Part VI - The States • अनुच्छेद
अनुच्छेद 226 Simplified: कुछ रिट जारी करने की उच्च न्यायालयों की शक्ति
अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों (High Courts) को नागरिकों के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) और अन्य कानूनी अधिकारों को लागू करने के लिए रिट जारी करने की शक्ति देता है। इनमें बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), परमादेश (Mandamus), प्रतिषेध (Prohibition), अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto) और उत्प्रेषण (Certiorari) शामिल हैं। उच्च न्यायालय की यह शक्ति उच्चतम न्यायालय की अनुच्छेद 32 के तहत रिट शक्ति से अधिक व्यापक है, क्योंकि यह सामान्य कानूनी अधिकारों ('किसी अन्य उद्देश्य के लिए') पर भी लागू होती है। यदि कार्रवाई का कारण (Cause of Action) उस राज्य के भीतर उत्पन्न होता है, तो उच्च न्यायालय देश में कहीं भी स्थित सरकार या प्राधिकरण को निर्देश दे सकता है। एकपक्षीय अंतरिम स्थगन (Ex-parte Interim Stay) के दुरुपयोग को रोकने के लिए, खंड (3) यह अनिवार्य करता है कि यदि बिना सुनवाई के स्थगन दिया जाता है, तो उसे रद्द करने के आवेदन पर 2 सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाना चाहिए, अन्यथा स्थगन स्वतः समाप्त हो जाएगा।
Official Text
[226 . कु छ रिट निकालने कि उच्च न्यायालय कि शिक्त – (1) अनु च्छेद 32 मि किसी बात के होते हु ए भी *** प्रत्येक उच्च न्यायालय को उन राज्यिेत्रि मि सवर् त्र, िजनके संबंध मि वह अपनी अधिकारिता का प्रयोग करता है, [भाग 3 द्वारा प्रदि अधिकारि मि से किसी को प्रवतिर्त कराने के लिए और किसी अन्य प्रयोजन के लिए] उन राज्यिेत्रि के भीतर किसी व्यिक्त या प्राधिकारि को या समु चित मामलि मि किसी सरकार को ऐसे निदे श, आदेश या रिटिजनके अंतगर्त 78 [बंदि प्रत्यिीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृ च्छा और उत्प्रे षण रिट हि , या उनमि से कोई] निकालने कि शिक्त होगी ।] (2) किसी सरकार, प्राधिकारि या व्यिक्त को निदेश, आदेश या रिट निकालने कि खंड (1) द्वारा प्रदि शिक्त का प्रयोग उन राज्यिेत्रि के संबंध मि , िजनके भीतर ऐसी शिक्त के प्रयोग के लिए वादहेतु क पू णर्त: या भागत: उत्पन्न होता है, अधिकारिता का प्रयोग करने वाले किसी उच्च न्यायालय द्वारा भी, इस बात के होते हु ए भी किया जा सकेगा कि ऐसी सरकार या प्राधिकारि का स्थान या ऐसे व्यिक्त का निवास-स्थान उन राज्यिेत्रि के भीतर नहीं है । [(3) जहां कोई पकिार, िजसके विरुद्ध खंड (1) के अधीन किसी याचिका पर या उससे संबंधित किसी कायर्वाहि मि व्यादेश के रूप मि या रोक के रूप मि या किसी अन्य रीति से कोई अंतरिम आदेश– (क) ऐसे पकिार को ऐसी याचिका कि और ऐसे अंतरिम आदेश के लिए अभिवाक ् के समथर्न मि सभी दस्तावेजि कि प्रतिलिपियां, और तत्पश्चात ् संविधान (चवालसिवां संशोधन) अधिनियम, 1978 कि धारा 29 द्वारा ( 20- 6-1979 से) अंतःस्थापित । ु च्छेद 226 के स्थान पर प्रतिस्थापित । ि तालसिवां संशोधन) अधिनियम, 1977 कि धारा 7 द्वारा (13- 4-1978 से) “कि ं तु अनु च्छेद 131क और अनु च्छेद 226क के उपबंधि के अधीन रहते हु ए” शब्दि, अंकि और अरिि का लोप किया गया । प्रत्यिीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृ च्छा और उत्प्रे षण के प्रकार के लेख भी हि अथवा उनमि से किसी को” से आरंभ होकर “न्याय कि सारवान ् निष्फलता हु ई है, किसी िति के प्रतितोष के लिए” के साथ समाप्त होने वाले
Simple Meaning
अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों (High Courts) को नागरिकों के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) और अन्य कानूनी अधिकारों को लागू करने के लिए रिट जारी करने की शक्ति देता है। इनमें बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), परमादेश (Mandamus), प्रतिषेध (Prohibition), अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto) और उत्प्रेषण (Certiorari) शामिल हैं। उच्च न्यायालय की यह शक्ति उच्चतम न्यायालय की अनुच्छेद 32 के तहत रिट शक्ति से अधिक व्यापक है, क्योंकि यह सामान्य कानूनी अधिकारों ('किसी अन्य उद्देश्य के लिए') पर भी लागू होती है। यदि कार्रवाई का कारण (Cause of Action) उस राज्य के भीतर उत्पन्न होता है, तो उच्च न्यायालय देश में कहीं भी स्थित सरकार या प्राधिकरण को निर्देश दे सकता है। एकपक्षीय अंतरिम स्थगन (Ex-parte Interim Stay) के दुरुपयोग को रोकने के लिए, खंड (3) यह अनिवार्य करता है कि यदि बिना सुनवाई के स्थगन दिया जाता है, तो उसे रद्द करने के आवेदन पर 2 सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाना चाहिए, अन्यथा स्थगन स्वतः समाप्त हो जाएगा।
