Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 221 Simplified: न्यायाधीशों के वेतन आदि

अनुच्छेद 221 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की वित्तीय स्वतंत्रता की गारंटी देता। उनका वेतन कानून द्वारा संसद (Parliament) द्वारा निर्धारित किया जाता है (और तब तक, दूसरी अनुसूची में निर्दिष्ट)। उनके भत्ते, छुट्टी और पेंशन भी संसद द्वारा निर्धारित किए जाते हैं, जिसमें एक सख्त गारंटी होती है कि उनकी नियुक्ति के बाद उनके नुकसान के लिए इनमें बदलाव नहीं किया जा सकता है। ये खर्च सीधे राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State) पर भारित होते हैं।

Official Text

न्यायाधीशि के वेतन आदि– [(1) प्रत्येक उच्च न्यायालय के न्यायाधीशि को ऐसे वेतनि का संदाय किया जाएगा जो संसद्, विधि द्वारा, अवधारित करे और जब तक इस निमिि इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसे वेतनि का संदाय किया जाएगा जो दू सरि अनु सू ची मि विनिदिर्ष्ट हि ।] (2) प्रत्येक न्या याधीश ऐसे भिि का तथा अनु पिस्थति छु ट्टि और पि शन के संबंध मि ऐसे अधिकारि का, जो संसद् द्वारा बनाई गई विधि द्वारा या उसके अधीन समय- समय पर अवधारित किए जाएं, और जब तक इस प्रकार अवधारित नहीं किए जाते हि तब तक ऐसे भिि और अधिकारि का, जो दू सरि अनु सू ची मि विनिदिर्ष्ट हि , हकदार होगा : परंतु किसी न्यायाधीश के भिि मि और अनु पिस्थति छु ट्टि या पि शन के संबंध मि उसके अधिकारि मि उसकि नियु िक्त के पश्चात ् उसके लिए अलाभकारि परिवतर्न नहीं किया जाएगा । ु सू ची द्वारा (1-11- 1956 से) “किसी राज्य मि ” शब्दि का लोप किया गया । 3. 1 नवम्बर, 1956 । प्रतिस्थापित ।

Simple Meaning

अनुच्छेद 221 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की वित्तीय स्वतंत्रता की गारंटी देता। उनका वेतन कानून द्वारा संसद (Parliament) द्वारा निर्धारित किया जाता है (और तब तक, दूसरी अनुसूची में निर्दिष्ट)। उनके भत्ते, छुट्टी और पेंशन भी संसद द्वारा निर्धारित किए जाते हैं, जिसमें एक सख्त गारंटी होती है कि उनकी नियुक्ति के बाद उनके नुकसान के लिए इनमें बदलाव नहीं किया जा सकता है। ये खर्च सीधे राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State) पर भारित होते हैं।

Explain Like Ten

न्यायाधीशों को स्वतंत्र रखने और सरकारी धमकियों से बचाने के लिए, संविधान कहता है कि उनके वेतन और पेंशन संसद द्वारा तय किए जाते हैं और काम शुरू करने के बाद उन्हें कम या बदला नहीं जा सकता है।

Student Mode

अनुच्छेद 221 न्यायपालिका की वित्तीय स्वतंत्रता की रक्षा करता है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन, भत्ते, छुट्टी के अधिकार और पेंशन संसद द्वारा निर्धारित किए जाते हैं और राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State) पर भारित होते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि वित्तीय आपातकाल (Financial Emergency) को छोड़कर नियुक्ति के बाद इन शर्तों में न्यायाधीश के नुकसान के लिए बदलाव नहीं किया जा सकता।

Example

यदि राज्य सरकार कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) के किसी फैसले से नाखुश है, तो वह न्यायाधीश के वेतन में कटौती नहीं कर सकती और न ही उनकी पेंशन कम कर सकती है। संसद के पास ही उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन निर्धारित करने की शक्ति है, और उनके कार्यकाल के दौरान कोई भी इसे कम नहीं कर सकता।

Key Takeaway

अनुच्छेद 221 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन, पेंशन और भत्तों को नियुक्ति के बाद कम किए जाने से बचाता है, जिससे राज्य कार्यपालिका से उनकी वित्तीय स्वतंत्रता सुरक्षित रहती है।

FAQs

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन और पेंशन का भुगतान किस निधि से किया जाता है?

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन और भत्ते राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State) पर भारित होते हैं, जबकि उनकी पेंशन भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित होती है।

क्या कार्यकाल के दौरान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का वेतन कम किया जा सकता है?

नहीं, वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) को छोड़कर, उनकी नियुक्ति के बाद उनके वेतन और भत्तों में उनके नुकसान के लिए कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन निर्धारित करने का अधिकार किसके पास है?

संसद (Parliament) के पास कानून द्वारा उनके वेतन और भत्ते निर्धारित करने का अनन्य अधिकार है।

Quiz

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन का भुगतान किस निधि से किया जाता है?

Answer: राज्य की संचित निधि

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की पेंशन किस निधि पर भारित होती है?

Answer: भारत की संचित निधि

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