता है, तो वह ऐसा नहीं कर सकता। मुख्य न्यायाधीश के पास कर्मचारियों की भर्ती करने और उनकी सेवा शर्तें तय करने की संवैधानिक शक्ति है, और उनके वेतन का भुगतान राज्य विधानसभा में मतदान के बिना सीधे राज्य के खजाने से किया जाता है।

Key Takeaway

अनुच्छेद 229 उच्च न्यायालयों को स्टाफ प्रबंधन में स्वायत्तता देता है और उनके खर्चों को राज्य की संचित निधि पर भारित करके वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।

FAQs

उच्च न्यायालय के कर्मचारियों और अधिकारियों की नियुक्ति कौन करता है?

उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) या उनके द्वारा निर्देशित कोई अन्य न्यायाधीश या अधिकारी।

क्या उच्च न्यायालय के कर्मचारियों के वेतन और भत्ते से जुड़े नियमों पर राज्यपाल की सहमति आवश्यक है?

हाँ, अनुच्छेद 229(2) के परंतुक के तहत, वेतन, भत्ते, छुट्टी या पेंशन से संबंधित नियमों के लिए राज्य के राज्यपाल (Governor) की स्वीकृति अनिवार्य है।

उच्च न्यायालय के खर्चों के संदर्भ में 'राज्य की संचित निधि पर भारित' होने का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि इन खर्चों पर राज्य विधानसभा (State Legislature) में वार्षिक मतदान नहीं कराया जा सकता; इनका भुगतान सीधे राज्य के खजाने से अनिवार्य रूप से किया जाता है, जिससे न्यायालय की वित्तीय स्वतंत्रता बनी रहती है।

Quiz

मुख्य न्यायाधीश द्वारा बनाए गए उच्च न्यायालय के कर्मचारियों के वेतन और पेंशन से संबंधित नियमों के लिए किसकी मंजूरी आवश्यक है?

Answer: राज्य के राज्यपाल

उच्च न्यायालय के प्रशासनिक खर्च किस पर भारित होते हैं?

Answer: राज्य की संचित निधि पर

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