Explain Like Ten
यदि सरकार या कोई अन्य व्यक्ति आपके अधिकारों को छीनने की कोशिश करता है, तो आप अपने राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) में जा सकते हैं। अदालत आपकी सुरक्षा के लिए बहुत शक्तिशाली आदेश जारी कर सकती है जिन्हें 'रिट' (Writs) कहा जाता है—जैसे बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) या परमादेश (Mandamus)। यह शक्ति उच्चतम न्यायालय से भी बड़ी है क्योंकि यह केवल बुनियादी अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि आम कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए भी काम करती है।
Student Mode
अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को असाधारण रिट अधिकार क्षेत्र (Writ Jurisdiction) प्रदान करता है। इसके तहत उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों (भाग III) और किसी भी अन्य कानूनी अधिकार के प्रवर्तन के लिए निर्देश, आदेश या रिट (जैसे Habeas Corpus, Mandamus, Prohibition, Quo Warranto, Certiorari) जारी कर सकते हैं। यह अधिकार क्षेत्र तब भी लागू होता है जब कार्रवाई का कारण (Cause of Action) उच्च न्यायालय के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में उत्पन्न हुआ हो, भले ही संबंधित सरकार का मुख्यालय बाहर हो। खंड (3) के अनुसार, यदि कोई अंतरिम आदेश (Interim Order) दूसरी पार्टी को सुने बिना (Ex-parte) पारित किया जाता है, तो उसे रद्द करने के आवेदन को दो सप्ताह के भीतर निपटाया जाना चाहिए, अन्यथा वह स्वतः निरस्त हो जाएगा। खंड (4) स्पष्ट करता है कि यह शक्ति उच्चतम न्यायालय की अनुच्छेद 32 की शक्तियों को कम नहीं करती है।
Example
यदि किसी राज्य विश्वविद्यालय द्वारा राज्य के नियमों (जो कि एक कानूनी अधिकार है, मौलिक अधिकार नहीं) का उल्लंघन करके किसी छात्र का प्रवेश मनमाने ढंग से रद्द कर दिया जाता है, तो छात्र सीधे उच्चतम न्यायालय में अनुच्छेद 32 के तहत नहीं जा सकता। लेकिन, वे अपने राज्य के उच्च न्यायालय में अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर कर सकते हैं क्योंकि यह 'किसी अन्य उद्देश्य के लिए' भी रिट जारी करने की अनुमति देता है। यदि उच्च न्यायालय विश्वविद्यालय को सुने बिना प्रवेश रद्द करने पर अंतरिम रोक (Interim Stay) लगा देता है, तो विश्वविद्यालय इसे हटाने के लिए आवेदन कर सकता है। यदि अदालत 14 दिनों के भीतर उस आवेदन पर निर्णय नहीं लेती है, तो स्थगन स्वतः समाप्त हो जाएगा।
Key Takeaway
अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को मौलिक और सामान्य कानूनी अधिकारों दोनों के प्रवर्तन के लिए व्यापक रिट अधिकार क्षेत्र प्रदान करता है, और एकपक्षीय अंतरिम रोक के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त समय सीमा निर्धारित करता है।
FAQs
उच्च न्यायालयों का रिट अधिकार क्षेत्र (अनुच्छेद 226) उच्चतम न्यायालय (अनुच्छेद 32) से किस प्रकार व्यापक है?
उच्चतम न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के प्रवर्तन के लिए रिट जारी कर सकता है, जबकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के साथ-साथ किसी भी अन्य सामान्य कानूनी अधिकार ('किसी अन्य उद्देश्य के लिए') के प्रवर्तन के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
यदि उच्च न्यायालय दो सप्ताह के भीतर अंतरिम रोक (Interim Stay) को रद्द करने के आवेदन पर निर्णय नहीं लेता है तो क्या होगा?
अनुच्छेद 226(3) के तहत, यदि विरोधी पक्ष द्वारा दायर किए गए ऐसे आवेदन को दो सप्ताह (Two Weeks) के भीतर निपटाया नहीं जाता है, तो एकपक्षीय अंतरिम रोक स्वतः ही समाप्त (Vacated) हो जाएगी।
क्या अनुच्छेद 226 स्वयं में एक मौलिक अधिकार है?
नहीं, अनुच्छेद 226 एक संवैधानिक अधिकार (Constitutional Right) है, मौलिक अधिकार नहीं (जैसे अनुच्छेद 32 है)। हालांकि, यह संविधान के बुनियादी ढांचे (Basic Structure) का एक हिस्सा है और इसे छीना नहीं जा सकता।
Quiz
अनुच्छेद 226 में प्रयुक्त शब्द 'किसी अन्य उद्देश्य के लिए' उच्च न्यायालय को किस हेतु रिट जारी करने में सक्षम बनाते हैं?
Answer: सामान्य वैधानिक और कानूनी अधिकार
यदि कोई न्यायालय 14 दिनों के भीतर एकपक्षीय स्थगन (Ex-parte Stay) को रद्द करने के आवेदन पर निर्णय लेने में विफल रहता है, तो वह स्थगन:
Answer: स्वतः समाप्त हो जाता है