Part VI - The States • अनुच्छेद

अनुच्छेद 219 Simplified: उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान

अनुच्छेद 219 के तहत प्रत्येक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद ग्रहण करने से पहले राज्य के राज्यपाल (Governor) (या उनके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति) के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान लेना आवश्यक है। शपथ का प्रारूप तीसरी अनुसूची (Third Schedule) में दिया गया है और यह न्यायाधीश को ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करने और भारत के संविधान और कानूनों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध करता है। यह शपथ वह संवैधानिक क्षण है जब एक न्यायाधीश औपचारिक रूप से न्यायिक शक्ति ग्रहण करता है।

Official Text

उच्च न्यायालयि के न्यायाधीशि द्वारा शपथ या प्रतििान– *** उच्च न्यायालय का न्यायाधीश होने के लिए नियु क्त प्रत्येक व्यिक्त, अपना पदग्रहण करने से पहले, उस राज्य के राज्यपाल या उसके द्वारा इस निमिि नियु क्त व्यिक्त के समि, तीसरि अनु सू ची मि इस प्रयोजन के लिए दिए गए प्ररूप के अनु सार, शपथ लेगा या प्रतििान करेगा और उस पर अपने हस्तारि करेगा ।

Simple Meaning

अनुच्छेद 219 के तहत प्रत्येक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद ग्रहण करने से पहले राज्य के राज्यपाल (Governor) (या उनके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति) के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान लेना आवश्यक है। शपथ का प्रारूप तीसरी अनुसूची (Third Schedule) में दिया गया है और यह न्यायाधीश को ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करने और भारत के संविधान और कानूनों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध करता है। यह शपथ वह संवैधानिक क्षण है जब एक न्यायाधीश औपचारिक रूप से न्यायिक शक्ति ग्रहण करता है।

Explain Like Ten

इससे पहले कि एक न्यायाधीश किसी मामले की सुनवाई कर सके, उन्हें एक गंभीर वादा करना होता है—संवैधानिक शपथ। अनुच्छेद 219 कहता है कि यह वादा राज्यपाल (Governor) (या उनके प्रतिनिधि) के सामने, संविधान की तीसरी अनुसूची में लिखे गए सटीक शब्दों का उपयोग करके किया जाना चाहिए। केवल उसके बाद ही वे आधिकारिक तौर पर एक न्यायाधीश बनते हैं।

Student Mode

अनुच्छेद 219 उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की शपथ से संबंधित अनुच्छेद 124(6) को दर्शाता है। शपथ/प्रतिज्ञान राज्य के राज्यपाल (Governor) के समक्ष ली जाती है (राष्ट्रपति के समक्ष नहीं—उच्चतम न्यायालय के विपरीत)। इसका प्रारूप तीसरी अनुसूची (Third Schedule) में है। शपथ न्यायाधीश को इसके लिए प्रतिबद्ध करती है: ईमानदारी से कर्तव्यों का निर्वहन करना, संविधान और कानूनों को बनाए रखना, और बिना किसी भय, पक्षपात, स्नेह या द्वेष के सभी लोगों के साथ न्याय करना। यह शपथ एक अनिवार्य संवैधानिक पूर्व शर्त है।

Example

जब मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) के एक नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की जाती है, तो वे एक औपचारिक समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल (Governor) के समक्ष पद की शपथ लेते हैं। इसके सटीक शब्द तीसरी अनुसूची से आते हैं। इस शपथ को लेने के बाद ही न्यायाधीश कानूनी रूप से मामलों की सुनवाई करने, आदेशों पर हस्ताक्षर करने, या न्यायिक अधिकार का प्रयोग करने के हकदार होते हैं। एक न्यायाधीश जिसने अभी तक शपथ नहीं ली है, वह कानूनी रूप से पीठ में नहीं बैठ सकता।

Key Takeaway

अनुच्छेद 219 प्रत्येक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद ग्रहण करने से पहले राज्यपाल के समक्ष संवैधानिक शपथ लेना अनिवार्य बनाता है—यह शपथ तीसरी अनुसूची में दी गई है।

FAQs

उच्च न्यायालय का न्यायाधीश किसके समक्ष शपथ लेता है—राज्यपाल या राष्ट्रपति?

राज्य के राज्यपाल (Governor) (या उनके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति) के समक्ष। यह उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों से भिन्न है जो राष्ट्रपति के समक्ष शपथ लेते हैं। राज्यपाल शपथ दिलाते हैं क्योंकि उच्च न्यायालय राज्य स्तर के संस्थान हैं।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की शपथ का सटीक प्रारूप कहाँ पाया जाता है?

संविधान की तीसरी अनुसूची (Third Schedule) में शपथ और प्रतिज्ञान के निर्धारित प्रारूप शामिल हैं, जिसमें उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए शपथ पत्र (प्रारूप VIII) भी शामिल है।

Quiz

अनुच्छेद 219 के तहत उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को किसके समक्ष शपथ लेनी होती है?

Answer: राज्य के राज्यपाल (The Governor of the State)

अनुच्छेद 219 के तहत उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए शपथ का निर्धारित प्रारूप कहाँ मिलता है?

Answer: तीसरी अनुसूची

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