Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 220 Simplified: स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात विधि-व्यवसाय पर निर्बन्धन

अनुच्छेद 220 स्थायी उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद वकालत करने से रोकता है। उन्हें उच्चतम न्यायालय और अन्य उच्च न्यायालयों को छोड़कर भारत की किसी भी अदालत या प्राधिकरण के समक्ष वकालत या पैरवी करने से प्रतिबंधित किया गया है। यह सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को उन अधीनस्थ अदालतों (Subordinate Courts) को प्रभावित करने से रोकता है जहाँ वे कभी प्रशासनिक अधिकार रखते थे।

Official Text

[220. स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात ् विधि-व्यवसाय पर निबधिन–कोई व्यिक्त, िजसने इस संविधान के प्रारंभ के पश्चात ् किसी उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप मि पद धारण किया है, उच्चतम न्यायालय और अन्य उच्च न्यायालयि के सिवाय भारत मि किसी न्यायालय या किसी प्राधिकारि के समि अभि वचन या कायर् नहीं करेगा । स्पष्टकिरण–इस अनु च्छेद मि , “उच्च न्यायालय” पद के अंतगर्त संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 के प्रारंभ से पहले विद्यमान पहलि अनु सू ची के भाग ख मि विनिदिर्ष्ट राज्य का उच्च न्यायालय नहीं है ।]

Simple Meaning

अनुच्छेद 220 स्थायी उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद वकालत करने से रोकता है। उन्हें उच्चतम न्यायालय और अन्य उच्च न्यायालयों को छोड़कर भारत की किसी भी अदालत या प्राधिकरण के समक्ष वकालत या पैरवी करने से प्रतिबंधित किया गया है। यह सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को उन अधीनस्थ अदालतों (Subordinate Courts) को प्रभावित करने से रोकता है जहाँ वे कभी प्रशासनिक अधिकार रखते थे।

Explain Like Ten

एक बार जब कोई व्यक्ति किसी उच्च न्यायालय में स्थायी न्यायाधीश रह चुका होता है, तो वे उस राज्य की निचली अदालतों में एक नियमित वकील के रूप में काम नहीं कर सकते। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि वे उन स्थानीय न्यायाधीशों को प्रभावित न कर सकें जो कभी उनके अधीन काम करते थे। लेकिन वे अभी भी उच्चतम न्यायालय या अन्य उच्च न्यायालयों में वकालत कर सकते हैं।

Student Mode

अनुच्छेद 220 न्यायिक स्वतंत्रता बनाए रखने और हितों के टकराव को रोकने के लिए सेवानिवृत्ति के बाद स्थायी उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों पर प्रतिबंध लगाता है। एक सेवानिवृत्त स्थायी न्यायाधीश को भारत में किसी भी अधीनस्थ अदालत या प्राधिकरण के समक्ष पैरवी करने से रोक दिया जाता है, लेकिन उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) और अन्य उच्च न्यायालयों (High Courts) में वकालत करने की अनुमति दी जाती है।

Example

मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कोयंबटूर की जिला अदालत या तमिलनाडु राजस्व बोर्ड के समक्ष वकील के रूप में अभ्यास या उपस्थित नहीं हो सकते हैं। हालांकि, उन्हें कर्नाटक उच्च न्यायालय या भारत के उच्चतम न्यायालय के समक्ष मामलों में बहस करने की अनुमति है।

Key Takeaway

सेवानिवृत्त स्थायी उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को अधीनस्थ अदालतों में वकालत करने से रोका जाता है, लेकिन वे उच्चतम न्यायालय और अन्य उच्च न्यायालयों में वकालत कर सकते हैं।

FAQs

सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को निचली अदालतों में वकालत करने से क्यों रोका जाता है?

संभावित पूर्वाग्रह और प्रभाव को रोकने के लिए, क्योंकि निचली अदालत के न्यायाधीश एक पूर्व उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के प्रति झुकाव महसूस कर सकते हैं, जिन्होंने पहले उन पर प्रशासनिक अधिकार रखा था।

क्या एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय का न्यायाधीश दूसरे उच्च न्यायालय में वकालत कर सकता है?

हाँ। वे केवल उन अधीनस्थ अदालतों और उस विशिष्ट उच्च न्यायालय में वकालत करने से प्रतिबंधित हैं जहाँ उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में पद धारण किया था।

क्या यह प्रतिबंध अतिरिक्त या अस्थायी न्यायाधीशों पर भी लागू होता है?

नहीं। अनुच्छेद 220 के तहत प्रतिबंध केवल उन लोगों पर लागू होता है जिन्होंने उच्च न्यायालय के 'स्थायी' न्यायाधीश के रूप में पद धारण किया है।

Quiz

अनुच्छेद 220 के तहत, एक सेवानिवृत्त स्थायी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को कहाँ वकालत करने की अनुमति है?

Answer: उच्चतम न्यायालय और अन्य उच्च न्यायालयों दोनों में

अनुच्छेद 220 के तहत वकालत पर प्रतिबंध किस पर लागू होता है?

Answer: केवल स्थायी उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों पर

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