Part VI - The States • अनुच्छेद
अनुच्छेद 217 Simplified: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति और उसके पद की शर्तें
अनुच्छेद 217 उच्च न्यायालय (High Court) के न्यायाधीशों की नियुक्ति के नियम निर्धारित करता है। प्रत्येक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति (President) द्वारा की जाती है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इसका अर्थ है कॉलेजियम (Collegium) (उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों) की सिफारिश पर। योग्यताएं इस प्रकार हैं: भारत की नागरिकता + (a) कम से कम 10 वर्षों का न्यायिक कार्यालय का अनुभव या (b) कम से कम 10 वर्षों तक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता (Advocate) के रूप में कार्य। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक सेवा करते हैं (उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के विपरीत जो 65 वर्ष तक सेवा करते हैं)। वे इस्तीफा दे सकते हैं, उन्हें हटाया जा सकता है, वे उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत हो सकते हैं, या उनका तबादला किसी अन्य उच्च न्यायालय में किया जा सकता है।
Official Text
उच्च न्यायालय के न्या याधीश कि नियु िक्त और उसके पद कि शति–(1) [अनु च्छेद 124क मि निदिर्ष्ट राष्ट्रयि न्यायिक नियु िक्त आयोग कि सिफारिश पर, राष्ट्रपति] अपने हस्तारि और मु द्रा सहित अधिपत्र द्वारा उच्च न्यायालय के प्रत्येक न्यायाधीश को नियु क्त करेगा और वह न्यायाधीश [अपर या कायर्कारि न्यायाधीश कि दशा मि अनु च्छेद 224 मि उपबंधित रूप मि पद धारण करेगा और किसी अन्य दशा मि तब तक पद धारण करेगा जब तक वह [बासठ वषर्] कि आयु प्राप्त नहीं कर लेता है :]] परंतु – (क) कोई न्यायाधीश, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्तारि सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा ; (ख) किसी न्यायाधीश को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए अनु च्छेद 124 के खंड (4) मि उपबंधित रीति से उसके पद से राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकेगा ; (ग) किसी न्यायाधीश का पद, राष्ट्रपति द्वारा उसे उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियु क्त किए जाने पर या राष्ट्रपति द्वारा उसे भारत के राज्यिेत्र मि किसी अन्य उच्च न्यायालय को, अंतरित किए जाने पर रिक्त हो जाएगा । (2) कोई व्यिक्त, किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप मि नियु िक्त के लिए तभी अहिर्त होगा जब वह भारत का नाग रि क है और– (क) भारत के राज्यिेत्र मि कम से कम दस वषर् तक न्यायिक पद धारण कर चु का है ; या ु क का लोप किया गया । ु ख्य न्यायमू तिर् से, उस राज्य के राज्यपाल से और मु ख्य न्यायमू तिर् से भिन्न किसी न्यायाधीश कि नियु िक्त कि दशा मि उस उच्च न्यायालय के मु ख्य न्यायमू तिर् से परामशर् करने के पश्चात ् , राष्ट्रपति” के स्थान पर प्रतिस्थापित । यह संशो धन सु प्रीम कोटर् एडवोकेट्स आन रिकाडर् एसोसिएशन और अन्य बनाम भारत संघ ए.आई.आर. 2016 एस.सी. 117 मि उच्चतम न्यायालय के तारीख 16- 10- 2015 के आदेश द्वारा अभिखंडित कर दिया गया है । तक कि वह साठ वषर् कि आयु प्राप्त न कर ले” के स्थान पर प्रतिस्थापित । प्रतिस्थापित । (ख) किसी *** उच्च न्यायालय का या ऐसे दो या अधिक न्यायालयि का लगातार कम से कम दस वषर् तक अधिवक्ता रहा है ; *** (ग)* * * * स्पष्टकि रण – इस खंड के प्रयोजनि के लिए– [(क) भारत के राज्यिेत्र मि न्यायिक पद धारण करने कि अवधि कि संगणना करने मि वह अवधि भी सिम्मलित कि जाएगी िजसके दौरान कोई व्यिक्त न्यायिक पद धारण करने के पश्चात ् किसी उच्च न्यायालय का अधिवक्ता रहा है या उसने किसी अधिकरण के सदस्य का पद धारण किया है अथवा संघ या राज्य के अधीन कोई ऐसा पद धारण किया है िजसके लिए विधि का विशेषिान अपेिति है ;] [(कक) किसी उच्च न्यायालय का अधिवक्ता रहने कि अवधि कि संगणना करने मि वह अवधि भी सिम्मलित कि जाएगी िजसके दौरान किसी व्यिक्त ने अधिवक्ता होने के पश्चात ् [न्यायिक पद धारण किया है या किसी अधिकरण के सदस्य का पद धारण किया है अथवा संघ या राज्य के अधीन कोई ऐसा पद धारण किया है िजसके लिए विधि का विशेषिान अपेिति है ;] (ख) भारत के राज्यिेत्र मि न्यायिक पद धारण करने या किसी उच्च न्यायालय का अधिवक्ता रहने कि अवधि कि संगणना करने मि इस संविधान के प्रारंभ से पहले कि वह अवधि भी सिम्मलित कि जाएगी िजसके दौरान किसी व्यिक्त ने, यथािस्थति, ऐसे िेत्र मि
Simple Meaning
