Part VI - The States • अनुच्छेद
अनुच्छेद 224 Simplified: अपर और कार्यकारी न्यायाधीशों की नियुक्ति
अनुच्छेद 224 राष्ट्रपति को उच्च न्यायालय के कार्यभार को प्रबंधित करने के लिए अस्थायी न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की अनुमति देता है। खंड (1) के तहत, मामलों की अचानक वृद्धि या लंबित मुकदमों से निपटने के लिए अधिकतम 2 वर्ष की अवधि के लिए 'अपर न्यायाधीश' (Additional Judges) नियुक्त किए जा सकते हैं। खंड (2) के तहत, जब कोई स्थायी न्यायाधीश अस्थायी रूप से अनुपस्थित हो, बीमार हो, या कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य कर रहा हो, तो 'कार्यकारी न्यायाधीश' (Acting Judges) नियुक्त किए जा सकते हैं। कोई भी अपर या कार्यकारी न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक ही पद पर रह सकता है।
Official Text
[224 . अपर और कायर्कारि न्यायाधीशि कि नियु िक्त–(1) यदि किसी उच्च न्यायालय के कायर् मि किसी अस्थायी वृ द्धि के कारण या उसमि कायर् कि बकाया के कारण राष्ट्रपति को यह प्रतीत होता है कि उस न्यायालय के न्यायाधीशि कि संख्या को तत्समय बढ़ा देना चाहिए [तो राष्ट्रपति, राष्ट्रयि न्यायिक नियु िक्त आयोग के परामशर् से, सम्यक ् रूप से] अहिर्त व्यिक्तयि को दो वषर् से अनधिक कि ऐसी अवधि के लिए जो वह विनिदिर्ष्ट करे, उस न्यायालय के अपर न्यायाधीश नियु क्त कर सकेगा । (2) जब किसी उच्च न्यायालय का मु ख्य न्यायमू तिर् से भिन्न कोई न्यायाधीशु ख्य न्यायमू तिर् से परामशर् करने के पश्चात ् ” के स्थान पर प्रतिस्था पित । यह संशोधन सु प्रीम कोटर् एडवोकेट्स आन रिकाडर् एसोसिएशन और अन्य बनाम भारत संघ ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 117 मि उच्चतम न्यायालय के तारीख 16- 10- 2015 के आदेश द्वारा अभिखंडित कर दिया गया है । ि के” शब्दि का लोप किया गया । संशोधन) अधिनियम, 1956 कि धारा 14 द्वारा (1 -11-1956 से) मू ल खंड ( 2) का लोप किया गया । ु च्छेद 224 के स्थान पर प्रतिस्थापित । ् रूप से” के स्थान पर प्रतिस्थापित । यह संशोधन सु प्रीम कोटर् एडवोकेट्स आन रिकाडर् एसोसिएशन और अन्य बनाम भारत संघ ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 117 मि उच्चतम न्यायालय के तारीख 16- 10- 2015 के आदेश द्वारा अभिखंडित कर दिया गया है । अनु पिस्थति के कारण या अन्य कारण से अपने पद के कतर्व्यि का पालन करने मि असमथर् है या मु ख्य न्यायमू तिर् के रूप मि अस्थायी रूप से कायर् करने के लिए नियु क्त किया जाता है [तो राष्ट्रपति, राष्ट्रयि न्यायिक नियु िक्त आयोग के परामशर् से, सम्यक ् रूप से] अहिर्त किसी व्यिक्त को तब तक के लिए उस न्यायालय के न्यायाधीश के रूप मि कायर् करने के लिए नियु क्त कर सकेगा जब तक स्थायी न्यायाधीश अपने कतर्व्यि को फिर से नहीं संभाल लेता है । (3) उच्च न्यायालय के अपर या कायर्कारि न्यायाधीश के रूप मि नियु क्त कोई व्यिक्त [बासठ वषर्] कि आयु प्राप्त कर लेने के पश्चात ् पद धारण नहीं करेगा ।
Simple Meaning
