Part VI - The States • अनुच्छेद
अनुच्छेद 228क Simplified: राज्य विधियों की संवैधानिक वैधता से संबंधित प्रश्नों के निपटारे के लिए विशेष उपबंध (निरसित)
अनुच्छेद 228क (228क) आपातकाल के दौरान 42वें संशोधन (1976) द्वारा जोड़ा गया एक अन्य प्रतिबंधात्मक अनुच्छेद था। इसके तहत राज्य के कानूनों की संवैधानिक वैधता का फैसला करने के लिए उच्च न्यायालय में कम से कम पांच न्यायाधीशों की पीठ का होना और कानून को अमान्य करने के लिए दो-तिहाई बहुमत होना अनिवार्य किया गया था। इस प्रक्रियात्मक जटिलता को खत्म करने के लिए इसे 1977 में 43वें संशोधन द्वारा निरसित (हटा) कर दिया गया था।
Official Text
संविधान (तैंतालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1977 की धारा 10 द्वारा (13-4-1978 से) निरसित।
Simple Meaning
अनुच्छेद 228क (228क) आपातकाल के दौरान 42वें संशोधन (1976) द्वारा जोड़ा गया एक अन्य प्रतिबंधात्मक अनुच्छेद था। इसके तहत राज्य के कानूनों की संवैधानिक वैधता का फैसला करने के लिए उच्च न्यायालय में कम से कम पांच न्यायाधीशों की पीठ का होना और कानून को अमान्य करने के लिए दो-तिहाई बहुमत होना अनिवार्य किया गया था। इस प्रक्रियात्मक जटिलता को खत्म करने के लिए इसे 1977 में 43वें संशोधन द्वारा निरसित (हटा) कर दिया गया था।
Explain Like Ten
यह एक पुराना नियम था जिसने यह तय किया था कि अगर किसी राज्य के कानून को गलत साबित करना है, तो उच्च न्यायालय के कम से कम 5 जजों को एक साथ बैठना होगा और दो-तिहाई जजों को इसके पक्ष में होना होगा। इससे काम बहुत धीमा हो गया था, इसलिए 1977 में इसे हटा दिया गया।
Student Mode
अनुच्छेद 228क को 42वें संशोधन, 1976 द्वारा संविधान में शामिल किया गया था। इसने न्यायिक समीक्षा पर प्रक्रियात्मक सीमाएं लगाईं: राज्य के कानून की वैधता का निर्धारण केवल न्यूनतम 5 न्यायाधीशों की पीठ (या जहां कुल न्यायाधीश 5 से कम हों, वहां सभी न्यायाधीशों की पीठ) द्वारा किया जा सकता था, और इसके लिए 2/3 बहुमत आवश्यक था। इसे 43वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा निरसित कर दिया गया।
Example
अनुच्छेद 228क के तहत, यदि किसी नागरिक ने एक छोटे से स्थानीय टैक्स कानून को किसी उच्च न्यायालय में चुनौती दी, तो अदालत को पांच न्यायाधीशों की एक बड़ी पीठ का गठन करना पड़ता था, जिससे सुनवाई में भारी देरी होती थी। 1977 में इस अनुच्छेद के निरस्त होने के बाद, सामान्य दो-न्यायाधीशों की खंडपीठ (Division Bench) भी इन मामलों की आसानी से सुनवाई कर सकती थी।
Key Takeaway
अनुच्छेद 228क के निरसन से उच्च न्यायालयों में राज्य के कानूनों की वैधता की समीक्षा करने की प्रक्रिया फिर से सरल और सुलभ हो गई।
FAQs
निरसित अनुच्छेद 228क के तहत राज्य के कानूनों की समीक्षा के लिए न्यूनतम बेंच का आकार क्या था?
इसके लिए कम से कम पांच न्यायाधीशों (Five Judges) की पीठ का होना अनिवार्य था, बशर्ते कि उस उच्च न्यायालय में कुल न्यायाधीशों की संख्या पांच से कम न हो।
अनुच्छेद 228क को क्यों निरस्त कर दिया गया था?
क्योंकि इसने न्यायिक समीक्षा की प्रक्रिया में भारी रुकावटें पैदा की थीं, जिससे सामान्य राज्य कानूनों की वैधता की जांच के लिए भी बड़ी पीठों का गठन करना पड़ता था और अदालतों में मुकदमों का बोझ बढ़ता था।
किस संशोधन ने अनुच्छेद 228क को हटाया?
43वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा इसे निरसित किया गया था।
Quiz
निरसित अनुच्छेद 228क के तहत राज्य कानूनों की संवैधानिक समीक्षा के लिए न्यूनतम कितने न्यायाधीशों की पीठ आवश्यक थी?
Answer: 5 न्यायाधीश
अनुच्छेद 228क के तहत किसी राज्य के कानून को असंवैधानिक घोषित करने के लिए किस बहुमत की आवश्यकता थी?
Answer: दो-तिहाई बहुमत