अनुच्छेद 217 उच्च न्यायालय (High Court) के न्यायाधीशों की नियुक्ति के नियम निर्धारित करता है। प्रत्येक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति (President) द्वारा की जाती है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इसका अर्थ है कॉलेजियम (Collegium) (उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों) की सिफारिश पर। योग्यताएं इस प्रकार हैं: भारत की नागरिकता + (a) कम से कम 10 वर्षों का न्यायिक कार्यालय का अनुभव या (b) कम से कम 10 वर्षों तक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता (Advocate) के रूप में कार्य। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक सेवा करते हैं (उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के विपरीत जो 65 वर्ष तक सेवा करते हैं)। वे इस्तीफा दे सकते हैं, उन्हें हटाया जा सकता है, वे उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत हो सकते हैं, या उनका तबादला किसी अन्य उच्च न्यायालय में किया जा सकता है।
Explain Like Ten
उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए, आपको भारत का नागरिक होना चाहिए, कम से कम 10 वर्षों तक किसी निचली अदालत में न्यायाधीश या उच्च न्यायालय में वकील होना चाहिए, और राष्ट्रपति (President) द्वारा नियुक्त किया जाना चाहिए। एक बार नियुक्त होने के बाद, आप 62 वर्ष की आयु तक काम करते हैं। अनुच्छेद 217 इन सभी नियमों को निर्धारित करता है।
Student Mode
अनुच्छेद 217 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रावधान है। मुख्य तत्व: (1) राष्ट्रपति (President) द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुहर के तहत वारंट द्वारा नियुक्ति; (2) भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI), उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और राज्यपाल (Governor) के साथ परामर्श; (3) सेवानिवृत्ति की आयु: 62 वर्ष (उच्चतम न्यायालय के 65 वर्ष के विपरीत); (4) योग्यताएं: भारतीय नागरिकता + 10 वर्ष न्यायिक पद या 10 वर्ष उच्च न्यायालय अधिवक्ता का अनुभव; (5) पद खाली होना: इस्तीफा, निष्कासन (अनुच्छेद 218 + 124), उच्चतम न्यायालय में पदोन्नति, या किसी अन्य उच्च न्यायालय में स्थानांतरण; (6) आयु संबंधी विवादों का निर्णय राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद किया जाता है—राष्ट्रपति का निर्णय अंतिम होता है।
Example
यदि कोई अधिवक्ता 12 वर्षों तक बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) में वकालत करता है, तो वह अनुच्छेद 217(2)(b) के तहत अर्हता प्राप्त करता है। नियुक्ति के बाद, वे 62 वर्ष की आयु तक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य करते हैं। यदि उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) उन्हें उच्चतम न्यायालय के लिए अनुशंसित करता है, तो राष्ट्रपति उन्हें अनुच्छेद 124 के तहत नियुक्त कर सकते हैं—जिस बिंदु पर उनका उच्च न्यायालय का पद स्वतः खाली हो जाता है।
Key Takeaway
अनुच्छेद 217 के अनुसार उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए भारत का नागरिक होना और 10 वर्ष का न्यायिक पद या उच्च न्यायालय में वकालत का अनुभव होना आवश्यक है; वे 62 वर्ष की आयु तक सेवा करते हैं और राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।
FAQs
उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु में क्या अंतर है?
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं (अनुच्छेद 217), जबकि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं (अनुच्छेद 124)। इस 3 वर्ष के अंतर पर अक्सर बहस होती है—आलोचकों का तर्क है कि इससे न्यायिक प्रणाली अनुभवी उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को समय से पहले खो देती है।
क्या सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को कार्यकारी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जा सकता है?
हाँ। अनुच्छेद 224क के तहत, किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से (उनकी सहमति से) लंबित मुकदमों को निपटाने के लिए कार्यकारी न्यायाधीश (Acting Judge) के रूप में कार्य करने का अनुरोध कर सकते हैं।
Quiz
अनुच्छेद 217 के तहत, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को किस आयु में सेवानिवृत्त होना चाहिए?
Answer: 62 वर्ष
अनुच्छेद 217(2) के तहत, कोई व्यक्ति उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए अर्हता प्राप्त करता है यदि वह कम से कम कितने समय तक उच्च न्यायालय का अधिवक्ता रहा हो?
Answer: 10 वर्ष