अनुच्छेद 224 राष्ट्रपति को उच्च न्यायालय के कार्यभार को प्रबंधित करने के लिए अस्थायी न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की अनुमति देता है। खंड (1) के तहत, मामलों की अचानक वृद्धि या लंबित मुकदमों से निपटने के लिए अधिकतम 2 वर्ष की अवधि के लिए 'अपर न्यायाधीश' (Additional Judges) नियुक्त किए जा सकते हैं। खंड (2) के तहत, जब कोई स्थायी न्यायाधीश अस्थायी रूप से अनुपस्थित हो, बीमार हो, या कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य कर रहा हो, तो 'कार्यकारी न्यायाधीश' (Acting Judges) नियुक्त किए जा सकते हैं। कोई भी अपर या कार्यकारी न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक ही पद पर रह सकता है।
Explain Like Ten
यदि किसी उच्च न्यायालय में बहुत सारे मुकदमे लंबित हो जाते हैं, तो राष्ट्रपति दो साल तक के लिए अस्थायी 'अपर न्यायाधीशों' (Additional Judges) को नियुक्त कर सकते हैं। यदि कोई स्थायी न्यायाधीश बीमार है या छुट्टी पर है, तो राष्ट्रपति उनकी जगह काम करने के लिए 'कार्यकारी न्यायाधीश' को नियुक्त कर सकते हैं। लेकिन इन अस्थायी न्यायाधीशों को भी 62 वर्ष की आयु तक सेवानिवृत्त होना होगा।
Student Mode
अनुच्छेद 224 लंबित मुकदमों और रिक्तियों के प्रबंधन के लिए अस्थायी न्यायिक नियुक्तियों से संबंधित है। यदि मामलों का बैकलॉग बढ़ता है, तो राष्ट्रपति योग्य व्यक्तियों को अधिकतम दो वर्षों के लिए अपर न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त कर सकते हैं। कार्यकारी न्यायाधीशों की नियुक्ति स्थायी न्यायाधीशों की अस्थायी अनुपस्थिति को कवर करने के लिए की जाती है। कोई भी अपर या कार्यकारी न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु के बाद सेवा नहीं कर सकता।
Example
केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) में दीवानी मामलों के भारी बैकलॉग के कारण, राष्ट्रपति अनुच्छेद 224(1) के तहत 18 महीने की अवधि के लिए तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को अपर न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त करते हैं। यदि इनमें से कोई न्यायाधीश इस अवधि के दौरान 62 वर्ष का हो जाता है, तो उन्हें तुरंत सेवानिवृत्त होना होगा।
Key Takeaway
अनुच्छेद 224 अस्थायी अपर न्यायाधीशों (लंबित मुकदमों के लिए अधिकतम 2 वर्ष) और कार्यकारी न्यायाधीशों की नियुक्ति की अनुमति देता है, जिसके लिए 62 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु सीमा लागू होती है।
FAQs
उच्च न्यायालय के अपर न्यायाधीश का अधिकतम कार्यकाल कितना होता है?
दो वर्ष, हालांकि उन्हें पुनः नियुक्त किया जा सकता है या बाद में स्थायी न्यायाधीश बनाया जा सकता है।
अपर या कार्यकारी उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु क्या है?
62 वर्ष, जो स्थायी उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समान ही है।
अपर न्यायाधीशों की नियुक्ति क्यों की जाती है?
अदालत के कार्यों में अस्थायी वृद्धि को संभालने या संचित बैकलॉग (लंबित कार्यों) को निपटाने के लिए।
Quiz
अनुच्छेद 224 के तहत नियुक्त अपर न्यायाधीश का अधिकतम कार्यकाल कितना होता है?
Answer: 2 वर्ष
अपर या कार्यकारी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को किस आयु में सेवानिवृत्त होना चाहिए?
Answer: 62 वर्ष