Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 226क Simplified: अनुच्छेद 226 के अधीन कार्यवाहियों में केंद्रीय विधियों की संवैधानिक वैधता पर विचार न किया जाना (निरसित)

अनुच्छेद 226क (226क) एक प्रतिबंधात्मक प्रावधान था जिसे 1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। इसने राज्य के उच्च न्यायालयों (High Courts) को नागरिकों द्वारा दायर रिट याचिकाओं में केंद्रीय (संघीय) कानूनों की संवैधानिक वैधता पर विचार करने से रोक दिया था। नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और उच्च न्यायालयों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्तियों को पूरी तरह से बहाल करने के लिए इसे 1977 में 43वें संशोधन द्वारा संविधान से हटा (निरसित) दिया गया था।

Official Text

संविधान (तैंतालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1977 की धारा 8 द्वारा (13-4-1978 से) निरसित।

Simple Meaning

अनुच्छेद 226क (226क) एक प्रतिबंधात्मक प्रावधान था जिसे 1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। इसने राज्य के उच्च न्यायालयों (High Courts) को नागरिकों द्वारा दायर रिट याचिकाओं में केंद्रीय (संघीय) कानूनों की संवैधानिक वैधता पर विचार करने से रोक दिया था। नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और उच्च न्यायालयों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्तियों को पूरी तरह से बहाल करने के लिए इसे 1977 में 43वें संशोधन द्वारा संविधान से हटा (निरसित) दिया गया था।

Explain Like Ten

यह एक पुराना नियम था जिसे आपातकाल के दौरान बनाया गया था ताकि स्थानीय उच्च न्यायालय (High Court) केंद्र सरकार के कानूनों की जांच न कर सकें। इस नियम को 1977 में हटा दिया गया ताकि उच्च न्यायालय फिर से नागरिकों को गलत केंद्रीय कानूनों से बचा सकें।

Student Mode

अनुच्छेद 226क को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था। इसके तहत राज्य उच्च न्यायालयों के रिट अधिकार क्षेत्र को सीमित करते हुए उन्हें केंद्रीय कानूनों की संवैधानिक वैधता की जांच करने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायिक समीक्षा के सिद्धांत को पुनर्स्थापित करने के लिए, संसद ने 43वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा इस अनुच्छेद को निरसित कर दिया।

Example

यदि केंद्र सरकार ने कोई ऐसा कानून पारित किया जो केरल के एक नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन करता था, तो अनुच्छेद 226क के कारण केरल उच्च न्यायालय उस कानून की वैधता की सुनवाई नहीं कर सकता था। उस नागरिक को केवल उच्चतम न्यायालय जाना पड़ता था। 1977 में इस अनुच्छेद के हटने के बाद, केरल उच्च न्यायालय फिर से ऐसे मामलों की सुनवाई करने के लिए स्वतंत्र हो गया।

Key Takeaway

अनुच्छेद 226क को हटाकर उच्च न्यायालयों की केंद्रीय कानूनों की संवैधानिक समीक्षा करने की महत्वपूर्ण शक्ति को बहाल किया गया था।

FAQs

संविधान में अनुच्छेद 226क को क्यों शामिल किया गया था?

इसे आपातकाल (Emergency) के दौरान केंद्रीय कानूनों को राज्य के उच्च न्यायालयों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) से बचाने के लिए जोड़ा गया था, जिससे नागरिक केवल उच्चतम न्यायालय में ही अपील कर सकते थे।

किस संशोधन द्वारा अनुच्छेद 226क को निरसित (निरस्त) किया गया था?

43वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा।

अनुच्छेद 226क को निरस्त करने का क्या प्रभाव हुआ?

इससे उच्च न्यायालयों की अनुच्छेद 226 के तहत केंद्रीय कानूनों को भी असंवैधानिक घोषित करने की शक्ति पुनः स्थापित हो गई।

Quiz

अनुच्छेद 226क ने किस न्यायालय को केंद्रीय कानूनों की वैधता की जांच करने से रोक दिया था?

Answer: उच्च न्यायालय

किस संशोधन द्वारा अनुच्छेद 226क को हटाया गया था?

Answer: 43वां संशोधन

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